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कृषि वार्ताकृषि जागरण
10 हजार एफपीओ के गठन से मिलेगा अपनी उपज और कृषि उपकरणों का उचित बाजार!
👉🏻 केंद्र सरकार द्वारा छोटे और सीमांत किसानों के सशक्तिकरण के उद्देश्य से 'किसान उत्पादक संगठन गठन व संवर्धन' योजना की शुरुआत की गई थी। इसको लेकर सोमवार को इसके 1 वर्ष पूर्ण होने पर कृषि मंत्रालय में केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी और परषोतम रुपाला की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। 👉🏻 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने 2023-24 तक देशभर में 10,000 नए कृषि उत्पादक संगठन स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। सरकार किसानों की आय दुगुनी करने के अपने लक्ष्य को लेकर प्रयासरत व संकल्पित है। बैठक में कृषि मंत्रालय के अधिकारीगण उपस्थित रहे। 👉🏻 बैठक के बाद कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार 2021-22 में 2,500 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की स्थापना करेगी। इस पर 700 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे 60 हजार किसानों को मदद मिलेगी। एफपीओ के रूप में छोटे और सीमांत किसानों के समूह के पास फसलों की बिक्री के लिए मोलभाव की ताकत मिलेगी। कैलाश चौधरी ने कहा कि 2500 एफपीओ बनाने का काम केन्द्र की उस योजना का हिस्सा है, जिसके तहत सरकार ने पांच साल में 6,865 करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ 10,000 एफपीओ बनाने का लक्ष्य रखा है। चौधरी ने बताया कि एफपीओ नए कृषि कानूनों के सफल कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी। किसान चाहे व्यापारियों या कंपनियों को सीधे उपज बेच रहा हो या अनुबंध खेती के जरिए खेती कर रहा है, उसे एफपीओ से बड़ी मदद मिलेगी। 👉🏻 केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि एफपीओ एक ऐसी व्यवस्था है जो किसानों से फल, सब्जी, फूल, मछली व बागवानी से संबंधित फसलों को खरीदकर सीधे कंपनियों को बेचा जाता है। इसमें किसान जुड़े होते हैं और उन्हें अधिक आय प्राप्त होती है। इन एफपीओ से अब तक देश के लाखों किसान जुडकऱ लाभ प्राप्त कर रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा एफपीओ का ग्रेडेशन करने का कार्य भी शुरू कर दिया गया है। कैलाश चौधरी ने कहा कि एफपीओ लघु व सीमांत किसानों का एक समूह होगा। जिससे उससे जुड़े किसानों को न सिर्फ अपनी उपज का बाजार मिलेगा बल्कि खाद, बीज, दवाइयों और कृषि उपकरण आदि खरीदना आसान होगा। सेवाएं सस्ती मिलेंगी और बिचौलियों के मकड़जाल से मुक्ति मिलेगी। अगर अकेला किसान अपनी पैदावार बेचने जाता है, तो उसका मुनाफा बिचौलियों को मिलता है। एफपीओ सिस्टम में किसान को उसके उत्पाद के भाव अच्छे मिलते हैं, क्योंकि बारगेनिंग कलेक्टिव होगी। एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक लाख करोड़ रुपये का प्रावधान: 👉🏻 कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के लिए एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत वित्तीय सुविधाओं का प्रावधान किया है। इस फंड के तहत देश में कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाए जाने के लिए कदम उठाए जा रहे है। इस एक लाख करोड़ रुपए के एग्री इंफ्रा फंड का इस्तेमाल गांवों में कृषि क्षेत्र से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में किया जाएगा। इस फंड से कोल्ड स्टोर, वेयरहाउस, साइलो, ग्रेडिंग और पैकेजिंग यूनिट्स लगाने के लिए लोन दिया जाएगा। इस फंड के तहत 10 साल तक वित्तीय सुविधा मुहैया कराई जाएगी। 👉🏻 इस फंड से खेती से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम किया जाएगा। इस फंड को जारी करने का उद्देश्य गांवों में निजी निवेश और नौकरियों को बढ़ावा देना है। इसी तरह पीएम किसान योजना के तहत किसानों को एक साल में 6000 रुपए की राशि 3 किस्तों में दी जाती है। स्रोत:- Krishi Jagran, 👉🏻 प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक👍करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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