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मूँगफली की वैज्ञानिक खेती!
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मूँगफली की वैज्ञानिक खेती!
🌱खरीफ फसलों में मूँगफली प्रमुख तिलहन फसल है।मूँगफली की फसल में बुआई से लेकर कटाई तक कई तरह के कीट-रोग लगते हैं, इनमें कई कीट रोगों का उपचार तो किसान बीज की बुआई से पहले ही कर सकते हैं। मूँगफली फसल को कीट रोगों से बचाने के लिए किसानों को खरीफ के मौसम में बीजों का उपचार आवश्यक रूप से करना चाहिए। 🌱मूँगफली की फसल में लगते हैं यह कीट एवं रोग:- मूँगफली की बुवाई जून के प्रथम सप्ताह से दूसरे सप्ताह तक की जाती है। मूंगफली की फसल में दीमक, सफेद लट, गलकट, टिक्का (पत्ती धब्बा) व विषाणु गुच्छा आदि कई अन्य हानिकारक कीट व रोगों का प्रकोप होता हैं। इनमें से सफेद लट व गलकट (कॉलर रॉट) रोग के कारण फसल को सर्वाधिक हानि होती हैं। मूंगफली की फसल को कीटों व रोगों से बचाने के लिए बीजोपचार करें। 🌱किसान इस तरह बचाएँ मूँगफली को गलकट रोग से:- गलकट रोग के कारण पौधे मुरझा जाते हैं। ऐसे पौधों को उखाड़ने पर उनके स्तम्भ मूल संधि (कॉलर) भाग व जड़ों पर फफूंद की काली वृद्धि दिखाई देती हैं। रोग से समुचित बचाव के लिए मृदा उपचार, बीजोपचार एवं रोग प्रतिरोधक किस्मों का उपयोग करना चाहिए।किसान भाई बुवाई से पहले 2.5 किलो ट्राइकोडर्मा 500 किलो गोबर में मिलाकर एक हेक्टेयर क्षेत्र में मिला दें । कार्बोक्सिन 37.5 प्रतिशत का 3 ग्राम तथा थाईरम 3 ग्राम अथवा मैन्कोजेब 2 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से बीजोपचार करें। रासायनिक फफूंदनाशी के लिए 1.5 ग्राम थाईरम एवं 10 ग्राम ट्राइकोडर्मा से प्रतिकिलो बीज को उपचारित करें। 🌱जमीन में रहने वाले कीटों से मूँगफली को कैसे बचाएँ:- मूंगफली की फसल को भूमिगत कीटों के समन्वित प्रबंधन के लिए बुवाई से पूर्व भूमि में 250 किलो नीम की खली प्रति हेक्टेयर की दर से डालें। इमिडाक्लोप्रिड 600 एफएस की 6.5 मिली प्रतिकिलो बीज से बीजापचार करें। साथ ही ब्यूवेकिया बेसियाना का 0.5 ग्राम प्रति वर्ग मीटर की दर से बुवाई के 15 दिन बाद डालें। 🌱बीज उपचार से होती है पैदावार में वृद्धि:- बुवाई से पूर्व बीजों को राइजोबियम कल्चर से उपचारित करने से फसल की पैदावार में बढ़ोतरी होती हैं। बीजों को राइजोबियम कल्चर से उपचारित करने के लिए 2.5 लीटर पानी में 300 ग्राम गुड़ को गर्म करके घोल बनाए। घोल के ठण्डा होने पर इसमें 600 ग्राम राइजोबियम जीवाणु कल्चर मिलाए। इस मिश्रण से एक हैक्टेयर क्षेत्र में बोए जाने वाले बीज को इस प्रकार मिलाएं कि सभी बीजों पर इसकी एक समान परत चढ़ जाएं। इसके पश्चात इन बीजों को छाया में सुखाकर शीघ्र बोने के काम में लें। किसान भाई फफूंदनाशी, कीटनाशी से बीजों को उपचारित करने के बाद ही राइजोबियम जीवाणुकल्चर से बीजों को उपचारित करें। 🌱स्रोत:-AgroStar किसान भाइयों ये जानकारी आपको कैसी लगी? हमें कमेंट करके ज़रूर बताएं और लाइक एवं शेयर करें धन्यवाद!
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