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खुरपका-मुंहपका रोग के संक्रमण को पहचानें
वर्तमान में, पशुओं को खुरपपका - मुंहपका रोग होने की संभावना है। लक्षणों को पहचानें और समय पर इसे नियंत्रित करने के उपाय करें।
लक्षण:
• पशुओं के मुंह में और दो खुरों के बीच छाले दिखाई देते हैं। मुंह में हुई चोटों से स्राव बाहर आता है। स्राव लगातार लार की तरह बाहर आता है।
• पशु चारा नहीं खाते। पशु उदास हो जाते हैं।
• पशु के शरीर का तापमान 104 से 105 डिग्री फ़ारेनहाइट तक बढ़ जाता है। मुंह में छाले होने के बाद शरीर का तापमान कम होता है।
• गायों, भैंसों में दूध उत्पादन घट जाता है।
प्रसार के कारण:
• पशुओं के मुंह में छाले होने के 3 से 4 दिनों के बाद, खुरों पर छाले दिखने लगते हैं। वे बड़े हो जाते हैं और स्राव बाहर आता है।
• पशुओं के मुंह और खुर के छाले से पीले रंग के चिपचिपा स्राव बाहर आता है। इस स्राव में हानिकारक वायरस होता है। चारे और पानी में इस स्राव के मिल जाने से रोग तेजी से फैलता है।
• यदि संक्रमण ज्यादा प्रमाण में हो तो खुर गिर जाते हैं। जिससे पशु लंगड़ाते हैं और एक स्थान पर चुपचाप बैठे रहते हैं।
तत्काल उपाय:
• पशुओं में मुंह के छाले: 15 ग्राम बोरीक एसिड पाउडर को प्रति लीटर पानी में मिलाना चाहिए। इस घोल से मुंह के छालों को धोएं । इस घोल से छालों को 5 से 6 दिनों तक प्रतिदिन 4 बार धो लें।
• पशुओं में खुर के छाले: 1 ग्राम पोटेशियम परमैंगनेट को 3 लीटर पानी के साथ मिलाना चाहिए। छालों को 5 से 6 दिनों तक प्रतिदिन 4 बार धो लें।
टीकाकरण जरूरी है:
• मानसून से पहले पशुओं को टीका लगाना आवश्यक है। यदि वर्तमान में यह संक्रमण पाया जाए तो पशु चिकित्सक से तुरंत स्वस्थ जानवरों को प्रतिरक्षात्मक टीकाकरण कराये।
निवारक उपाय:
• संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखा जाना चाहिए। शेड का जीवाणु-नाशन किया जाना चाहिए। जीवाणु-नाशन के लिए 1 से 2% चूने को पानी में मिलकर घोल तैयार करें। इस घोल से पशु शेड ठीक से धो लें। संक्रमित पशुओं की देखभाल करने वाले व्यक्ति को स्वस्थ पशुओं के लिए चारा और पानी नहीं देना चाहिए।
संदर्भ- एग्रोवन 29 दिसंबर 17