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100 रुपये के प्रीमियम पर किसानों को मिला 475 रुपये का क्लेम!
👉🏻बेमौसम बारिश, आंधी-तूफान, अतिवृष्टि और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसलों के नुकसान पर किसानों का रिस्क फैक्टर कम करने के लिए शुरू प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत की गई है! 👉🏻इस योजना की शुरुआत 13 जनवरी 2016 को हुई थी. तोमर का कहना है कि इस योजना में किसानों को बहुत कम प्रीमियम यानी अंशदान देना पड़ता है. अब तक किसानों ने अपने प्रीमियम शेयर के रूप में 21,450 करोड़ रुपये का भुगतान किया है. इसके बदले में उन्हें 101875 करोड़ रुपये से अधिक के दावों का भुगतान किया गया है! कितना लगता है प्रीमियम - 👉🏻जहां तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का संबंध है, इसमें किसानों को केवल खरीफ खाद्य और तिलहन फसलों के लिए बीमित रकम का अधिकतम 2 फीसदी और रबी खाद्य और तिलहन फसलों के लिए सिर्फ 1.5 परसेंट ही भुगतान करना होता है. जबकि वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए कुल प्रीमियम का अधिकतम 5 फीसदी ही भुगतान करना होता है! 👉🏻शेष प्रीमियम पूर्वोत्तर राज्य को छोड़कर, केंद्र और राज्य सरकार द्वारा बराबर-बराबर साझा किया जाता है. केंद्र सरकार और पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्यों के बीच प्रीमियम सब्सिडी का शेयर खरीफ 2020 मौसम में (50:50 से ) से 90:10 में परिवर्तित कर दिया गया है. यानी राज्य सरकार को सिर्फ 10 फीसदी देना होता है. शेष 90 फीसदी केंद्र सरकार देती है. हरियाणा सरकार ने छोटे किसानों के हिस्से का भी प्रीमियम खुद ही भरने का फैसला लिया है. मझोले किसानों से उनके हिस्से का आधा प्रीमियम ही लिया जाएगा! कब है बीमा योजना में शामिल होने की अंतिम तारीख? 👉🏻रबी सीजन की फसलों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 31 दिसंबर 2021 से पहले शामिल हुआ जा सकता है. योजना स्वैच्छिक कर दी गई है. यानी अब बीमा कंपनियां किसान क्रेडिट कार्ड धारक किसानों के पैसे में से जबरन बीमा का प्रीमियम नहीं काट पाएंगी. इसलिए अगर आपके पास केसीसी है और आप फसल बीमा नहीं चाहते हैं तो जल्द से जल्द बैंक को यह बात लिखकर दे दें! स्त्रोत:- TV9 👉🏻किसान भाइयों ये जानकारी आपको कैसी लगी? हमें कमेंट करके ज़रूर बताएं और लाइक एवं शेयर करें धन्यवाद!
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