आलू भण्डारण के ये तरीके हैं सबसे बेस्ट!
सलाहकार लेखVikaspedia
आलू भण्डारण के ये तरीके हैं सबसे बेस्ट!
👉🏻आलू उत्पादन से एक विकट समस्या भी चुनौती बनकर सामने आई है और वह है फसलोत्तर संभाल अथवा आलू भंडारण की। हमें यह ज्ञात है कि आलू में लगभग 80 प्रतिशत जल होता है और ऐसी फसल को भंडारित कर रखना किसी चुनौती से कम नहीं है। संस्थान द्वारा ऐसी कई तकनीकियों का विकास किया गया है, जिनसे आलू का प्रभावी तौर पर भंडारण किया जा सके। 👉🏻देश के अधिकतर भागों में (85 प्रतिशत मैदानी इलाके) आलू की खुदाई फरवरी-मार्च में होती है, जिसके बाद ग्रीष्म ऋतु आ जाती है। ऐसी परिस्थिति में आलू में अत्यधिक ह्रास होने की आशंका रहती है। अतः आलू की फसल को सामान्यतः शीत भंडारों में सुरक्षित रखा जाता है। भंडारण की समस्या व इसके निदान को विभिन्न उपयोगों के अनुसार देखा और समझा जा सकता है। देसी भंडारण विधि:- 👉🏻किसान लंबे अरसे से देसी विधियों द्वारा आलू का भंडारण करते रहे हैं। इसमें एक समस्या यह रही है कि आलू में होने वाला ह्रास 10-40 प्रतिशत तक बढ़ जाता है, जो लाभ किसानों को अपेक्षित होता है वह लगभग नगण्य हो जाता है। संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा इन देसी विधियों में कुछ बदलाव लाए गए ताकि इससे आलू में होने वाले ह्रास को 10 प्रतिशत व उससे कम स्तर पर लाया जा सका। इन सुधारों में छप्पर लगाना, आलू को ढेर व गड्ढों में पुआल से ढककर रखना, उनमें छिद्रयुक्त पीवीसी पाइप लगाना, उनको किसीअंकुरणरोधी रसायन जैसे क्लोरप्रोफाम से उपचारित करना इत्यादि शामिल हैं। इन सुधारों को अपनाते हुए कृषक बंधु आलू का 3-4 माह तक कुशलतापूर्वक भंडारण कर सकते हैं। इस प्रकार आलू के दाम मंडी में जब अधिक हों तो उन्हें वहां बेचकर अधिक लाभ की प्राप्ति कर सकते हैं। बीज के लिए आलू भंडारण:- मैदानी क्षेत्र:- 👉🏻आलू बीज को एक फसल से दुसरी फसल तक बचा कर रखना अति आवश्यक होता है। यह अंतराल लगभग 7-8 माह का होता है। शीत भंडारों में बीज को भंडारित करना सबसे सुविधाजनक माना जाता है। ये शीत भंडार 20-4° सेल्सियस तापमान व 80 प्रतिशत सापेक्षिक आर्द्रता पर कार्य करते हैं। इसका फायदा यह है कि शीत भंडारित आल में अंकुरण का जमाव लगभग न के बराबर होता है व इनमें भार का ह्रास भी न्यूनतम होता है। अतः भंडारित आलू ठोस दिखते हैं व जब बीज के लिए इनका उपयोग किया जाता है तो इनकी दैहिक अवस्था भी अनुकूल होती है। देश में कुल पैदावार का लगभग 70-80 प्रतिशत आलू शीत भंडारों में सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके लिए किसानों को अतिरिक्त खर्च भी करना पड़ता है, जो किन्हीं परिस्थितियों में मुश्किल भी होता है। खाने व प्रसंस्करण योग्य आलू का भंडारण:- 👉🏻वैसे तो अधिकांश क्षेत्रों में खाने व प्रसंस्करण योग्य आलू को बीज आलू की भांति ही शीत भंडारों में 20-4° सेल्सियस तापमान पर भंडारित किया जाता रहा है, पर इससे एक बड़ी समस्या उत्पन्न हुई है। शीत भंडारों में इतने कम तापमान पर रखने से आलू । में अवकारक शर्करा का अत्यधिक जमाव । हो जाता है। इससे आलू स्वाद में मीठे लगते हैं व अधिकतर उपभोक्ताओं द्वारा इन्हें पसंद नहीं किया जाता है। इसी प्रकार प्रसंस्करण । योग्य आलू में यदि शर्करा का अधिक जमाव हो जाता है तो उनसे बनने वाले उत्पाद भूरे अथवा काले रंग के हो जाते हैं। इसके लिए संस्थान ने दो प्रकार की तकनीकियों का विकास किया है, जो निम्न हैं: शीत भंडार की आधुनिक विधि:- 👉🏻संस्थान ने एक नई तकनीकी का विकास किया है, जिसमें आलू को बढ़े हुए तापमान (अर्थात 10°-12° सेल्सियस) पर भंडारित किया जा सकता है। परीक्षणों से यह ज्ञात हुआ है कि इस बढ़े हुए तापमान पर अवकारक शर्करा का जमाव न्यूनतम होता है। इस तापमान पर अंकुरण होना जल्द ही आरंभ हो जाता है। आलू को किसी अंकुररोधी रसायन जैसे क्लोरप्रोफाम अथवा सीआईपीसी द्वारा उपचारित करना पड़ता है। यह तकनीकी हमारे देश में लगभग 15 वर्षों से ही प्रचलित हुई है। इसका तेजी से विस्तार हो रहा है व वर्तमान में कुल शीत भंडारों (लगभग 7000) में से 1000 शीत भंडार इस तकनीकी द्वारा आलू को भंडारित कर रहे हैं। शीत भंडारों में जब आलू 100-12° सेल्सियस तापमान पर भंडारित किया जाता है तो उन्हें 6 माह के समय में दो बार रसायन द्वारा उपचारित करना पड़ता है। यह रसायन एक मशीन द्वारा धुंध (फॉग) के रूप में डाला जाता है। परीक्षणों द्वारा ऐसे आलू की विद्यायन गुणवत्ता भी मापी गई है, जो कुछ महीनों तक अनुकूल पाई गई है। इस तकनीकी द्वारा अब बाजार में खाने योग्य कम मीठे आलू भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उपभोक्ता इसके लिए अधिक दाम देने से भी नहीं हिचकिचाते हैं। अच्छी किस्मों को 5-6 माह तक इसी विधि द्वारा भंडारित करके प्रसंस्करण उद्योग इन आलू को ही विभिन्न उत्पाद बनाने के लिए उपयोग में लाते हैं। स्रोत:- Vikaspedia, 👉🏻किसान भाइयों ये जानकारी आपको कैसी लगी? हमें कमेंट करके ज़रूर बताएं और लाइक एवं शेयर करें धन्यवाद!
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