कृषि वार्ताTV9 Hindi
सावधान: सब्सिडी की गड़बड़ी पर हुई 3.72 लाख रुपये की रिकवरी!
👉खेती से जुड़ी सरकारी योजनाएं (Farmers Schemes) आम किसानों के कल्याण के लिए हैं, लेकिन कुछ प्रभावशाली लोग अधिकारियों से सेटिंग करके इसका नाजायज फायदा उठाते हैं. खासतौर पर सब्सिडी का पैसा खाने का ट्रेंड चल रहा है. ऐसे किसानों को अब सावधान होने का वक्त है. क्योंकि शिकायत हुई तो न सिर्फ उस पैसे की रिकवरी होगी बल्कि सरकारी दंड भी मिलेगा. सब्सिडी के ऐसे ही एक मामले में हरियाणा सरकार ने अंबाला के एक किसान पर सख्त कार्रवाई की है. किसान से सरकार ने न सिर्फ 3.72 लाख रुपये की वसूली (Recovery) कर ली है बल्कि अगले पांच साल के लिए बागवानी योजनाओं का लाभ लेने से वंचित भी कर दिया है। 👉मुख्यमंत्री मनोहरलाल के ओएसडी भूपेश्वर दयाल ने बताया कि सीएम विंडो पर अंबाला जिले की बराड़ा तहसील के गंगनपुर गांव निवासी रामचंद्र ने एक शिकायत दी. जिसमें बताया गया था कि उसके गांव के कल्याण सिंह ने 2-3 साल पहले अपने खेत में चार पॉलीहाउस (Polyhouse) बनाए थे. अब उसने 2-3 महीने पहले इन पॉलीहाउस को तोड़कर कबाड़ी को बेच दिया है. यह सरकार के साथ धोखाधड़ी है। कबाड़ियों को बेच दिया पॉलीहाउस का ढांचा:- 👉शिकायत की जांच में पाया गया कि कल्याण सिंह को 4 पॉलीहाउस के लिए वर्ष 2016-17 में 93,015 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से सब्सिडी (Subsidy) का लाभ दिया गया. कल्याण सिंह ने 3 वर्ष बाद ही इसके ढांचे को तोड़कर कबाड़ियों को बेच दिया था. सीएम विंडो (CM Window) के सख्त रवैये की वजह से विभाग द्वारा कार्रवाई की गई और उससे प्रति हाऊस 93,015 रुपये की दर से 3,72,060 रुपये की रिकवरी करने के आदेश दिए गए। पॉलीहाउस हटाने का क्या है नियम:- 👉अगर आपने भी सरकार से मदद लेकर पॉलीहाउस का निर्माण करवाया है तो इसका नियम जान लीजिए. नियमानुसार लाभपात्र को पॉलीहाउस के ढांचे को 10 वर्ष की अवधि के लिए सुरक्षित रखना होता है. यानी उसे इससे पहले हटाना गैर कानूनी है। 👉किसान कल्याण सिंह को शिकायत के तहत उद्यान विभाग की सभी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के अनुदान से आगामी 5 वर्षो के लिए वंचित किया गया है. भूपेश्वर दयाल ने किसानों से अपील की है कि वो गलत तरीके से सब्सिडी का लाभ न न लें. पॉलीहाउस किसानों की आय बढ़ाने का तरीका है. इसका सदुपयोग करें। अनुदान न मिलने की शिकायत पर क्या हुआ? 👉फतेहाबाद के एक किसान ने शिकायत की थी कि उसे वर्ष 2020-21 की मेरा पानी मेरी विरासत स्कीम के तहत अनुदान राशि नहीं मिली. इस पर सीएम विंडो ने कृषि उप-निदेशक जांच करवाई. पता चला कि शिकायतकर्ता किसान ने इस स्कीम के तहत कपास की बिजाई करने के बाद अपना रजिस्ट्रेशन करवाया था। 👉लेकिन जब पटवारी व खंड तकनीकी प्रबंधक ने खेत का निरीक्षण किया तो उस समय किसान ने उक्त खेत में कपास की जगह धान की रोपाई की हुई थी. इस कारण वो किसान योजना का पात्र नहीं है। स्रोत:- TV 9 Hindi, 👉 प्रिय किसान भाइयों दी गई उपयोगी जानकारी को लाइक 👍 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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