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ये मशीन बंजर जमीन को घंटों में बनाती है खेती के योग्य!
👨🏻‍💻अधिकांश लोगों के लिए शिक्षा सिर्फ पैसा कमाने और आगे बढ़ने का जरिया है। लेकिन 25 साल के दीपक ऐसा नहीं सोचते। उनके अनुसार शिक्षा का फायदा तभी है, जब वह किसी जरूरतमंद के काम आ सके। अपनी इस सोच के चलते दीपक ने इंजीनियरिंग करने के बाद नौकरी की राह नहीं पकड़ी बल्कि किसानों के लिए एक ऐसी किफायती हार्वेस्टिंग मशीन बनाने में जुट गए, जिससे उनकी बंजर पड़ी सैंकड़ों एकड़ जमीन को खेती के योग्य बनाया जा सके। 👨🏻‍💻साल 2016 में जब के. दीपक रेड्डी, हैदराबाद से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन करने के बाद अपने पैतृक गांव लौटे, तो उनके मन में खेत और किसानी से जुड़े अनगिनत सवाल थे। वह तेलंगाना के संगारेड्डी जिले के गांव बोरांचा में रहते हैं। गांव में ऐसे ही घूमते हुए, अचानक उनकी नजर एक खाली जमीन पर पड़ी। वह कहते हैं, “हालांकि मैं बचपन से इस खाली जमीन को देखता आ रहा था। लेकिन बार-बार यहां जाने के बाद मुझे पता चला कि सालों से इस पर खेती नहीं की गई थी।” 👨🏻‍💻दीपक ने द बेटर इंडिया को बताया, “जब मैंने आसपास के किसानों से पूछा कि ये सैकड़ों एकड़ जमीनें सालों से बंजर क्यों पड़ी हैं? तब उन्होंने बताया कि पत्थरों के मलबे के कारण वहां खेती कर पाना संभव नहीं है। ज़मीन से पत्थरों को हटाने में काफी खर्च आता है। पहले जमीन को साफ करने के लिए पैसे लगाओ और फिर खेती पर, इतना खर्च उठा पाना उनके लिए संभव नहीं है। पांच-सात एकड़ जमीन पर खेती करने वाला सीमांत किसान इस पर हजारों रुपये खर्च नहीं कर सकता।” 👨🏻‍💻दीपक बताते हैं, “किसान अगर इस जमीन पर पैसे लगाने के लिए तैयार हो भी जाएं, तब भी इन पत्थरों और चट्टानों को खेत से पूरी तरह हटाने में उन्हें कम से कम पांच या छह साल तक इस पर लगातार काम करना पड़ेगा। सतह की परत में 60 प्रतिशत तक पत्थर होते हैं। इन्हें जमीन की जुताई के कई चक्रों के जरिए हटाने में और कई साल लगते जाते हैं।” यह काम केवल गर्मियों के महीनों में ही किया जा सकता है। क्योंकि इस समय मिट्टी सूखी होती है। 👨🏻‍💻दीपक ने जब शोध करना शुरू किया, तो पता चला कि महाराष्ट्र कर्नाटक और आंध्रप्रदेश के आस-पास के राज्यों में ऐसी हजारों एकड़ जमीन खाली पड़ी है। वह कहते हैं, “ऐसा सिर्फ भारत में ही नहीं था। अन्य देश भी इस समस्या से जूझ रहे थे। इससे निपटने के लिए उनके पास मशीनें थीं। लेकिन भारत में कम लागत वाला कोई भी ऐसा उपकरण नहीं था, जो इस काम को अंजाम दे सके।” खास काम को अंजाम देने वाली साधारण सी मशीन - 👨🏻‍💻कई साल की मेहनत और शोध के बाद उन्होंने इस काम के लिए एक कम कीमत वाली मल्टी हार्वेस्टर मशीन तैयार की। जो ना केवल कुछ घंटों में पत्थरों को खोदकर बाहर निकाल फेंकती है, बल्कि आलू प्याज और अन्य जड़ वाली सब्जियों की खुदाई भी बड़ी सफाई के साथ करती है। 👨🏻‍💻दीपक, ग्रेजुएशन के बाद सिमुलेशन और सॉफ्टवेयर डिजाइनिंग सीखकर अपनी स्किल्स को अपग्रेड कर रहे थे। वह बताते हैं, “मैंने अपनी स्किल्स का इस्तेमाल करते हुए एक ऐसी मशीन बनाने का फैसला किया, जिसे ट्रैक्टर के साथ जोड़ा जा सके और मिट्टी की ऊपरी परत के साथ-साथ नीचे से भी पत्थरों को हटाने में सक्षम हो।” यह पूछे जाने पर कि क्या मशीन बनाते समय असफल होने का विचार कभी मन में आया था? 👨🏻‍💻दीपक कहते हैं, “जोखिम उठाने का निर्णय लेना थोड़ा मुश्किल था। ग्रेजुएशन के बाद नौकरी करना जरूरी था। क्योंकि करियर के बनने या बिगड़ने में शुरुआती साल महत्वपूर्ण होते हैं। लेकिन मैंने कभी असफलता के बारे में नहीं सोचा। मेरा इरादा व्यावसायिक लाभ के लिए मशीन बनाने का नहीं था। मैं तो किसानों की मदद करना चाहता था। शिक्षा का फायदा तभी है, जब वह किसी जरूरतमंद के काम आ सके।” 👨🏻‍💻फिलहाल उन्हें उम्मीद है कि उनका यह उत्पाद जल्द ही मार्केट में आ जाएगा और पूरे भारत में व्यावसायिक रूप से इसे इस्तेमाल किया जाने लगेगा। स्त्रोत:- TheBetterIndia 👉किसान भाइयों ये जानकारी आपको कैसी लगी? हमें कमेंट करके ज़रूर बताएं और लाइक एवं शेयर करें धन्यवाद!
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