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सब्जी से 12 गांव की महिलाओं ने कमाए लाखों रुपए!
👉देश में लॉकडाउन के दौरान भारी संख्या में मजदूरो का पलायन हुआ. जिसके कारण ग्रामीण परिवारों की आय में कमी आयी, उन्हें रोजगार का संकट झेलना पड़ा और उनके सामने खाने की समस्या खड़ी हो गयी. ग्रामीणों की इस समस्या को दूर करने के लिए मध्य प्रदेश की एक गैर सरकारी संस्था ने प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की मेंडकी ताल की महिलाओं को बुनियादी प्रशिक्षण देना शुरू किया और यहां पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर सामुदायिक पोषण वाटिका की शुरुआत की। ग्रामीण महिलाओं के लिए बना आय का अतिरिक्त स्त्रोत:- 👉प्रशिक्षण पाने के बाद महिलाओं ने 1600 वर्ग फुट की जमीन पर पालक, मेथी, मूली, टमाटर, बैंगन, गोभी, फूलगोभी, अदरक, धनिया, मिर्च लौकी, खीरा, कद्दू, फल, पपीता, नींबू और अमरूद जैसे विभिन्न फल और हरी सब्जियां उगाना शुरू कर दिया. तीन महीने के भीतर, महिलाओं की मेहनत रंग लाई, इसके बाद इस परियोजना में गांव की और 11 महिलाएं शामिल हो गयी. समान प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद, उन्होंने समूह बनाए और उपलब्ध भूमि पर एक साथ खेती करना शुरू कर दिया. आज 144 महिलाएं इस पहल को चला रही हैं, यह गांव की महिलाओं के लिए आय का अतिरिक्त जरिया बन गया है। पोषण वाटिका के लिए मिला प्रशिक्षण:- 👉द बैटर इंडिया के मुताबिक सामुदायिक पोषण वाटिका की शुरुआत मेंडकी ताल की किसान सविता कुसराम की भूमि पर शुरू हुई. यह कभी बंजर जमीन हुआ करती थी, पर आज कई लोगों का पेट भर रही है. सविता कुसराम बताती है की महिला किसान समूह ने मेरी जमीन पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने पर सहमति जताई. उन्होंने मुझे जमीन के लिए सालाना 10,000 रुपये देने का फैसला किया. हमें परियोजना के हिस्से के रूप में समन्वयकों से बीज और खाद प्राप्त हुई. पहले चरण में, समन्वयकों की देखरेख में, पौधों के लिए प्लॉट को इस तरह से चिह्नित किया गया था कि 6,000 पौधे लगाए जा सकें. उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें इसके लिए प्रशिक्षित किया गया था कि कैसे खरपतवारों से पौधो को बचाया जा सके. इसके अलावा, लताओं के लिए मचान मचान बनाया गया. जैविक खाद के लिए एक खाद गड्ढा खोदा गया था, साथ ही जमीन में ही नर्सरी के लिए अलग से जगह छोड़ा गया। खेती ही था एकमात्र विकल्प:- 👉वही दूसरी महिला किसान रत्निया कुसराम ने बताया कि उन्होंने पिछले छह महीनों में इतनी सब्जियां कभी नहीं खाईं. वह आगे कहती हैं, “जब हम आजीविका के लिए पलायन करते थे, तो हमने कभी भरपेट भोजन नहीं किया.यह देखकर अच्छा लगता है कि हमारे परिवार पौष्टिक भोजन करते हैं. इस पहल ने हमारे गांव में गर्भवती महिलाओं और बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य को भी सुनिश्चित किया है. लॉकडाउन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस दौरान हर कोई कैसे बेकार बैठा था. रत्निया ने गर्व से बताया कि यह महिलाओं ने ही अपने घर को चलाने की जिम्मेदारी ली थी. खेती ही एकमात्र विकल्प बचा था। आत्मनिर्भर बनी महिलाएं:- 👉परियोजना के समन्वयक चंडी प्रसाद पांडे के अनुसार, दिसंबर 2020 से मई 2021 तक, 12 पोषण वाटिका की महिलाओं ने 3 लाख रुपये कमाए थे, जहां समूहों के प्रत्येक सदस्य ने 30,000 रुपये से 35,000 रुपये के बीच की बचत की है. उन्होंने कहा कि महामारी दौरान इन महिलाओं के पास बंजर भूमि पर खेती करने की रणनीति के साथ आने के अलावा कोई विकल्प नहीं था. एक-दूसरे को प्रेरित करते हुए, इन महिलाओं ने बाधाओं को पार किया और आत्मनिर्भर बनने के लिए एक साथ खड़ी हुईं. आज यह पहल 12 गांवों में सफलतापूर्वक चलाई जा रही है। स्रोत:- TV 9 Hindi, 👉 प्रिय किसान भाइयों दी गई उपयोगी जानकारी को लाइक 👍 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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