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3 साल पहले लेमन ग्रास की खेती शुरू की, अब सालाना 6 लाख रु. कमाई!
👉🏻हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के रहने वाले ओम प्रकाश महज 10वीं तक पढ़े हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। कम उम्र से ही वे मजदूरी करने लगे। खेती की जमीन थी, लेकिन ज्यादातर हिस्सा बंजर था। इसलिए फसल न के बराबर होती थी। तीन साल पहले उन्हें लेमन ग्रास की खेती के बारे में पता चला। उन्हें आइडिया पसंद आया और पालमपुर से बीज लाकर उन्होंने लेमन ग्रास की खेती शुरू कर दी। 👉🏻आज उनके साथ 100 से ज्यादा किसान जुड़े हैं। वे लेमन ग्रास से ऑयल निकालकर मध्यप्रदेश, राजस्थान सहित कई राज्यों में मार्केटिंग कर रहे हैं। पिछले साल 6 लाख रुपए की कमाई उन्होंने की थी। इस साल और अधिक आमदनी की उम्मीद है। 👉🏻42 साल के ओम प्रकाश कहते हैं- मैं अक्सर यूट्यूब पर खेती को लेकर वीडियो देखता रहता था। एक दिन मुझे लेमन ग्रास की खेती के बारे में जानकारी मिली। वीडियो के जरिए मुझे पता चला कि इसकी खेती के लिए किसी खास जमीन की जरूरत नहीं होती है और लागत भी कम होती है। एक परिचित के जरिए मुझे पता चला कि पालमपुर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन बायोरिसोर्स टेक्नोलॉजी (IHBT) में इसकी ट्रेनिंग दी जाती है। इसके बाद साल 2018 में मैं IHBT गया। वहां एक दिन की ट्रेनिंग के बाद 10 हजार प्लांट लेकर अपने गांव चला आया। मुझे खेती करते देख गांव के किसान भी साथ आ गए:- 👉🏻वे बताते हैं कि गांव आने के बाद मैंने बंजर जमीन पर ही इसकी प्लांटिंग कर दी। कुछ ही महीने बाद जंगल हराभरा हो गया। यह देखकर मुझे काफी खुशी हुई और मैंने खेती का दायरा बढ़ा दिया। साल 2019 तक 2 लाख प्लांट मैंने अपने खेतों में लगा दिए। प्लांट तैयार हो जाने के बाद ओम प्रकाश ने IHBT पालमपुर की मदद से लेमन ग्रास से ऑयल निकालना सीख लिया। इसके बाद उन्होंने नीलकंठ इंडिया नाम से एक सोसाइटी बनाई और अपने गांव और आसपास के किसानों को भी इससे जोड़ा। फिलहाल 100 से ज्यादा किसान इनके साथ जुड़कर लेमन ग्रास की खेती कर रहे हैं। हालांकि शुरुआत में गांव के किसानों ने ओम प्रकाश की आलोचना भी की थी कि घास लगाने से कुछ हासिल नहीं होगा। 👉🏻लेमन ग्रास से ऑयल निकालते हुए ओम प्रकाश। उनके मुताबिक एक लीटर ऑयल 1000-1500 रुपए तक में बिक जाता है। 👉🏻लेमन ग्रास से ऑयल निकालते हुए ओम प्रकाश। उनके मुताबिक एक लीटर ऑयल 1000-1500 रुपए तक में बिक जाता है। 👉🏻ओम प्रकाश बताते हैं कि ऑयल निकालने के लिए एक मशीन की जरूरत थी। हमारे पास पैसे नहीं थे इसलिए IHBT पालमपुर की मदद से एक मशीन की व्यवस्था की। इसके बाद मैं ऑयल निकालकर इसकी मार्केटिंग करने लगा। जैसे-जैसे लोगों को मेरे बारे में पता चला, कुछ अखबारों में खबर छपी, लोग मेरे पास ऑयल खरीदने के लिए आने लगे। इस तरह धीरे-धीरे मेरा काम बढ़ने लगा। पिछले साल मैंने करीब 6 लाख रुपए की मार्केटिंग की है। इस साल और अधिक आमदनी की उम्मीद है। 👉🏻ओम प्रकाश कहते हैं कि फिलहाल लोग खुद मेरे पास आकर लेमन ग्रास के ऑयल ले जाते हैं। कई अस्पताल वाले, होटल वाले और बिजनेसमैन मेरे कस्टमर्स हैं। यहां इंटरनेट कनेक्टिविटी अच्छी नहीं है और मुझे सोशल मीडिया के बारे में ज्यादा जानकारी भी नहीं है। इसलिए फिलहाल ऑनलाइन मार्केटिंग नहीं कर पा रहा हूं, लेकिन जल्द ही इसको लेकर भी काम शुरू करना है। लेमन ग्रास की खेती कैसे करें? 👉🏻लेमन ग्रास की खेती बेहद आसान है। इसके लिए किसी खास तरह की जमीन की जरूरत नहीं होती है। यहां तक कि जंगलों और जमीन में भी इसकी खेती की जा सकती है। बरसात के सीजन में इसकी प्लाटिंग करना सबसे अच्छा माना जाता है। हालांकि आप साल भर इसकी प्लांटिंग कर सकते हैं। 