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कपास की फसल में हरा तेला कीट का जीवन चक्र
हरा तेला छोटे पीले हरे रंग के कीट 0.5 से 3 मिमी लंबे होते हैं। इस कीट के शिशु और प्रौढ़ पौधे की पत्तियों से रस चूसते हैं। और चिपचिपा पदार्थों छोड़ते है। जिसकी बजह से प्रकाश संश्लेषण में बाधा उत्पन्न होती हैं। पत्तियों के किनारे पीले हो जाते हैं और बाद में लाल-भूरे रंग के हो जाते हैं। पत्तियों के शेष हिस्से पर अक्सर निचली सतह पर छोटे पीले धब्बों देखे जाते हैं। फिर पत्ते आमतौर पर सूख जाते हैं। कलियाँ और पूड़ियाँ भी जल्दी गिर जाती हैं। एक साल में इस कीट की 7 पीढ़ियां हैं। क्षति:- 1. शिशु और प्रौढ़ दोनों ही पत्तियों की कोशिका से रस चूसते हैं। 2. पत्तियां पर पहले पीले और फिर लाल धब्बे दिखाती हैं। 3. प्रकोपित पत्तियां नीचे की ओर मुड़ जाती हैं, और बाद में सूख कर गिर जाती हैं। 4. पौधे कमजोर हो जाते हैं और उनका फल गिर जाता है।
जीवन चक्र:- अंडे:- प्रौढ़ कीट पत्तियों की निचली सतह पर अंडे देता हैं। अंडे घुमावदार, लम्बे और रंग में पीले सफेद होते हैं। यह कीट अंडे समूह में रखते हैं। निम्फ- यह पत्तियों की निचली सतह पर रहकर पत्तियों का रस चूसते है। और कपास को क्षति पहुँचता है। यह कीट अपने जीवनकाल में पांच बार त्वचा निर्मोचन करता है। प्रौढ़:- प्रौढ़ लगभग 3.5 मिमी के होते हैं। यह लम्बे आकार के हल्के हरे शरीर के साथ इसके पंख पारदर्शी होते हैं। प्रबंधन:- • हरा तेला कीट के नियंत्रण के लिए प्रति एकड़ 7 से 10 पीले चिपचिपे जाल स्थापित करें। • एसीफेट 75% एसपी@ 156 ग्राम या एसिटामिप्रिड 20.00% एसपी @ 20 ग्राम प्रति एकड़ 200 लीटर पानी के साथ छिड़काव करें। स्रोत:- विक्टोरिया नोरेम यदि आपको दी गई जानकरी उपयोगी लगे तो, लाइक करें एवं अपने सभी किसान मित्रों के साथ शेयर करें।
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