बाजार तक आसान होती किसानों की पहुंच!
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बाजार तक आसान होती किसानों की पहुंच!
👉आज किसानों को एमएसपी से अधिक कीमत मिल रही है तो इसका श्रेय गत आठ वर्षो में किए गए कृषि सुधारों को जाता है। इसी कारण अब किसानों को उनकी उपज की वाजिब कीमत मिलने लगी है। रमेश कुमार दुबे। जिन किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसल बेचने की गारंटी के लिए साल भर धरना-प्रदर्शन किया, वही आज अपनी उपज सरकारी एजेंसियों को न बेचकर एमएसपी से ऊंची कीमत पर निजी कारोबारियों को बेच रहे हैं। गेहूं ही नहीं सरसों, कपास, चना की बिक्री भी समर्थन मूल्य से अधिक कीमत पर हो रही है। सबसे बड़ी बात यह हुई कि अनाज की बिक्री के लिए पंजीकरण के बावजूद किसान अपनी उपज लेकर सरकारी खरीद केंद्रों पर नहीं जा रहे हैं, 👉रमेश कुमार दुबे। जिन किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसल बेचने की गारंटी के लिए साल भर धरना-प्रदर्शन किया, वही आज अपनी उपज सरकारी एजेंसियों को न बेचकर एमएसपी से ऊंची कीमत पर निजी कारोबारियों को बेच रहे हैं। गेहूं ही नहीं सरसों, कपास, चना की बिक्री भी समर्थन मूल्य से अधिक कीमत पर हो रही है। सबसे बड़ी बात यह हुई कि अनाज की बिक्री के लिए पंजीकरण के बावजूद किसान अपनी उपज लेकर सरकारी खरीद केंद्रों पर नहीं जा रहे हैं, 👉यह खरीद 2021-22 की सरकारी खरीद 433.4 लाख टन से 53 प्रतिशत कम है। सरकार ने 2022-23 के लिए 444 लाख टन खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन निजी कारोबारियों द्वारा 2,500 से 3,000 रुपये प्रति क्विंटल की आक्रामक खरीदारी के कारण किसान समर्थन मूल्य 2,015 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं की बिक्री के लिए उत्साह नहीं दिखा रहे। जिन राज्यों में सरकारी खरीद का व्यवस्थित नेटवर्क नहीं है, वहां भी निजी एजेंसियां एमएसपी से ऊंची कीमत देकर गेहूं की खरीद कर रही हैं। यह भविष्य के लिए एक सुखद संकेत है। 👉विश्व के गेहूं कारोबार में 29 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले रूस-यूक्रेन के युद्धरत होने के चलते दुनिया में गेहूं की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इससे विश्व में गेहूं की कीमतें बढ़ रही हैं। इसी कारण भारत सरकार ने गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध लगाया। भविष्य में गेहूं की ऊंची कीमत मिलने की उम्मीद में भी बहुत से किसान उपज नहीं बेच रहे हैं। आज किसानों को एमएसपी से अधिक कीमत मिल रही है तो इसका श्रेय आठ वर्षो में मोदी सरकार द्वारा किए गए विपणन सुधारों को जाता है। 👉देश में अब तक जितना ध्यान उत्पादन पर दिया गया, उतना उपज के भंडारण-विपणन पर नहीं। यही कारण है कि किसानों को उनकी उपज की उचित कीमत नहीं मिल पा रही थी। मोदी सरकार चुनिंदा फसलों के बजाय विविधीकृत फसलों के उत्पादन के साथ-साथ उनके भंडारण, प्रसंस्करण, विपणन का देशव्यापी व्यवस्थित नेटवर्क बना रही है। इसी कारण अब किसानों को उनकी उपज की वाजिब कीमत मिलने लगी है। स्रोत:- Agrostar 👉किसान भाइयों ये जानकारी आपको कैसी लगी? हमें कमेंट करके ज़रूर बताएं और लाइक एवं शेयर करें धन्यवाद!"
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