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यूपी के शहरों में मकान की चाहत रखने वालों के लिए अच्छी खबर!
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यूपी के शहरों में मकान की चाहत रखने वालों के लिए अच्छी खबर!
👉नमस्कार किसान भाइयों उत्तर प्रदेश शहरों में मकान की चाहत रखने वालों के लिए अच्छी खबर है। आवास विकास परिषद और विकास प्राधिकरणों से खाली जमीनों पर योजनाएं लाने का निर्देश दिया गया है। इसमें आवासीय और व्यवसायिक योजनाएं लाई जाएंगी। शहरों में मकान की चाहत रखने वालों के लिए अच्छी खबर है। आवास विकास परिषद और विकास प्राधिकरणों से खाली जमीनों पर योजनाएं लाने का निर्देश दिया गया है। इसमें आवासीय और व्यवसायिक योजनाएं लाई जाएंगी। 👉आवास विभाग ने प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों और आवास विकास परिषद से उनके यहां भूमि बैंक के बारे में जानकारी मांगी थी। इसमें पूछा गया था कि किसके यहां कितनी जमीनें खाली हैं और कितने के अधिग्रहण की तैयारी है। आवास विकास परिषद और विकास प्राधिकरणों ने मार्च 2022 तक की स्थिति के बादे में जानकारी दी है। इसके मुताबिक अधिकतर जमीनें बड़े शहरों में खाली हैं। 👉प्रमुख सचिव आवास नितिन रमेश गोकर्ण ने आवास आयुक्त और विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्षों को निर्देश दिया है कि खाली जमीनों पर योजनाएं लाई जाएं, जिससे लोगों की जरूरतें पूरी हो सके और उनकी आय में इजाफा हो सके। सालों-साल जमीन खाली रहने से इन पर अवैध कब्जा होने की संभावना बनी रहती है। अवैध कब्जा होने की स्थिति में इसे खाली कराने पर समय जाया होता है और कोर्ट में मामला जाने से इसके फसने की संभावना भी रहती है। 👉क्या है वस्तु स्थिति:- आवास विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2022 तक प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों और आवास विकास परिषद में 2377 भूखंड ऐसे हैं जो खाली हैं। इनकी कीमत 812.76 करोड़ रुपये है। सबसे अधिक आवासीय जमीनें आवास विकास परिषद के पास 627, लखनऊ विकास प्राधिकरण 155, बरेली 880, कानपुर 181, बांदा 114 और आगरा के पास 106 भूखंड हैं। व्यवसायिक की कुल 4932 जमीनें हैं। इसकी कीमत 10412.85 करोड़ रुपये है। सबसे अधिक व्यवसायिक जमीनें आवास विकास परिषद 1123, लखनऊ 628, आगरा 515, गाजियाबाद 390, कानपुर 380, मेरठ 464, मुजफ्फरनगर 127, हापुड़ 229, मुरादाबाद 141, बरेली 394 जमीनें हैं। 👉आवंटन के बाद भी नहीं हुई रजिस्ट्री:- विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद द्वारा संपत्तियों का आवंटन किए जाने के बाद भी रजिस्ट्रियां नहीं हो रही हैं। इसके चलते इनकी रखवाली पर बेजा पैसा खर्च हो रहा है। अमूमन तो समय से रजिस्ट्री न कराने वालों से चौकीदारी शुल्क लेने की व्यवस्था है, लेकिन जुगाड़ के सहारे इसे या तो माफ या फिर कम करा लिया जाता है। प्रमुख सचिव आवास ने अधिकारियों से ऐसी संपत्तियों की रजिस्ट्री अभियान चलाकर कराने का निर्देश दिया है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में 12030, आवास विकास परिषद 10522, लखनऊ 11991, कानपुर 1873, मुरादाबाद 740, आगरा 3949 व रायबरेली में 756 संपत्तियों की रजिस्ट्री मार्च 2022 तक होना बाकी थी। 👉स्रोत:-Agrostar किसान भाइयों ये जानकारी आपको कैसी लगी? हमें कमेंट करके ज़रूर बताएं और लाइक एवं शेयर करें धन्यवाद!
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