कृषि वार्ताद इकोनॉमिक टाइम्स
राजस्थान सरकार द्वारा एफपीओ से मिलेंगे किसानों को आय के अधिक अवसर- सीएम गहलोत
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश में कृषक उत्पादक संगठनों के गठन एवं उनकी प्रगति की समीक्षा के लिए राज्य स्तरीय परामर्श समिति तथा जिला स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी के गठन को मंजूरी दी है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023-24 तक देशभर में 10 हजार नए कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) के गठन का लक्ष्य है। इस लक्ष्य के अनुरूप प्रदेश में अधिक से अधिक कृषक उत्पादक संगठन गठित करने तथा इन संगठनों के माध्यम से किसानों को आय के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गहलोत ने राज्य एवं जिला स्तर पर ये समितियां गठित करने को मंजूरी दी है। कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव अथवा शासन सचिव की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय परामर्श समिति में सहकारिता, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज, उद्यान, पशुपालन, मत्स्यपालन, कृषि विपणन आदि विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव, शासन सचिव, विशिष्ट शासन सचिव, आयुक्त अथवा निदेशक स्तर के अधिकारी सदस्य के रूप में सम्मिलित होंगे। राज्य कृषि विपणन बोर्ड के प्रशासक के साथ ही लघु कृषक कृषि व्यापार संघ एवं राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के प्रतिनिधियों, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के संयोजक, श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर एवं राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के निदेशक (विस्तार) को भी राज्य स्तरीय समिति में सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। नाबार्ड के महाप्रबंधक इस समिति में सदस्य सचिव होंगे। इसी प्रकार, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी में कृषि, उद्यान, पशुपालन तथा कृषि विपणन विभाग के संयुक्त निदेशक, उप निदेशक, सहायक निदेशक एवं सचिव, जिला स्तरीय मण्डी समिति, सहकारी समितियों के उप रजिस्ट्रार, जिला प्रबंधक अग्रणी बैंक, वरिष्ठ वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केन्द्र, परियोजना निदेशक आत्मा तथा स्थानीय उत्पादक समूह के प्रतिनिधि सदस्य होंगे। नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक सदस्य सचिव होंगे। प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों का होगा विस्तार इसी के साथ मुख्यमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत कार्यक्रम के तहत प्रदेश में अधिक से अधिक खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना एवं उनके विस्तार के लिए कृषि विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति गठित करने को मंजूरी दी है। उन्होंने जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समितियों के गठन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। गौरतलब है कि आत्मनिर्भर भारत कार्यक्रम के तहत केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना एवं विस्तार के लिए योजना प्रारम्भ की है। इस योजना के तहत इन इकाइयों की स्थापना एवं विस्तार के लिए 10 लाख रूपए तक के अनुदान का प्रावधान है। केन्द्र प्रवर्तित इस योजना में केन्द्र और राज्य के बीच 60:40 के अनुपात में वित्तीय भागीदारी का प्रावधान है। सम्पूर्ण देश में 2 लाख खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना तथा विस्तार के लिए 10 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है। स्रोत -8 अगस्त 2020 द इकनोमिक टाइम्स,
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