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मत्स्य पालकों के लिए बेहद काम की है यह तकनीक,
मत्स्य पालक यह जानते हैं कि मछली पालन के लिए सबसे जरूरी चीज पानी होती है. ऐसे में पानी की गुणवत्ता बनाये रखना और समय समय पर इसका ध्यान देना बेहद जरूरी हो जाता है. इसे लेकर ही आज ऐसी तकनीक की चर्चा इस खबर में होगी जिसमें मत्स्य पालकों को अपने फोन में ही एप के जरिये पानी से संबंधित पूरी जानकारी हासिल हो जाएगी. इसके जरिये मत्स्य पालक यह पता लगा पाएंगे की उनके तालाब या जलाशय के पानी में ऑक्सीजन का लेवल कितना या फिर किन पोषक तत्वों की जरूरत पानी में है. इसके आधार पर वो तुंरत इस पर समस्या को दूर कर देते हैं जिससे उनका उत्पान बढ़ जाता है! क्या है तकनीक- इस तकनीक का नाम आइओटी (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) है. इसके जरिये मछली पालन किये जानेवाले तालाबों में उपलब्ध रसायन, ऑक्सीजन लेवल और खरपतवार की जानकारी ऑनलाइन हासिल की जा सकेगी. इसके लिए तालाब में इस तकनीक का इस्तेमाल करना होगा. झारखंड में इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए पहले चरण में राजधानी के दो तालाब सहित अन्य जिलों के तालाबों में इस तकनीक का उपयोग किया जाएगा. किसानों तक इस तकनीक को पहुंचाने के लिए और उन्हें इस तकनीक की विस्तृत जानकारी देने के लिए एजेंसी का चयन किया जाएगा! दूर होगी मैन पावर की कमी- शोध से पता चला हैं की इस तकनीक के इस्तेमाल से तालाबों में मैन पावर की कमी को दूर किया जाएगा. अब अपने घर में बैठे मत्स्य पालक पानी से संबंधित जानकारी हासिल कर पाएंगे. साथ ही ऑक्सीजन की कमी से मछलियों को होनेवाले नुकसान को कम किया जा सकेगा! स्त्रोत:- टव९ 👉 प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक 👍 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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