कृषि वार्ताTV 9 Hindi
मक्का, ज्वार, बाजरा की खेती करने वाले किसानों के लिए खुशखबरी !
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि मोटे अनाज के वितरण और किसानों को लाभ पहुंचाने से जुड़ी नीतियों को बदलने का वक्त आ गया है. सीमांत किसानों को मदद पहुंचाने के लिए मोटे अनाज की खेती और खरीद को बढ़ाने की जरूरत है मक्का, ज्वार, बाजरा, रागी आदि न केवल स्वास्थ्य के लिए अच्छे हैं, बल्कि कृषि अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहतर फसलें हैं.संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भी वर्ष 2023 को ‘अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष’ के रूप में घोषित किया है.फसल की स्थानीय खरीद और खपत से ट्रांसपोर्ट का खर्चा बचेगा, मोटे अनाज तीन महीने से ज्यादा वक्त तक खराब भी नहीं होते हैं. मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार राज्य सरकार की एजेंसियों/एफसीआई द्वारा किसानों से मोटे अनाज की खरीदी की जाती है न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अंतर्गत आने वाली प्रमुख मोटे अनाज की फसलें ज्वार (हाइब्रिड), ज्वार (मालदंडी), बाजरा, रागी, मक्का और जौ हैं. बाजरा, मक्का और जौं को मोटे अनाज के रूप में जाना जाता है. भारत में, खरीफ मार्केटिंग सीजन 2020-21 के दौरान कुल 3,04,914 किसान लाभान्वित हुए हैं, इसकी खरीद से किसानों की आय दोगुनी करने में मदद मिलेगी. बाजरा अधिक पौष्टिक होता है, इसलिए भारत को कुपोषण से लड़ने में मदद मिलेगी. साथ ही बाजरा अधिक पर्यावरण के अनुकूल है इसलिए स्थायी कृषि को बढ़ावा देने और पर्यावरण के संरक्षण में इसकी अहम भूमिका है ! 👉 खेती तथा खेती सम्बंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए कृषि ज्ञान को फॉलो करें। फॉलो करने के लिए अभी ulink://android.agrostar.in/publicProfile?userId=558020 क्लिक करें। स्रोत:- TV 9 Hindi, 👉 प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक 👍 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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