खेती अपडेत,और योजनाए कृषी ज्ञान व्हिडीओ माध्यम से जाने
60 लाख किसानों का एग्रोस्टार पर भरोसा
कैसे इस्तेमाल करे
मुख्य बिंदु:
घटक / संघटक
प्रेटिलाक्लोर 50% EC (इमल्सीफायबल कंसंट्रेट)
रासायनिक समूह
क्लोरोएसेटामाइड
HRAC समूह
15 (पूर्व में K3 समूह)
अतिरिक्त जानकारी
वीडलिफ्ट 50 EC एक चयनात्मक (सेलेक्टिव) प्री-इमर्जेंस खरपतवारनाशी है, जिसे रोपाई वाली धान की फसल के लिए तैयार किया गया है। इसे रोपाई के 0 से 3 दिन के अंदर प्रयोग करने पर यह घास, सेजेस पत्ती(सकरी पत्ती) वाले खरपतवारों पर व्यापक नियंत्रण देता है। इसका सक्रिय तत्व प्रेटीलाक्लोर अंकुरित होते खरपतवारों में मुख्य रूप से शुरुआती भागों (जैसे कोलियोप्टाइल, मेसोकोटाइल और हाइपोकोटाइल) के माध्यम से प्रवेश करता है और कुछ मात्रा में जड़ों द्वारा भी अवशोषित होता है। यह पौधे के अंदर ऊपर की ओर फैलता है और अधिक मात्रा में बढ़वार वाले हिस्सों में जमा होता है।
यह दवा पानी भरे खेत की मिट्टी और पानी की सतह के बीच एक परत बना लेती है। जब खरपतवार के बीज अंकुरित होकर ऊपर आने की कोशिश करते हैं, तो प्रेटीलाक्लोर उनके अंदर प्रवेश कर उनकी जरूरी बढ़वार प्रक्रियाओं को रोक देता है, जिससे खरपतवार जमीन से बाहर आने से पहले ही नष्ट हो जाते हैं।
कार्य करने की विधी
प्रेटीलाक्लोर खरपतवारों में बहुत लंबी श्रृंखला वाले फैटी एसिड (VLCFA) बनने की प्रक्रिया को रोकता है, जो पौधे की कोशिका झिल्ली, कोशिका दीवार और सामान्य वृद्धि के लिए बहुत जरूरी होते हैं। आसान भाषा में समझें तो यह दवा खरपतवार के अंदर जरूरी तत्वों का निर्माण ही बंद कर देती है, जिससे पौधे की बढ़वार रुक जाती है।
- जब VLCFA का निर्माण रुक जाता है:
- नई बन रही कोशिकाओं की झिल्ली ठीक से नहीं बन पाती और कोशिकाएं कमजोर हो जाती हैं।
- पौधे की लंबाई बढ़ना और कोशिकाओं का विभाजन रुक जाता है।
- अंकुरित होता हुआ खरपतवार जमीन से बाहर ही नहीं आ पाता और पहले ही नष्ट हो जाता है।
- इसका असर खासकर उगते हुए अंकुर (कोलियोप्टाइल) पर ज्यादा होता है, इसलिए सही समय पर दवा का प्रयोग करना बहुत जरूरी है।
प्रोडक्ट की ख़ासियत
1- विस्तृत स्पेक्ट्रम, तीनों प्रकार के खरपतवारों पर नियंत्रण: एक ही छिड़काव में घास, मोथा (सेजेस) और चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों को प्रभावी रूप से नियंत्रित करता है।
2- प्रभावी प्री-इमर्जेंस नियंत्रण: खरपतवार को अंकुरण के समय ही खत्म कर देता है, जिससे वे फसल के साथ पोषक तत्व, पानी, रोशनी और जगह के लिए प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाते।
3- लंबे समय तक प्रभाव: मिट्टी की सतह पर बनी दवा की परत 25–30 दिनों तक खरपतवारों को नियंत्रित रखती है, जिससे बार-बार निराई या दूसरी दवा की जरूरत कम हो जाती है।
4- फसल के लिए सुरक्षित: सभी अनुशंसित धान की किस्मों पर सुरक्षित, किसी भी जलवायु या क्षेत्र में फसल को नुकसान नहीं पहुंचाता, यदि सही मात्रा में उपयोग किया जाए।
5- सुरक्षित उपयोग गुण: यह ग्रीन श्रेणी का उत्पाद है, जिसमें विषाक्तता कम होती है, इसलिए इसका उपयोग करना अपेक्षाकृत सुरक्षित है।
6- पानी भरे खेत में भी छिड़काव किया जा सकता है।
किसी अन्य खरपतवारनाशक, फफूंदनाशक या कीटनाशक के साथ मिलाकर प्रयोग न करें। वीडलिफ्ट 50 ईसी का प्रयोग अकेले ही किया जाना चाहिए।
पुनरावृत्ति आवश्यकता
रोपाई 0–3 दिन के भीतर, खरपतवार निकलने से पहले, एक बार प्रयोग करें।
उपयोग करने की विधि
1- पानी का सही प्रबंधन बहुत जरूरी है: दवा डालते समय खेत में 2–3 सेमी पानी होना चाहिए। दवा पानी में फैलकर मिट्टी की सतह पर एक परत बनाती है। सूखे या दरार वाले खेत में इसका प्रभाव कम हो सकता है।
2- दवा डालने के बाद 2–3 दिन तक पानी न निकालें: अगर जल्दी पानी निकाल दिया, तो दवा की परत सही से नहीं बनती और असर कम हो जाता है।
3- 0–3 दिन के अंदर ही प्रयोग करें: यह दवा अंकुरित होते खरपतवारों पर असर करती है। अगर खरपतवार 2–3 पत्ती के स्टेज से आगे बढ़ जाएं, तो दवा सही काम नहीं करेगी।
4- समान रूप से छिड़काव करें: चाहे स्प्रे करें या रेत के साथ मिलाकर डालें, दवा पूरे खेत में बराबर फैलनी चाहिए, वरना कुछ जगहों पर खरपतवार बच सकते हैं।
5- कोहरे या तेज हवा के समय फैलने से रोकें: ऐसे मौसम में दवा का बहाव बढ़ जाता है, जिससे यह सही तरीके से खेत में नहीं बैठ पाता और प्रभाव कम हो सकता है।
6- सुरक्षा का ध्यान रखें: दवा डालते समय दस्ताने, मास्क और पूरे कपड़े पहनें। काम के बाद हाथ और शरीर अच्छी तरह धो लें। गलती से दवा शरीर में चली जाए तो कोई खास इलाज नहीं है, इसलिए लक्षण के अनुसार इलाज करवाएं।।
विशेष टिप्पणी
यहां दी गई जानकारी केवल संदर्भ के लिए है। उत्पाद के संपूर्ण विवरण और उपयोग संबंधी निर्देशों के लिए हमेशा उत्पाद लेबल और साथ में दिए गए पत्रक देखें।