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भाई-बहन किसानों के लिए किया शानदार आविष्कार!
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भाई-बहन किसानों के लिए किया शानदार आविष्कार!
👉🏻किसानों के लिए उनकी फसल की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है। कई बार जंगली जानवर खेत में घुसकर फसल को पूरी तरह से बर्बाद कर देते हैं। इस वजह से जहां एक तरफ किसानों को आर्थिक नुकसान होता है, वहीं जावनरों के भय से फसल की रखवाली में उनका अच्छा खासा वक्त भी बर्बाद होता है। किसानों की इस तरह की परेशानी को दूर करने के लिए उत्तर प्रदेश के अभय शर्मा और उनकी बहन स्मृतिका शर्मा ने एक अनोखी मशीन बनाई है। इसके साथ उन्होंने एक स्मार्ट स्टिक भी बनाई है, जो फॉरेस्ट गार्ड्स और आम लोगों को बड़े जानवरों के हमले से बचाती है। 👉🏻कौशाम्बी, गाजियाबाद स्थित एग्री-टेक स्टार्टअप, ‘क्यारी’ के अभय और स्मृतिका ने ANIDERS (Animal Intrusion Detection and Repellent System) नाम का एक डिवाइस तैयार किया है। यह डिवाइस सेंसर के जरिए जानवरों की हलचल का पता लगाता है। अगर कोई जानवर इस मशीन के रेंज के आस-पास आने की कोशिश करता है तो इसका अलार्म सिस्टम एक तेज लाइट के साथ बजना शुरू हो जाता है। अलार्म की आवाज और तेज रौशनी से जानवर वापस लौट जाते हैं। 👉🏻साल 2017 में भाई-बहन की इस जोड़ी ने एक छोटी सी सोच के साथ इस मशीन को अपने घर पर बनाया था। लेकिन आज अपने स्टार्टअप के जरिए वे इस मशीन को देश-विदेश में बेच रहे हैं। अभय और स्मृतिका:- 👉🏻द बेटर इंडिया से बात करते हुए पेशे से इंजीनियर अभय कहते हैं, “शुरुआत में हमने हॉबी के तौर पर अपने घर से ही एक प्रोटोटाइप बनाकर गांव के एक किसान को दिया था। जिसका नतीजा काफी अच्छा निकला। केवल पांच महीने बाद ही वन विभाग के स्थानीय अधिकारियों ने हमसे संपर्क किया और मशीनों की मांग की।” 👉🏻हालांकि उन्होंने इसे किसानों को ध्यान में रखकर बनाया था लेकिन वन विभाग वालों ने इस मशीन को अपने जंगल की बॉउंड्री में लगवाया ताकि जानवर जंगल से बहार आ ही ना पाएं। मशीन बनने के पीछे का आईडिया:- 👉🏻साल 2016 में हुई एक घटना से अभय और स्मृतिका को यह मशीन बनाने की प्रेरणा मिली। बचपन से ही इन दोनों को वाइल्डलाइफ और जंगली जानवरों के प्रति विशेष रूचि रही है। अभय कहते हैं, “हम अक्सर जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क जाते रहते थे। हमें जंगल सफारी के साथ जानवरों के बारे में जानकारी लेने का बहुत शौक था। एक बार जिम कॉर्बेट की यात्रा के दौरान हमने उत्तराखंड के क्यारी गांव में एक घायल हाथी को देखा जो इलाज के दौरान मर गया। ज्यादा जानने पर हमें पता चला की यह हाथी किसान के जाल में फंसकर घायल हुआ था।” 👉🏻चूंकि उनका लगाव जानवरों के प्रति ज्यादा था इसलिए उन्होंने इसमें किसान को ही दोषी समझा। लेकिन बाद में जब उन्होंने किसानों की बात सुनी तो अहसास हुआ कि जंगली जानवरों के कारण, हर साल किसानों की फसलें खराब हो जाती हैं। जिससे उन्हें काफी आर्थिक संकट उठाना पड़ता है। 👉🏻घर वापस आकर इनदोनों ने इस समस्या के समाधान के बारे में सोचना शुरू किया। उस समय अभय मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे और उनकी बहन सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद नौकरी कर रही थीं। 👉🏻अभय ने बताया, “हमने समस्या के मूल कारण को समझने की कोशिश की। फसलों को जंगली जानवरों की घुसपैठ से बचाने के लिए हमने ANIDERS(Animal Intrusion Detection and Repellent System) जैसा एक डिवाइस तैयार किया।” 👉🏻उन्होंने बिना ज्यादा पैसे खर्च किए, अपने घर पर इस मशीन को तैयार किया और क्यारी गांव के ही एक किसान को मुफ्त में इस्तेमाल करने को दिया। 👉🏻अभय ने बताया, “इस मशीन के पीछे एक आसान कॉमन सेन्स यह था कि जानवर तभी आते हैं जब उन्हें लगता है कि यहां कोई इंसान नहीं है। वहीं आमतौर पर इंसान जानवरों को भगाने के लिए शोर या रौशनी करते हैं। हमारी यह मशीन अपने सेंसर के माध्यम से इंसानों का काम आसान बनाती है। यह मशीन पूरी तरह से सोलर पावर से चलती है। साथ ही, ऑटोमैटिक मोड में काम करती है। यह एक पोर्टेबल मशीन है, इसलिए जहां ज्यादा जानवरों की हलचल होती है, वहां इसे रखा जा सकता है।” 👉🏻हालांकि, उस एक मशीन को बनाने के बाद भी उन्होंने स्टार्टअप के बारे में नहीं सोचा था। लेकिन मशीन में लगे अलार्म और लाइट काफी सक्षम थे और इसके नतीजे देखकर गांव के वन विभाग ने उन्हें ऐसी और मशीन बनाने का ऑर्डर दिया। अभय ने बताया कि स्टार्टअप की औपचारिक शुरुआत होने से पहले ही वे 300 डिवाइस बना चुके थे। वह घर से ही ऑर्डर्स के हिसाब से मशीन बनाते थे। स्रोत - The Better India, 👉🏻किसान भाइयों ये जानकारी आपको कैसी लगी? हमें कमेंट करके ज़रूर बताएं और लाइक एवं शेयर करें धन्यवाद!
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