आज का सुझावएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
जुलाई माह में धान बुआई पूर्व किये जाने वाले सम समायायिक कार्य!
वर्षा आरम्भ होते ही धान की बुवाई का कार्य आरम्भ कर देना चाहिये। जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के तीसरे सप्ताह तक रोपाई का समय सबसे उपयुक्त होता है।
धान खेत में लेव लगाने से पहले खेत के चारो तरफ अच्छी मेढ़बंदी करें और मेढ़ पर उगे खरपतवार को निकाल दें। जिससे खेत में बारिश और सिंचाई का पानी रुक सके और कीट और रोग को फैलने से रोका जा सके। खेत में पानी भरकर लेव लगाने से खेत में उगने वाले खरपतवार की रोकथाम करने में सहायक है और खेत में धान की रोपाई करते समय आसानी होती है, और फसल में पानी और पोषक तत्व का होने वाले नुकसान को कम किया जाता है।
खेत का समतलीकरण एवं जल निकास की व्यवस्था
खेत में लेव लगाते समय पाटा से खेत का समतलीकरण अच्छी तरह करें क्योंकि ऊँचा-नीचा खेत होने पर धान के पौध विकास पर बुरा प्रभाव पड़ता है। खेत से जल निकास की व्यवस्था भी सुनिश्चित कर लें क्योंकि धान रोपाई के बाद भी अधिक वर्षा होने पर वर्षा जल का पौधों के ऊपर तक जमाव अधिक समय तक होने पर पौधों के मरने की संभावना हो जाती है।
उर्वरकों का संतुलित प्रयोग एवं विधि
फसल में अधिक उरवर्क के प्रयोग से कीट और रोग फसल में ज्यादा आकर्षित होते हैं, और मिट्टी की उर्वरा क्षमता घटती है। इसलिए उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण के आधार पर ही करना उपयुक्त है। यदि किसी कारण वश मृदा का परीक्षण न हुआ तो उर्वरकों का प्रयोग सामन्यतः इस प्रकार से कर सकते हैं।
सामान्य तौर पर सिंचित दशा में नाइट्रोजन @ 120 किग्रा, फॉस्फोरस 60 किग्रा और पोटाश @ 60 किग्रा/एकड़ प्रयोग करें।
प्रयोग विधिः नाइट्रोजन की एक चौथाई भाग तथा फास्फोरस एवं पोटाश की पूर्ण मात्रा खेत की तैयारी के समय डालें, शेष नाइट्रोजन का दो चौथाई भाग कल्ले फूटते समय तथा शेष एक चौथाई भाग बाली बनने की प्रारम्भिक अवस्था पर प्रयोग करें।
रोपाई में प्रयोग करने सामान्य तौर पर 2-3 सप्ताह पुराने पौध उपयुक्त होते हैं तथा रोपाई में एक जगह पर 1से 2 पौध लगाना पर्याप्त होता है रोपाई में विलम्ब होने पर एक जगह पर 2 से 3 पौधे लगाना उचित होगा।
रोपाई के एक सप्ताह बाद खेत में जो पौधे मर जायें उनके स्थान पर दूसरे पौधों को तुरन्त लगा दें, ताकि प्रति इकाई पौधों की संख्या कम न होने पाये। अच्छी उपज के लिए प्रति वर्ग मीटर 250 से 300 बालियाँ अवश्य होनी चाहिए।
यदि आपको आज के सुझाव में दी गई जानकारी उपयोगी लगे, तो इसे लाइक करें और अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद।