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सेम की खेती करने का उन्नत तरीका, प्रति हेक्टेयर मिलेगा 100-150 क्विटंल उत्पादन!
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सेम की खेती करने का उन्नत तरीका, प्रति हेक्टेयर मिलेगा 100-150 क्विटंल उत्पादन!
👉भारत में कई सब्ज़ियों की खेती होती है, जिसमें सेम की खेती का एक अलग स्थान है. वैसे मौजूदा समय में सेम की खेती विभिन्न राज्यों जैसे- उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र व तमिलनाडु में बड़े स्तर पर हो रही है. मगर आज भी कई किसान भाई ऐसे हैं, जिन्हें सेम की खेती की अधिक जानकारी नहीं है. ऐसे में आज हम किसान भाईयों के लिए सेम की खेती से जुड़ी अधिक जानकारी के लेकर आए हैं! सेम की फलियों का उपयोग - 👉आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आज के समय में लोग सेम की फलियों की सब्ज़ी बनाकर बहुत चाव से खाते हैं. इसके साथ ही साथ ही हरी फलियों से अचार भी बनाया जाता है. इसके अलावा पशु चारे के लिए प्रयोग होती है! सेम की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु - 👉इसकी खेती ठंडी जलवायु में सफलतापूर्वक की जा सकती है, लेकिन ध्यान रहे कि पाला अधिक न पड़ता हो. इसके पौधों को पाले से बहुत नुक़सान होता है! सेम की खेती के लिए उपयुक्त भूमि - 👉इस फ़सल के लिए दोमट, चिकनी व रेतीली मिट्टी उपयुक्त मानी गई है. मगर ध्यान रहे कि भूमि उचित जल निकास वाली होनी चाहिए, साथ ही भूमि क्षारीय व अम्लीय वाली नहीं होनी चाहिए. इसका पीएच मान 5.3 – 6.0 हो! सेम की उन्नत किस्में - 👉सेम की फलियां लंबी, चपटी, टेड़ी, हरे और पीले रंग की होती हैं. किसान भाई सेम की अच्छी उपज के लिए पूसा अर्ली, काशी हरितमा, काशी खुशहाल (वी.आर.सेम- 3), बी.आर.सेम-11, पूसा सेम- 2, पूसा सेम- 3, जवाहर सेम- 53, जवाहर सेम- 79, कल्याणपुर-टाइप, रजनी, एचडी- 1, एचडी- 18 और प्रोलिफिक आदि किस्मों की बुवाई कर सकते हैं! सेम की बुवाई का समय- 👉इस फसल के लिए बुवाई जुलाई से अगस्त का समय उपयुक्त माना गया है. ध्यान रहे कि बुवाई सममतल खेत में उठी हुई मेड़ों/क्यारियों में करें. इस तरह फसल का उत्पादन अच्छा और अधिक मिलता है! सेम के लिए खेत की तैयारी- 👉अगर खेत में नमी की कमी है, तो बुवाई से पहले पलेवा कर लेना चाहिए! खेत को बुवाई से पहले अच्छी तरह जोत कर पाटा लगा लेना चाहिए! ध्यान रहे कि बुवाई के समय बीज अंकुरण के लिए पर्याप्त नमी हो! सेम के बीज की मात्रा 👉इसकी खेती में एक हेक्टेयर क्षेत्रफल के लिए लगभग 20 से 30 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है. सेम की बुवाई का तरीका- 👉खेत की तैयारी करने के बाद लगभग 5 मीटर की चौड़ी क्यारियां बनाएं! क्यारियों के दोनों किनारों पर लगभग 5 – 2.0 फ़ीट की दूरी पर बीजों की बुवाई करें. इनकी गहराई 2 से 3 सेंटीमीटर की होनी चाहिए! बीजों को रोग से बचाने के लिए कवकनाशी से उपचारित अवश्य करें! सेम की खेती में रोग व कीट रोकथाम- 👉जानकारी के लिए बता दें कि सेम की फसल में फफूंद रोग ज्यादा लगता है, इसलिए किसानों को रोग प्रतिरोधी किस्म का चुनाव करना चाहिए. इसके अलावा, बीज को उपचारित कर बुवाई करना चाहिए.इतना ही नहीं, सेम की फसल को में चैपा और बीन बीटल जैसे कीट बहुत नुकसान पहुंचाते हैं. इनकी रोकथाम के लिए क्लोरपायरीफॉस 20 ईसी 3 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़क दें. ध्यान रहे कि इसका छिड़काव 10 से 15 दिन के अंतराल पर करना है! सेम की फ़सल की तुड़ाई- 👉फसल की तुड़ाई क़िस्म व बुवाई पर निर्भर होती है. वैसे जब सेम की फलियां पूरी तरह विकसित हो जाएं, साथ ही कोमल अवस्था में आ जाएं, तब फसल की तुड़ाई करना चाहिए. अगर तुड़ाई में देर होती है, तो फलियां कठोर हो जाती है और इन पर रेशे आ जाते हैं. इस वजह से बाज़ार में सेम की फसल का उचित दाम नहीं मिल पाता है! सेम का उत्पादन - 👉अगर फ़सल की उत्पादकता जलवायु, मिट्टी, क़िस्म, सिंचाई समेत सुरक्षा प्रबंधन आदि पर निर्भर करती है. वैसे किसान भाई सेम की फ़सल से प्रति हेक्टेयर 100 से 150 क्विटंल उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं! स्त्रोत:- Agrostar 👉 प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक 👍 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद! .
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