कृषि वार्ताकृषि जागरण
खेत से मिनटों में निकालें कंकड़-पत्थर इस मशीन से!
👉कृषि यंत्रों में लगातार उन्नति देखी जा रही है जिससे किसान को कई प्रकार से सुविधा होती है और किसान का समय बचता है। किसानों को होने वाली विशेष दिक्कतें भी भौगोलिक स्थान के साथ बदलती है। जैसे कहीं वर्षा अधिक होती है, कहीं कम वर्षा, कहीं मैदान समतल होते है तो कहीं ऊबड़ खाबड़, कहीं मिट्टी में विविधता आदि. ऐसे अनेक कारक हैं जिनसे कृषि कार्य प्रभावित होते हैं तथा ऐसे क्षेत्रों के लिए विशेष तकनीक की आवश्यकता होती है। आज देश कृषि क्षेत्र में काफी विकास कर रहा है तथा इसका श्रेय किसानों के अलावा आधुनिक कृषि यंत्रों को भी जाता है। खेत में कंकड़ पत्थर की समस्या से खेती करने में बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ता है और इससे निजात पाने के लिए मजदूरी भी अधिक लगती है। इससे मुख्य परेशानी खेत की जुताई करने और फसल के अंकुरण के समय होता है। अतः इस समस्या को दूर करने के लिए स्टोन पिकर मशीन एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। 👉यह मशीन या तकनीक उन क्षेत्रों के लिए विकसित की गई है जहां छोटे-बड़े पत्थरों की समस्या है। किसानों के लिए यह मशीन समय की बचत के साथ साथ मजदूरी भी बचाती है। जिसका सीधा सम्बंध फसल की उपज से है। यह स्टोन पिकर मशीन खेतों में से सभी आकार के पत्थरों को एक ही बार में निकाल देती है। इसे ट्रैक्टर के पीछे लगाकर चलाया जाता है। इस मशीन के पत्थर टैंक की क्षमता 800-900 किलो है। जिसे खाली भी किया जा सकता है। 👉मशीन की कार्यप्रणाली:- यह मशीन जमीन से छूते हुए ट्रैक्टर के माध्यम से चलती है। इसमें सीढ़ीनुमा चैन की प्लेट होती है जिसमें छोटे बड़े पत्थर इसमें फस कर पत्थरों के एक टैंक में पहुँच जाते हैं। इसके बाद यदि पत्थर का यह टैंक भर जाता है तो इस मशीन के हाइड्रोलीक सिस्टम से कंकड़ और पत्थरों को ट्रैक्टर ट्रॉली में खाली कर दिया जाता है। यह मशीन कम से कम 50 हॉर्स पावर के ट्रैक्टर में लगाई जा सकती है। यह ट्रैक्टर द्वारा चलने वाली मशीन लगभग प्रति एकड़ क्षेत्र में लगभग 2 घंटे के कम समय में पत्थरों को निकाल सकती है। 👉स्टोन पिकर की कीमत:- इस मशीन को पहली बार पंजाब में बनाया गया और इसकी बाजार कीमत 3 से 4 लाख रुपये रखी गई है. किन्तु अब दूसरे राज्यों में भी यह मशीन आ गई है। 👉स्टोन पिकर के लाभ:- यह मशीन खेत में से छोटे-बड़े सभी आकार के पत्थर निकाल सकती है। किसानों की कंकड़ पत्थर में लगने वाली मजदूरी के खर्च को खत्म कर देती है जिससे फसल की लागत में भी कमी आती है। किसानों का कंकड़ पत्थर बीनने की समस्या से छुटकारा दिलाकर समय की बचत करती है। खेत की जुताई के कार्य आसान करती है। फसल का उत्पादन बढ़ता है। खेत की भूमि उपजाऊ और फसल का उत्पादन बढ़ाती है। खेत में किए जाने वाले अन्य कार्य में सुविधा होती है। 👉🏻 खेती तथा खेती सम्बंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए कृषि ज्ञान को फॉलो करें। फॉलो करने के लिए अभी क्लिक ulink://android.agrostar.in/publicProfile?userId=558020 करें। स्रोत-कृषि जागरण, प्रिय किसान भाइयों यदि आपको दी गयी जानकारी उपयोगी लगी तो इसे लाइक👍करें और अपने अन्य किसान मित्रों के साथ जरूर शेयर करें धन्यवाद।
32
2
संबंधित लेख