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मई महीने में शुरू कर दें इन फसलों की बुवाई की तैयारी, मिलेगी अच्छी उपज!
सलाहकार लेखगांव कनेक्शन
मई महीने में शुरू कर दें इन फसलों की बुवाई की तैयारी, मिलेगी अच्छी उपज!
👉🏻ये महीना खरीफ़ की फसलों की बुवाई की तैयारी का होता है, इसलिए किसानों को अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। किसान इस समय रबी की फसलों की कटाई, मड़ाई के साथ ही जायद की फसलों की देखभाल व खरीफ की फसलों की तैयारी करने लग जाते हैं। 10 से तीस मई तक नर्सरी डालने का सही समय:- 👉🏻नर्सरी का उचित समय 10-30 मई है। नर्सरी तैयारी के लिए अपने क्षेत्र के हिसाब से किस्मों का चयन करें। कृषि विज्ञान केन्द्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. दया शंकर श्रीवास्तव बताते हैं, "इसके 10-12 किग्रा. बीज प्रति एकड़ को दस लीटर पानी जिसमें एक किग्रा. नमक घुला हो डालकर, ऊपर तैरने वाले बीजों को फेंक दें और नीचे बैठे बीजों को साफ पानी में अच्छी तरह से धो लें, फिर ट्राइकोडर्मा से चार ग्राम प्रति किग्रा. बीज की दर से उपचारित करना चाहिए।" नर्सरी के जड़शोधन के लिए स्यूडोमोनास पांच मिली प्रति लीटी की दर से उपचारित करें। नर्सरी बुवाई से पहले खेत में 12-15 टन कम्पोस्ट डालकर दो-तीन बार जुताई करके मिट्टी में मिला दें, फिर पानी डालकर पडलर से गारा बना लें। खेत में आधी बोरी यूरिया, एक बोरी सिंगल सुपर फास्फेट व दस किलो. जिंक सल्फेट डालकर सुहागा लगा दें। इससे खरपतवार भी नष्ट हो जाते हैं और पानी का रिसाव भी बहुत कम हो जाता है। इसके चार-पांच घंटे बाद दस गुणा दस फुट आकार की खेत में 400 क्यारियां बनाकर एक किग्रा. अंकुरित बीज प्रति क्यारी लगा दें और कम्पोस्ट छिड़ककर पतली तह बना दें ताकि पक्षी बीज न चुग जाएं। खेत को हल्की-हल्की सिंचाई करके नम रखें और दो हफ्ते बाद आधी बोरी यूरिया पूरे खेत में छिड़कें। खरीफ के मक्का की बुवाई:- 👉🏻मई मे बोया मक्का अगस्त में पक जाता है। मक्की के लिए अच्छे जल निकास वाली दोमट मिट्टी चाहिए। मक्का के दो लाईनों के बीच सोयाबीन, मूंग या उड़द की एक लाइन भी लगा सकते हैं, जिसके लिए कोई विशेष क्रिया नहीं करनी पड़ती है इससे खरपतवार नियंत्रण बढ़िया हो जाता है और मुख्य फसल के साथ-साथ दाल की फसल प्राप्त कर आय में वृद्धि होती है। ग्रीष्मकालीन मूंगफली की बुवाई:- 👉🏻सिंचित क्षेत्रों में मई के पहले सप्ताह तक बीज सकते हैं, इसके लिए मूंगफली-गेहूं फसल चक्र अपनाया जा सकता है, लेकिन एक ही जमीन पर हर बार मूंगफली न उगाएं इससे मिट्टी से कई बीमारियां पैदा हो जाती हैं। खरपतवार निकालने के लिए तीन सप्ताह बाद निराई-गुड़ाई करें और साथ में सिंचाई के लिए नालियां भी बना लें। मूंग व उड़द की फसल में करें ये काम:- 👉🏻अप्रैल में बोई फसलों से एक माह बाद खरपतवार निकाल दें और 17 दिन के अन्तर पर सिंचाई करें ताकि फूल तथा फलियां लगने पर पानी की कमी ना हो व दाना मोटा पड़े। सिंचित क्षेत्रों में करें अरहर की बुवाई:- 👉🏻यह फसल बहुत कम लागत में उगाई जा सकती है और तीन कुंतल से ज्यादा पैदावार देती है। सिंचित अवस्था में मई माह में लगा सकते हैं। बीज को राइजोबियम जैव खाद से जरूर उपचारित करें, इससे पैदावार में बहुत बढ़ोतरी होती है। अप्रैल में बोई फसल में 27 दिन बाद निराई-गुड़ाई कर दें और एक हल्की सी सिंचाई भी दे दें। 👉🏻टमाटर व बैंगन खड़ी फसल में सप्ताह में एक हल्की सिंचाई दें और एक बोरी यूरिया डालें। नई बाग लगाने की करें तैयारी:- 👉🏻नई बाग लगाने के लिए गढ्ढे अभी खोद दें ताकि धूप से कीड़ों और बीमारियों को नियंत्रण हो सके। महीने के आखिर में इन गड्ढों में आधा ऊपर वाली मिट्टी और आधी कम्पोस्ट में कीटनाशक दवाई मिलाकर पूरी तरह से उपर तक भर दें। जैविक हरी खाद का करें प्रयोग:- 👉🏻दालों, मूंगफली, सोयाबीन, बरसीम जैसी फसलों में खेती में लागत कम करने के लिए उर्वरकों के साथ-साथ जैविक खाद भी जरूर प्रयोग करें। राइजोवियम जैवखाद जोकि हर फसल के लिए अलग होती है। 10-12 रुपए का खर्च करने से प्रति एकड़ एक बोरा यूरिया की बचत होती है। तीन-चार महीने में तैयार हो जाती है हरी खाद अन्य फसलें जैसे मक्का, कपास, सब्जियां, चारा में एजोटोवैक्टर, गन्ने में एसीटोवैक्टर और धान एजास्पीरीलियम का प्रयोग करें। ये जैव खाद हवा से नाइट्रोजन खींचकर मुफ्त में फसल की जरूरत पूरी करते हैं। उच्च या मध्यम फास्फोरस वाली मिट्टी में, जिसका हम मिट्टी परीक्षण से पता लगाते, में पीएसएम. जैव खाद जरूर लगाए, ये मिट्टी में पड़े फास्फोरस या डाली फास्फोरस खाद को घुलनशील करके शीघ्र फसल को देता है और पैदावार काफी हद तक बढ़ता है। 👉🏻खेती तथा खेती सम्बंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए कृषि ज्ञान को फॉलो करें। फॉलो करने के लिए अभी ulink://android.agrostar.in/publicProfile?userId=558020 क्लिक करें। स्रोत:- Gaon Connection, 👉🏻प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। इस वीडियो में दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक 👍🏻 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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