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मौसम विभाग ने दी अच्छी खबर, ​इन महीनों में होगी अच्छी बारिश!
👉देश के विभिन्न राज्यों में किसान अभी खरीफ फसलों की खेती में लगे हैं. ज्यादातर हिस्से में धान की रोपाई का काम पूरा हो चुका है और धान की फसल के लिए पर्याप्त पानी की जरूरत है. देश में 20 करोड़ से अधिक किसान धान की खेती करते हैं और ऐसे में भारतीय मौसम विभाग की ओर से उनके लिए एक अच्छी खबर आई है। 👉भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगस्त-सितंबर में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना जताई है. ये दो महीने यानी अगस्त और सितंबर, चार महीने के मॉनसून का उत्तरार्द्ध हैं. आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने अगस्त के लिए जारी अनुमान में बताया कि इस महीने में भी मानसून के सामान्य रहने की संभावना है। ऑनलाइन ब्रीफिंग में बताया अगस्त-सितंबर का पूर्वानुमान:- 👉महापात्रा ने सोमवार को ऑनलाइन ब्रीफिंग में बताया, “अगस्त से सितंबर 2021 के दौरान समूचे देश में वर्षा के सामान्य (दीर्घावधि औसत के 95 से 105 प्रतिशत) होने की संभावना है और इसके सामान्य के सकारात्मक पक्ष में होने की प्रवृति है.” वर्ष 1961-2010 की अवधि के लिए पूरे देश में अगस्त से सितंबर की अवधि की वर्षा दीर्घवधि (एलपीए) 428.3 मिमी है. हर साल आईएमडी दक्षिण पश्चिम मानसून के अगस्त-सितंबर के महीनों के लिए पूर्वानुमान जारी करता है जो बरसात की चार महीने की ऋतु के आखिरी दो महीने होते हैं। कुछ हिस्सों में कम बारिश का अनुमान:- 👉आईएमडी ने स्थानिक वितरण के आधार पर बताया है कि देश के उत्तर, पूर्व और पूर्वी हिस्से के कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. उसने बताया कि प्रायद्वीपीय भारत और उससे सटे मध्य भारत के अधिकतर हिस्सों मे सामान्य से लेकर सामान्य से ज्यादा बारिश होने की संभावना है. आईएमडी ने इस साल मॉनसून के चार महीने के लिए माहवार पूर्वानुमान जारी करना शुरू किया है। इन क्षेत्रों मं सामान्य बारिश की संभावना:- 👉महापात्रा ने कहा, “ पूरे देश में अगस्त में औसत वर्षा सामान्य से (एलपीए का 94 से 106 फीसद) होने की संभावना है.” 1961 -2010 की अवधि के लिए पूरे देश में अगस्त की वर्षा एलपीए का 258.1 मिमी है. आईएमडी के मुताबिक, स्थानिक वितरण से पता चलता है कि मध्य भारत के कई क्षेत्रों और उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से नीचे से लेकर सामान्य बारिश होने की संभावना है. उन्होंने कहा, “प्रायद्वीप भारत और पूर्वोत्तरी भारत के अधिकतर भागों पर सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है।” अल नीनो और ला नीना की स्थिति:- 👉महापात्रा ने कहा कि वर्तमान में समुद्र सतह तापमान (SST) और भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर पर वायुमंडीलय स्थितियां तटस्थ ईएनएसओ (अल नीनो) की स्थितियों का संकेत देती हैं. एसएसटी भारतीय मॉनसून को प्रभावित करने वाले कारकों में से एक है. मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र सतह का तापमान ठंडा होने की प्रवृत्ति दिखा रहा है। 👉आईएमडी के मुताबिक, नवीनतम पूर्वानुमानों से पता चलता है कि ईएनएससो की तटस्थ स्थिति मॉनसून ऋतु के शेष भाग के दौरान जारी रहने की संभावना है और मॉनसून ऋतु के अंत में या उसके बाद ला नीना स्थिति के फिर से उभरने की संभावना है. ला नीना प्रशांत महासागर के पानी के ठंडा होने से जुड़ा है, जबकि अल नीनो का संबंध पानी के गर्म होने से है। बारिश से राहत महसूस कर रहे हैं किसान:- 👉रिपोर्ट्स के मुताबिक, 20 करोड़ से अधिक किसान खरीफ फसलों की खेती करते हैं और इन फसलों के लिए पानी की बेहद जरूरत होती है. किसान धान के अलावा कपास, सोयाबीन, बाजरा, मूंगफली और गन्ना की खेती लगे हुए हैं. मध्य प्रदेश में तो शुरुआती महीनों में बारिश नहीं होने के कारण सोयाबीन किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है, लेकिन बीते कुछ दिनों से राज्य में बारिश का दौर जारी है. जिससे किसान राहत महसूस कर रहे हैं। स्रोत:- TV9 Hindi, 👉 प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक 👍 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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