ब्रम्हास्त्र है किसानों के लिए जैव कीटनाशक!
कृषि वार्ताAgrostar
ब्रम्हास्त्र है किसानों के लिए जैव कीटनाशक!
👉फसलों में कीट नियंत्रण एवं बढ़वार के लिए ब्रह्मास्त्र और जीवामृत:- रासायनिक कीटनाशकों से मिली रही मुक्ति, गौमूत्र से बने इन रासायनिक कीटनाशकों से मिली मुक्ति, गौमूत्र से बने इन सस्ते उत्पादों से मिल रहा है लाभ फसलों में कीट नियंत्रण एवं बढ़वार के लिए ब्रह्मास्त्र और जीवामृत किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, इस कड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में किसानों से गौमूत्र की खरीदी की जा रही है। सरकार द्वारा खरीदे गए गौमूत्र से फसलों में कीट नियंत्रक और वृद्धि के लिए ब्रह्मास्त्र और जीवामृत उत्पाद तैयार किया जा रहा है, जिससे किसानों को खर्चीले रासायनिक कीटनाशकों से मुक्ति मिल रही है, 👉कम खर्च में ब्रह्मास्त्र से किसान कर रहे हैं फसलों में कीट नियंत्रण:- ब्रह्मास्त्र और जीवामृत उत्पाद का उपयोग करने वाले अकलतरा विकासखंड के ग्राम तिलई निवासी किसान देवराज कुर्मी ने बताया कि उसके पास 5 एकड़ कृषि योग्य कृषि भूमि है जिसमें वह खेती करते है। इस वर्ष में उन्होंने 5 एकड़ में धान फसल लगाई है। उन्होंने बताया कि अपने 3 एकड़ धान फसल में 3 बार 15-15 दिन के अंतराल में कीट नियंत्रण हेतु जैव कीटनाशक ब्रम्हास्त्र का छिड़काव किया है। इससे उन्होंने कीटों पर प्रभावी नियंत्रण पाया है तथा उनके फसल का स्वास्थ्य बहुत अच्छा है। 👉उन्होंने बताया कि पूर्व में रासायनिक कीटनाशक का उपयोग कर प्रति एकड़ 3 से 4 हजार रूपए लगभग खर्च आता था तथा रासायनिक दवाओं का भी दुष्प्रभाव भी होता था। लेकिन अब ब्रम्हास्त्र जैव कीटनाशक गौठानों के माध्यम से 50 रूपए प्रति लीटर खरीदकर कीट नियंत्रक के लिए खर्च भी कम आ रहा है। जिससे रासायनिक दवाओं की अपेक्षा फसल सुरक्षा लागत में बहुत कमी आयी है। 👉ब्रम्हास्त्र जैव कीटनाशक हानि रहित है तथा इसका लंबे समय तक फसल पर प्रभाव बना रहता है एवं रासायनिक दवाओं की अपेक्षा फसल एवं पर्यावरण पर दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ता है तथा स्थानीय तौर पर असानी से उपलब्ध है। इससे फसल सुरक्षा में समय पर प्रभावी नियंत्रण पाने में सफलता मिली है। जीवामृत (वृद्धिवर्धक) से फसलों की हो रही है अच्छी बढ़वार। 👉स्त्रोत:-Agrostar किसान भाइयों ये जानकारी आपको कैसी लगी? हमें कमेंट करके ज़रूर बताएं और लाइक एवं शेयर करें धन्यवा।
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