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गर्मियों में भैंसों का करें देखभाल
गर्मी के तापमान में वृद्धि के कारण भैंस काफी प्रभावित होते है। सालभर के दूध उत्पादन और प्रजनन के लिए, ठीक तरह से भैंसों की देखभाल करने की जरुरत हैं। गर्मी के दौरान दुग्ध उत्पादन और प्रजनन क्षमता अधिक फायदेमंद होती है।
भैंसों में तापमान वृद्धि का प्रभाव
• भैंस की त्वचा में पसीने की ग्रंथियों की संख्या कम होती है। इसलिए शरीर में पसीने की ग्रंथियों के माध्यम से तापमान नियंत्रण की प्रक्रिया तुरंत नहीं दिखाई देती है। इसलिए तापमान में इस वृद्धि से भैंस तुरंत प्रभावित होते हैं। इसलिए उनके शरीर का तापमान बढ़ता है।
• भैंस का रंग गहरा काला होता है। काली रंग सूर्य के प्रकाश को जल्दी और अधिक मात्रा में अवशोषित किया जाता है। इससे भैंसों के शरीर का तापमान बढ़ जाता है।
• शरीर के तापमान में वृद्धि के कारण भैंस की भूख कम हो जाती है। इससे भैंस की खाने की क्षमता लगभग 25 से 30% तक कम हो जाती है। खाद्य घटकों की कमी के कारण दुग्ध उत्पादन में ५ से ७ प्रतिशत की कमी हो जाती है। कम आहार के कारण भैंस के पेट में पीएच परिवर्तन होता है और अम्लता भी बढ़ जाती है।
• शरीर के तापमान को नियंत्रित करने के लिए, शरीर में खनिजों के साथ-साथ सोडियम, पोटेशियम अधिक मात्रा में शरीर के बहार निकलते हैं और उनकी कमी देखी जाती है।
• तापमान बढने के कारण शरीर में जल स्तर कम हो जाता है। जिससे भैंसों में कमजोरी महसूस होती है और उनकी भूख कम हो जाती है। परिणाम स्वरुप दुग्ध उत्पादन में कमी हो जाती है।
• यदि भैंसों को सूर्य की रोशनी में रखा जाए तो उनके शरीर में हार्मोन असंतुलित हो जाता हैं और कुछ भैंसों में वास्तविक समय से पहले गर्भपात हो जाता है, जिससे अत्यधिक आर्थिक नुकसान हो जाता है।
उपाय-
1. आहार की योजना
• गर्मी मे भैंसों की भूख कम हो जाती है इसलिए, वे आहार की कमी से ग्रस्त हो जाती हैं । इसे दूर करने के लिए, तेल, वसा आदी जैसे ऊर्जा देने वाले घटकों का उपयोग करना चाहिए। तेजी से ऊर्जा मिलने के लिए, गुड़ का सीरा या गुड़ आदि का उपयोग करना चाहिए। जिससे ऊर्जा उत्पन्न होगी और दुध उत्पादनअच्छा होगा।
• सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक भैंसों को आहार न दें। बाहर का तापमान कम होने पर उन्हें चारा या बाजरे का भूसा या ज्वार दें। जहां तक संभव हो उन्हें 6 बजे से 10 बजे के बीच चारा और आहार दें।
• खनिजों के स्तर को बनाए रखने के लिए, आहार में सोडियम और पोटेशियम खनिज मिश्रण दे और इसके साथ साथ ५० ग्राम मोटा नमक दें।
• भैंसों को न्यूनतम 4 से 5 लीटर ठंडा पानी दें। 24 घंटे पानी की आपूर्ति से गर्मी का प्रभाव कम हो जाता है और दूध उत्पादन को बनाए रखने में मदद मिलती है।
• अगर हर रोज ५० ग्राम खाने का सोडा दिया जाता है तो पेट का पीएच स्थिर रहता है और आहार का पाचन हो जाता है। इससे दुध उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव होता है.
2. पशुओं के शेड की योजना
• अगर आप भैंसों को शेड में रखते हैं और अगर उसमें टिन की छत हो तो छत पर चारा, गेहूं या धान के चोकर की मोटी परत फैला दें। इससे सूरज की रोशनी टिन पर नहीं गिरती है और इससे पशुओं के शेड में तापमान कम रखने में मदद मिलती है।
• शिवड़ी, नीम या कोई भी अच्छी छाया देने वाला पेड़ लगाए। इससे शेड का तापमान कम और ठंडा रखने में मदद होती है। इसके अलावा पेड़ों की छांव के कारण ठंडक रहती है।
• सबसे जरूरी है कि एक दिन में दो बार पानी डालकर भैंस को साफ करें या फिर उसे पानी में तैरने दें।
संदर्भ- एग्रॉवन 21 फरवरी 2018