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गुरु ज्ञानएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
मक्का फसल में नई आक्रामक कीट: चार धब्बो वाले फॉल आर्मीवर्म (स्पोडोपटेरा फ्रुगिपरडा)
इस फॉल आर्मीवर्म को आम तौर पर अमेरिका और अन्य देशों में देखा जाता है। हाल ही में, यह कीट अगस्त, 2018 में कर्नाटक में और बाद में अन्य राज्यों में भी देखी गई है। इस किट का प्रकोप गुजरात में भी देखा गया हैI वर्तमान में, इस किट को केवल मक्का की फसल पर पाया गया है लेकिन निकट भविष्य में, यह अन्य फसलों में भी हमला कर सकता है। इसीलिए इस किट की पहचान एवं नियंत्रण जानना जरुरी हैंI इस किट को पहचानना आसान हैंI यह किट रंग में भूरा है, इसके शरीर के प्रत्येक खंड पर पृष्ठीय तरफ बाल के साथ मुहांसे जैसे काले रंग के धब्बे हैं, किट के दुसरे से आखरी शरीर खंड पर चौकोर बनाने वाले चार गहरे रंग वाले धब्बे होते हैं, किट का सामने पीले, उल्टा-नीचे वाई-आकार के साथ एक गहरा सिर है और नर पतंग के सामने पंख पर सफेद पैच है। इस किट के इल्ली का चरण लगभग 12 से 20 दिन है। यह पॉलीफैगस कीट अपने अंडे को पत्थर की निचली सतह पर रेशम धागे के साथ आवरण में रखती है। छोटी इल्ली पत्ती की इपीडरमल परत को स्क्रैप कराती हैं और पत्ते मे जो क्लोरोफिल हैं उसको खाती हैं। बड़ी इल्ली पत्तियों पर असमान छेद बनाकर पत्तियों को खाती हैं और कोब में प्रवेश करके विकसित होने वाले अनाज को खाती हैं। पत्ती के घाट के पास चुरादा की तरह किट की विष्टा देखी जाती है। यह कैटरपिलर मक्का फसल को 34 से 50% नुकसान पहुंचा सकता है।
एकीकृत प्रबंधन: 1. पहली फसल ख़तम होने के बाद जमीन की गहरी जुताई करेंI 2. मिट्टी में फसल की नई बुवाई के समय नीम केक @ 250 किलोग्राम / हेक्टर लागू करें। 3. क्षेत्र में एक प्रकाश जाल स्थापित करें। 4. मक्का फसल के बाद मक्का ना लें। फसल चक्रिकरण का पालन करें। 5. यांत्रिक रूप से अंडे के समूह को इकट्ठा और नष्ट करें। 6. उपद्रव की शुरुआत पर, नीम बेस फॉर्मूलेशन @ 40 मिलीलीटर (1500 पीपीएम) - 10 मिलीलीटर (10000 पीपीएम) प्रति 10 लीटर पानी का छिडकाव करें। 7. उपद्रव ज्यादा होने पर, क्लोरोप्रिफोस 20 ईसी 20 मिलीलीटर या स्पिनोसैड 45 एससी 3 मिलीलीटर या एमेमेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी @ 4 जी या क्लोरैंट्रिनिलिप्रोल 18.5 एससी 3 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी का छिडकाव करें। ध्यान रखे की पूरी पत्तियों पर अच्छेसे छिडकाव करेंI हर एक छिडकाव पर कीटनाशक बदलें। डॉ. टी.एम. भरपोडा, एंटोमोलॉजी के पूर्व प्रोफेसर, बी ए कालेज ऑफ एग्रीकल्चर, आनंद कृषि विश्वविद्यालय, आनंद- 388 110 (गुजरात भारत)
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