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 उगाये काली  हल्दी सरकार देगी 50 %का अनुदान !
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उगाये काली हल्दी सरकार देगी 50 %का अनुदान !
नमस्कार किसान भाईयों आज मै आप लोगों को बताने वाला हूँ सरकार की ओर से किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। कई राज्य सरकारें किसानों को परंपरागत खेती के साथ ही औषधीय फसलों की खेती को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए किसानों को सब्सिडी का लाभ भी प्रदान किया जाता है। औषधीय फसलों की खेती पर सरकार की ओर से 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। 👉काली हल्दी के कैसी भूमि और जलवायु होनी चाहिए:- काली हल्दी की खेती के लिए जलवायु उष्ण अच्छी रहती है। इसके लिए 15 से 40 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान उचित माना गया है। इसकी खेती के लिए भूमि का पी.एच. 5 से 7 के बीच होना चाहिए। 👉काली हल्दी के लिए बुवाई का उचित समय:- काली हल्दी की खेती के लिए इसकी बुआई का उचित समय वर्षा ऋतु माना जाता है। इसकी बुवाई का उचित समय जून-जुलाई है। हालांकि सिंचाई का साधन होने पर इसे मई माह में भी बोया जा सकता है। 👉काली हल्दी की बुवाई कितनी लें बीज की मात्रा:- काली हल्दी की खेती के लिए करीब 20 क्विंटल कंद मात्रा प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है। इसके कंदों को रोपाई से पहले बाविस्टिन की उचित मात्रा से उपचारित कर लेना चाहिए। बाविस्टिन के 2 प्रतिशत घोल में कंद 15 से 20 मिनट तक डुबोकर रखना चाहिए क्योंकि इसकी खेती में बीज पर ही अधिक व्यय होता है। 👉काली हल्दी की बुवाई/रोपाई का तरीका:- काली हल्दी के कन्दों की रोपाई कतारों में की जाती है। प्रत्येक कतार की बीच डेढ़ से दो फीट की दूरी होनी चाहिए। कतारों में लगाए जाने वाले कन्दों के बीच की दूरी करीब 20 से 25 से.मी. होनी चाहिए। कन्दों की रोपाई जमीन में 7 से.मी. गहराई में करना चाहिए। पौध के रूप में इसकी रोपाई मेढ़ के बीच एक से सवा फीट की दूरी होनी चाहिए। मेढ़ पर पौधों के बीच की दूरी 25 से 30 से.मी. होनी चाहिए। प्रत्येक मेढ़ की चौड़ाई आधा फीट के आसपास रखनी चाहिए। 👉काली हल्दी की पौध तैयार करने का तरीका:- काली हल्दी की रोपाई इसकी पौध तैयार करके भी की जा सकती है। इसके पौध तैयार करने के लिए इसके कन्दों की रोपाई ट्रे या पॉलीथिन में मिट्टी भरकर की जाती है। इसके कन्दों की रोपाई से पहले बाविस्टिन की उचित मात्रा से उपचारित कर लेना चाहिए। खेत में रोपाई बारिश के मौसम के शुरुआत में की जाती है। 👉काली हल्दी की खेती में सिंचाई कार्य:- सिंचाई काली जल्दी के पौधों को ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है। इसके कन्दों की रोपाई नमी युक्त भूमि में की जाती है। इसके कंद या पौध रोपाई के तुरंत बाद उनकी सिंचाई कर देनी चाहिए। हल्के गर्म मौसम में इसके पौधों को 10 से 12 दिन के अंतराल में पानी देना चाहिए। जबकि सर्दी के मौसम में 15 से 20 दिन के अंतर पर सिंचाई करना चाहिए। 👉काली हल्दी की खेती में खाद उर्वरक की कितनी मात्रा दें:- खेत की तैयारी के समय आवश्यकतानुसार पुरानी गोबर की खाद मिट्टी में मिलाकर पौधों को देना चाहिए। प्रति एकड़ 10 से 12 टन सड़ी हुई गोबर खाद मिलाना चाहिए। घर पर तैयार किए गये जीवामृत को पौधों की सिंचाई के साथ देना चाहिए। 👉ऐसे करें खरपतवार नियंत्रण:- पौधों की रोपाई के 25 से 30 दिन बाद हल्की निंदाई गुडाई करनी चाहिए। खरपतवार नियंत्रण के लिए 3 गुड़ाई काफी है। प्रत्येक गुड़ाई 20 दिन के अंतराल पर करनी चाहिए। रोपाई के 50 दिन बाद गुडाई बंद कर देना चाहिए नहीं तो कन्दों को नुकसान पहुंचता है। 👉जड़ों में मिट्टी चढ़ाना:- रोपाई के 2 माह बाद पौधों की जड़ों में मिट्टी चढ़ा देना चाहिए। पौधों की जड़ों में मिट्टी चढ़ाने का काम हर एक से 2 माह बाद करना चाहिए। 👉फसल की कटाई:- काली हल्दी की फसल रोपाई से ढाई सौ दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाती है। कन्दों की खुदाई जनवरी-मार्च तक की जाती है। 👉पैदावार और लाभ:- यदि सही तरीके से इसकी खेती की जाए एक एकड़ में काली हल्दी की खेती से कच्ची हल्दी करीब 50-60 क्विंटल यानी सूखी हल्दी का करीब 12-15 क्विंटल तक का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। काली हल्दी बाजार में 500 रुपए के करीब आसानी से बिक जाती है। ऐसे भी किसान हैं, जिन्होंने काली हल्दी को 4000 रुपए किलो तक बेचा है। इंडियामार्ट जैसी ऑनलाइन वेबसाइट पर आपको काली हल्दी 500 रुपए से 5000 रुपए तक में बिकती हुई मिल जाएगी। यदि आपकी काली हल्दी सिर्फ 500 रुपए के हिसाब से भी बाजार में बिक जाती है तो 15 क्विंटल में आपको 7.5 लाख रुपए का मुनाफा हो जाएगा। यदि इसमें लगने वाली लागत जैसे- बीज, जुताई, सिंचाई, खुदाई में यदि आपका 2.5 लाख रुपए तक का खर्चा भी हो जाता है तो भी आपको 5 लाख रुपए का मुनाफा हो जाएगा। स्रोत:-Agrostar 👉किसान भाइयों ये जानकारी आपको कैसी लगी? हमें कमेंट करके ज़रूर बताएं और लाइक एवं शेयर करें धन्यवाद!
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