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यह फल किसानों को कर रहा मालामाल, पत्ते का भी होता है इस्तेमाल!
👉🏻 भारत में तरह-तरह के फल और सब्जियों की खेती होती है। इनमें से कुछ फल सदियों से उगाए जा रहे हैं और अब किसानों के लिए कमाई का अच्छा जरिया बन गए हैं। 👉🏻 भारत में तरह-तरह के फल और सब्जियों की खेती होती है। इनमें से कुछ फल सदियों से उगाए जा रहे हैं और अब किसानों के लिए कमाई का अच्छा जरिया बन गए हैं। औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण फल के अलावा भी अलग-अलग तरीके से इनका इस्तेमाल हो रहा है। उत्पादन कम और मांग ज्यादा होने के कारण कंपनियां किसानों के साथ मिलकर भी इनकी खेती करा रही हैं। ऐसा ही एक फल है, पैशन फ्रूट। इसे भारत में कृष्णा फल के नाम से भी जाना जाता है। 👉🏻 कृष्णा फल पैसिफ्लेरेसिया परिवार का है। यह भारत और ब्राजील में बहुतायत में होता है। भारत के कूर्ग, नीलगिरी और मालाबार के इलाके में भी इसकी खेती है। पूर्वोत्तर के राज्यों मणिपुर, मिजोरम और नागालैंड में भी बड़ी मात्रा में इसकी खेती होती है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, हाल के समय में मणिपुर में इसका उत्पादन काफी मात्रा में हो रहा है। अंगूर की तरह दिखने वाला यह फल पूर्वोत्तर भारत में कई रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसकी पत्तियों से वहां के लोग सब्जी बनाकर खाते हैं। पैशन फ्रूट की 500 से अधिक किस्में हैं 👉🏻 पैशन फ्रूट दुनिया भर में बड़े पैमाने पर खाया जाता है। इसकी 500 से अधिक किस्में हैं। पैशन फ्रूट पोषक तत्व, खनिज और विटामिन से भरपूत हबोता है। इसमें पौटैशियम, तांबा, फाइबर सहित कई अन्य विटामिनों की मात्रा काफी ज्यादात होती है। पाचन शक्ति बढ़ाने के साथ ही इम्युनिटी बढ़ाने, सूजन कम करने और एजिंग को नियंत्रित करने में भी सहायक होता है। 👉🏻 पैशन फ्रूट पहाड़ियों पर अच्छी मात्रा में उगता है। इसके फसल के लिए ज्यादा बारिश की जरूरत नहीं होती है। 15 डिग्री से अधिक और 30 डिग्री तक तापमान रहने से इसकी पैदावार अच्छी होती है और फलों की गुणवत्ता भी सही रहती है। इसकी खेती के लिए सूखी रेतीली मिट्टी को सबसे अच्छा माना जाता है. इसकी रोपाई के लिए मानसून के शुरुआत का समय सबसे उपयुक्त रहता है। एक हेक्टेयर में 20 टन तक होती है पैदावार 👉🏻 रोपाई के बाद सिंचाई और खर-पतवार नियंत्रण जरूरी होता है। रोपाई करने के 10 महीने बाद इसमें फल लगने लगता है और 15 से 18 महीने में यह कटाई के लिए तैयार हो जाता है। अगर उपज की बात करें तो यह प्रति हेक्टेयर 10 टन से ज्यादा ही होता है। अलग-अलग किस्मों का असर भी उत्पादन पर पड़ता है। कुछ किस्में प्रति हेक्टेयर में 20 टन तक होती हैं। 👉🏻 खेती तथा खेती सम्बंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए कृषि ज्ञान को फॉलो करें। फॉलो करने के लिए अभी ulink://android.agrostar.in/publicProfile?userId=558020 क्लिक करें। स्रोत:- TV 9 Hindi, 👉🏻 प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। यदि दी गई जानकारी आपको उपयोगी लगी, तो इसे लाइक 👍 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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