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सहजन की खेती: कम खर्च में मोटी कमाई!
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सहजन की खेती: कम खर्च में मोटी कमाई!
👉सहजन एवं मीठी नीम (करी पत्ता ) के महत्व को उत्तर भारत की तुलना में दक्षिण भारत के लोगों को बेहतर तरीके से समझा है. उन्हें पहले से मालूम है.लेकिन अब इसका महत्व सभी को पता है. जब पौष्टिक सब्जियों (Nutritious Vegetables) की चर्चा होती है तो सबसे पहले जो नाम आता है, वह सहजन है. पृथ्वी पर पाए जाने वाले किसी भी पौधे में सहजन के बराबर औषधीय एवं पौष्टिक गुण नहीं पाए जाते है. सहजन बिहार में सालो भर उगायेजाने वाला बहुवर्षीय सब्जी (perennial vegetable) है. सहजन के लिए किसी विशेष देखभाल की आवश्यकता नही होती हैं. बिहार सरकार इसकी खेती में आने लागत पर 50 फीसदी की सब्सिडी दे रही है। 👉एस के सिंह के मुताबिक सामान्यतः सहजन में फल सालभर में एक बार आता है, जिसके फल का उपयोग वे साल में एक बार जाड़े के दिनों में सब्जी के रूप में करते हैं.सहजन की कुछ प्रजातियों some varieties में फल साल में दो बार आता है. दक्षिण भारत में सहजन के फूल, फल, पत्ती का उपयोग अपने विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में सालों भर किया जाता हैं.हाल के दिनों में सहजन का साल में दो बार फलने वाला वार्षिक प्रभेद तैयार किया गया है, जो न सिर्फ उत्पादन ज्यादा देता है बल्कि यह प्रोटीन, लवण, लोहा, विटामिन-बी, और विटामिन-सी. से भरपूर है. बिहार के किसानों और खासकर अपनी भू-भागीय पसंद के कारण सहजन दियारा क्षेत्र के किसानों के लिए उनकी फसल प्रणाली का एक आर्थिक महत्व का उपयुक्त फसल हो सकता है। सभी तरह की जमीनों पर उगा सकते हैं:- 👉सहजन सामान्यतया 25-30 डिग्री सेल्सियस के औसत तापमान पर सहजन के पौधा का हरा-भरा व काफी फैलने वाला विकास होता है. यह ठंढ को भी सहता है. परन्तु पाला से पौधा को नुकसान होता है. फूल आते समय यदि तापक्रम 40 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होने पर फूल झड़ने लगता है। 👉कम या ज्यादा वर्षा से पौधे को कोई नुकसान नहीं होता है. यह विभिन्न पारिस्थितिक अवस्थाओं में उगने वाला पौधा है. इसकी खेती सभी प्रकार की मिट्टियों में सहजन की खेती की जा सकती है. यहाँ तक कि बेकार, बंजर और कम उर्वरा भूमि में भी इसकी खेती की जा सकती है, परन्तु व्यवसायिक खेती के लिए साल में दो बार फलनेवाला सहजन के प्रभेदों के लिए 6-7.5 पी.एच. मान वाली बलुई दोमट मिट्टी बेहतर पाया गया है। सहजन की वैरायटी:- 👉सहजन की वर्ष में दो बार फलने वाले प्रभेदों में पी.के.एम.1, पी.के.एम.2, कोयेंबटूर 1 तथा कोयेंबटूर 2 प्रमुख हैं. इसका पौधा 4-6 मीटर उंचा होता है तथा 90-100 दिनों में इसमें फूल आता है. जरूरत के अनुसार विभिन्न अवस्थाओं में फल की तुड़ाई करते रहते हैं. पौधे लगाने के लगभग 160-170 दिनों में फल तैयार हो जाता है. साल में एक पौधा से 65-70 सें.मी. लम्बा तथा औसतन 6.3 सेंमी. मोटा, 200-400 फल (40-50 किलोग्राम) मिलता है. यह काफी गूदेदार होता है तथा पकने के बाद इसका 70 प्रतिशत भाग खाने योग्य होता है. एक बार लगाने के बाद से 4-5 वर्षो तक इससे फलन लिया जा सकता है. यहां यह बता देना आवश्यक है की आजकल सहजन की खेती दुधारू जानवरों को चारा के लिए किया जा रहा है,इससे जनवरी का स्वास्थ्य एवं दूध भी बढ़ रहा है। कैसे करें खेती:- 👉प्रत्येक वर्ष फसल लेने के बाद पौधे को जमीन से एक मीटर छोड़कर काटना आवश्यक है. कटे हिस्से को भी लगाया जा सकता है. सहजन के पौध की रोपनी गड्ढा बनाकर किया जाता है. खेत को अच्छी तरह खरपतवार मुक्त करने के बाद 2.5 x 2.5 मीटर की दूरी पर 45 x 45 x 45 सेंमी. आकार का गड्ढा बनाते हैं. गड्ढे के उपरी मिट्टी के साथ 10 किलोग्राम सड़ा हुआ गोबर का खाद मिलाकर गड्ढे को भर देते हैं. इससे खेत पौध के रोपनी हेतु तैयार हो जाता है. सहजन में बीज और शाखा के टुकड़ों दोनों प्रकार से ही प्रबर्द्धन होता है. अच्छी फलन और साल में दो बार फलन के लिए seed propagation करना अच्छा है. एक हेक्टेयर में खेती करने के लिए 500 से 700 ग्राम बीज पर्याप्त होता है. बीज को सीधे तैयार गड्ढों में या फिर पॉलीथीन बैग में तैयार कर गड्ढों में लगाया जा सकता है. पॉलीथीन बैग में पौध एक महीना में लगाने योग्य तैयार हो जाता है. एक महीने के तैयार पौध को पहले से तैयार किए गये गड्ढों में जून से लेकर सितम्बर तक रोपनी किया जा सकता है। 👉साल में दो बार फल देने वाले सहजन की किस्मों की तुड़ाई सामान्यतया फरवरी-मार्च और सितम्बर-अक्टूबर में होती है. प्रत्येक पौधे से लगभग 200-400 (40-50 किलोग्राम) सहजन सालभर में प्राप्त हो जाता है. सहजन की तुड़ाई बाजार और मात्रा के अनुसार 1-2 माह तक चलता है. सहजन के फल में रेशा आने से पहले ही तुड़ाई करने से बाजार में मांग बनी रहती है और इससे लाभ भी ज्यादा मिलता है। स्रोत:- TV 9 Hindi, 👉🏻किसान भाइयों ये जानकारी आपको कैसी लगी? हमें कमेंट करके ज़रूर बताएं और लाइक एवं शेयर करें धन्यवाद!
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