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एग्री डॉक्टर सलाहएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
धान की फसल में गॉल मिज कीट का नियंत्रण!
धान की फसल में गॉल मिज कीट नर्सरी से प्रारम्भ होकर कल्ले निकलने की अवस्था तक हानि पहुंचता है। इस कीट से ग्रसित तना चांदी के रंग की पोंगली में परिवर्तित हो जाता है और कीट ग्रसित पौधे में बालियां नहीं आती हैं। कल्ले फूटने की अवस्था में सर्वाधिक हानि होति है। इसके नियंत्रण के लिए प्रतिरोधी किस्मों जैसे फाल्गुना, सुरेखा, आई.आई. 33, अभया, रुचि आदि का प्रयोग करें। धान की कटाई के उपरांत पौधे के ठूंठे को नष्ट करें। नत्रजन युक्त उर्वरकों का उचित व संतुलित मात्रा में उपयोग करें। प्रकाश प्रपंच का प्रयोग करें। लैम्ब्डा-सायलोथ्रिन 02.50% ईसी @ 200 मिली प्रति 200 लीटर पानी के साथ छिड़काव करें।
स्रोत:- एग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, किसान भाइयों यदि आपको दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक करें एवं अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद।
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