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विश्व पटल पर बजेगा भारतीय सहकारिता का डंका, इन देशों में लगेगा नैनो यूरिया का प्लांट!
👉कृषि क्षेत्र से जुड़े सबसे बड़े सहकारी संस्थान इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड (IFFCO) विश्व पटल पर भारतीय सहकारिता का डंका बजाने जा रहा है। इसके द्वारा इजाद की गई नैनो यूरिया (Nano urea liquid) की कई देशों में मांग है। इसलिए वो कुछ देशों में अपने प्लांट लगाने की तैयारी में है। 👉इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय सहकारी गठबंधन के हिस्से के रूप में ब्राजील, अर्जेंटीना और कुछ अन्य देशों में नैनो यूरिया उत्पादन के संयंत्र लगाए जाएंगे. बताया गया है कि फिलीपींस, इंडोनेशिया, मलेशिया और साउथ कोरिया से बातचीत जारी है। कुछ अफ्रीकन देश भी इसके लाभ से परिचित हुए हैं। भारत इंटरनेशनल को-ऑपरेटिव अलाइंस का सदस्य है, जिसमें 130 देश जबकि दुनिया भर की 330 से अधिक को-ऑपरेटिव हैं। इसके बोर्ड में भारत का एक डायरेक्टर है। दुनिया में पहला प्रयोग:- 👉नैनो यूरिया तरल की शुरुआत दुनिया में सबसे पहले भारत में हुई है। वो भी एक सहकारी संस्थान के जरिए. पर्यावरण सुरक्षा, कृषि लागत में कमी और किसानों की आय (farmers income) में वृद्धि के मकसद से इसकी शुरुआत की गई है। इसके 500 मिली की एक बोतल में 40,000 पीपीएम नाइट्रोजन होता है, जो सामान्य यूरिया के एक बैग के बराबर नाइट्रोजन पोषक तत्व प्रदान करेगा। कीमत सिर्फ 240 रुपये है, यानी पारंपरिक यूरिया से 10 फीसदी कम। इसे 100 लीटर पानी में घोलकर पौधों में स्प्रे करना होगा। कितना प्रभावशाली है नैनो यूरिया:- 👉इसकी प्रभावशीलता का टेस्ट 94 फसलों और लगभग 11,000 खेतों में किया गया है। उपज में औसतन 8 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। इसलिए कई देश भारतीय कृषि की इस खोज का फायदा लेना चाहते हैं। इफको अधिकारियों के मुताबिक सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद भारतीय सहकारिता की धाक पूरी दुनिया में और मजबूत होगी। गुजरात के अमूल दुग्ध उत्पादन ने सहकारी क्षेत्र पर अपनी धाक जमा ही रखी है। भारत में मांग कैसे पूरी होगी? 👉दूसरे देशों में प्लांट लगाने की तैयारी है लेकिन भारत की मांग कैसे पूरी होगी? इफको अधिकारियों का कहना है कि अगले दो सीजन में 50 फीसदी पारंपरिक यूरिया को रिप्लेस करने का लक्ष्य तय किया है। पहले चरण में वर्ष 2021-22 के दौरान इफको की गुजरात स्थित कलोल इकाई तथा उत्तर प्रदेश की आंवला (बरेली) और फूलपुर (प्रयागराज) में नैनो यूरिया संयंत्रों का निर्माण चल रहा है। स्त्रोत:- TV9 Hindi 👉 प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक 👍 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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