👉🏻ओम प्रकाश घर से ही लेमन ग्रास से ऑयल निकालकर मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार जैसे राज्यों में मार्केटिंग करते हैं। कई बड़े बिजनेसमैन भी उनसे ऑयल खरीदते हैं। 👉🏻ओम प्रकाश घर से ही लेमन ग्रास से ऑयल निकालकर मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार जैसे राज्यों में मार्केटिंग करते हैं। कई बड़े बिजनेसमैन भी उनसे ऑयल खरीदते हैं। 👉🏻एक बार प्लांटिंग करने बाद इसे किसी तरह के सपोर्ट की जरूरत नहीं होती है। सिंचाई के लिए बारिश का पानी ही काफी होता है। प्लांटिंग करने के दो से तीन महीने बाद इसकी फसल तैयार हो जाती है। यानी इसकी कटिंग की जा सकती है। कॉमर्शियल यूज किया जा सकता है। 👉🏻इसके लिए किसी तरह की खाद की भी कोई खास जरूरत नहीं होती है। एक बार फसल लगने के बाद चार से पांच साल तक इसका लाभ लिया जा सकता है। खास बात यह है कि इसकी देखभाल की जरूरत न के बराबर होती है। जंगली पशु या गाय-भैंस इसे नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। लेमन ग्रास फार्मिंग की ट्रेनिंग कहां से लें, प्लांट कहां मिलेंगे? 👉🏻लेमन ग्रास फार्मिंग की ट्रेनिंग देश के कई राज्यों में दी जाती है। एक दिन से लेकर एक हफ्ते तक का कोर्स होता है। आप अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से इसकी जानकारी ले सकते हैं। सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिनल एरोमेटिक प्लांट, लखनऊ (CIMAP), पालमपुर, हिमाचल स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन बायोरिसोर्स टेक्नोलॉजी (IHBT) से इसकी ट्रेनिंग ली जा सकती है। इसके साथ ही कई किसान भी इसकी ट्रेनिंग देते हैं। 👉🏻जहां तक प्लांट की बात है। इसकी कीमत बेहद कम होती है। एक रुपए प्रति प्लांट की दर से भी कम कीमत में यह मिल जाता है। कृषि विज्ञान केंद्र की तरफ से तो यह मुफ्त में ही किसानों को मिल जाता है। अभी सरकार इसको लेकर किसानों को प्रोत्साहित भी कर रही है। कई सरकारी संस्थान किसानों को मुफ्त में प्लांट उपलब्ध कराते हैं। देहरादून स्थित सेंटर फॉर एरोमेटिक प्लांट (CAP) उनमें से एक है। यहां ट्रेनिंग के साथ ही प्लांट भी किसानों को मिलता है। लेमन ग्रास की डिमांड क्यों है? 👉🏻लेमन ग्रास कॉमर्शियल प्लांट के साथ ही मेडिसिनल प्लांट भी है। इसकी पत्तियों और इसके ऑयल का इस्तेमाल दवाइयों के निर्माण में किया जाता है। यह एंटीऑक्सीडेंट, एंटी इन्फ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक होता है। यह सिर दर्द, अनिद्रा और डिप्रेशन को कम करता है। यह इम्यूनिटी बूस्टर का भी काम करता है। इसलिए मेडिकल फील्ड में इसकी खूब डिमांड है। 👉🏻इसके ऑयल से साबुन, शैम्पू, क्रीम और कई तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट बनाए जाते हैं। कई बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियां किसानों से सीधे फसल या ऑयल खरीद लेती हैं। 👉🏻आजकल लेमन ग्रास की पत्तियों से चाय भी बनाई जा रही है। कोरोना के बाद इसकी मांग बढ़ गई है। 👉🏻चूंकि यह खट्टा होता है इसलिए नींबू की जगह खाना बनाने में भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। लेमन ग्रास से ऑयल कैसे तैयार किया जाता है? 👉🏻लेमन ग्रास से ऑयल तैयार करने के लिए एक बॉयलर की जरूरत होती है। सबसे पहले लेमन ग्रास की पत्तियों को बॉयलर में अच्छी तरह से भर दिया जाता है। फिर उसे टाइट बंद किया जाता है। उसके बाद उसे स्टीम किया जाता है। स्टीम करने के बाद एक सेपरेटर के जरिए ऑयल निकलता है। इसे ठंडा करने के बाद क्वालिटी टेस्टिंग की जाती है। अब यह ऑयल इस्तेमाल के लिए तैयार है। स्रोत:- Jagran, 👉🏻प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक 👍 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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