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कृषि वार्ताअमर उजाला
केंद्र के इस कानून के बाद किसानों को सस्ती दरों पर मिल सकेगी बिजली!
किसानों की कृषि लागत कम रखने के लिए उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्य अपने किसानों को लगभग मुफ्त बिजली उपलब्ध कराते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि असीमित मुफ्त बिजली देने से इसका दुरूपयोग बढ़ता है और इसके कारण बिजली कंपनियों का घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है। अगर इसे रोका नहीं गया तो आने वाले समय में गंभीर बिजली संकट पैदा हो सकता है। नई प्रस्तावित बिजली नीति में इसके दुरूपयोग रोकने के लिए किसानों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए बिजली सब्सिडी देने का सुझाव दिया गया है। क्या है केंद्र की नई बिजली नीति 👉बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने चार चरणों में वर्ष - 2014, 2018, 2019 और अप्रैल 2020 में कई प्रस्ताव पेश किए हैं। 'विद्युत अधिनियम संशोधन विधेयक, 2020’ के एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव के अनुसार राज्य सरकारें किसानों को कृषि कार्य के लिए असीमित बिजली उपभोग की छूट नहीं दे सकेंगी। इसकी बजाय किसानों के घरों-खेतों पर मीटर लगाए जाने का सुझाव दिया गया है। इससे जो भी बिजली बिल आएगा, निर्धारित दरों के आधार पर उसका भुगतान पहले किसान को स्वयं करना होगा। बाद में राज्य सरकारें जितनी सब्सिडी देना चाहें, सीधे किसानों के खातों में डाल सकेंगी। 👉विशेषज्ञों का तर्क है कि किसानों को मुफ्त असीमित बिजली उपभोग की छूट देने पर इसका भारी दुरूपयोग होता है। स्वयं किसान भी बिजली की बचत को लेकर जागरूक नहीं होते हैं। किसानों को मुफ्त बिजली का लाभ अनेक अपात्र लोग भी उठाते हैं। इससे बिजली घाटा बढ़ता है। वर्तमान समय में प्रति वर्ष 80 हजार करोड़ रुपये का बिजली घाटा सरकार को सहना पड़ता है। केंद्र को उम्मीद है कि अगर हर किसान के घर बिजली का मीटर लग जाए और राज्यों को सीधे नकद सहायता देनी पड़ेगी तो बिजली के दुरुपयोग को रोका जा सकेगा। विद्युत अधिनियम संशोधन विधेयक 2020 के महत्वपूर्ण प्रस्ताव 👉इस समय विद्य़ुत नियामक आयोग में अध्यक्ष को लेकर तीन सदस्य होते हैं। अब इनकी संख्या बढ़ाकर सात की जाएगी, जिससे अलग-अलग विशेषज्ञों की कई कोर्ट बनाकर विद्युत से जुड़े मामलों का शीघ्र निबटारा किया जा सके। इस नियामक की अध्यक्षता अभी तक हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज करते थे, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड न्यायाधीश इसकी अध्यक्षता करेंगे। राज्यों के बिजली नियामक बोर्ड के गठन के लिए एक आयोग का गठन होगा, जिसमें राज्यों के साथ-साथ केंद्र की भी हिस्सेदारी होगी। 👉नई बिजली नीति में देश के पड़ोसी देशों नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से बिजली व्यापार की संभावनाओं को तलाशने की बात कही गई है। बिजली उत्पादन, वितरण और उपभोग के स्तरों पर अलग-अलग व्यवस्था कर बिजली के दुरुपयोग को रोकने की व्यवस्था की गई है। ग्राहकों को मोबाइल की तरह कई कंपनियों की सेवाएं देने की व्यवस्था लागू करने की संभवनाओं पर काम करने की कोशिश की गई है। 👉सरकार को उम्मीद है कि कई कंपनियों के होने सेे प्रतिस्पर्धा होगी और लोगों को सस्ती बिजली मिल सकेगी। बिजली के सौर ऊर्जा उपयोग को बढ़ाने की संभावनाओं पर ज्यादा जोर देने की बात कही गई है, जिससे गैर-नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम किया जा सके। चीन आयातित सौर ऊर्जा उपकरणों पर अतिरिक्त शुल्क लगाकर देश में ही सौर ऊर्जा उपकरणों को बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।   राज्यों की आशंका  👉प्रस्ताव में बिजली की दरें निर्धारित करने के लिए एक अलग व्यवस्था की गई है, जो बिजली की मूल लागत और वितरण के नुकसान को ध्यान में रखते हुए इसकी कीमतें तय कर सकेगा।  बिजली मंत्री आरके सिंह ने जून 2020 में एक प्रेस वार्ता के जरिए यह स्पष्ट किया है कि इससे राज्यों का बिजली दरें तय करने का अधिकार नष्ट नहीं होगा और वे अपने राज्यों में बिजली की दरें तय करने के लिए स्वतंत्र रहेंगे। केंद्रीय व्यवस्था केवल केंद्र से राज्यों को बिजली देने का दर निर्धारित करने के लिए बनाई गई है। स्रोत:- अमर उजाला, 28 Oct. 2020, प्रिय किसान भाइयों यदि आपको दी गयी जानकारी उपयोगी लगी तो इसे लाइक👍करें और अपने अन्य किसान मित्रों के साथ जरूर शेयर करें धन्यवाद। 👉🏻 खेती तथा खेती सम्बंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए कृषि ज्ञान को फॉलो करें। फॉलो करने के लिए अभी क्लिक ulink://android.agrostar.in/publicProfile?userId=558020 करें।
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