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बांस की खेती से होगी मोटी कमाई, सरकार भी करती है मदद !
👉 किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए मोदी सरकार कई तरह की योजनाएं चला रही है. इन्‍हीं योजनाओं में से एक राष्‍ट्रीय बांस मिशन एक है. इस मिशन के तहत बांस की खेती करने पर किसानों की मोटी कमाई हो सकती है. बांस की खेती को बढ़ावा देने और किसानों की मदद के लिए केंद्र सरकार प्रति पौधा 120 रुपये भी देती है. बांस की सही किस्म चुननी जरूरी:- 👉 बांस की लगभग 136 प्रजातियां होती हैं, जिसमें विभ‍िन्‍न तरह के काम के लिए बांस का उपयोग किया जाता है. आमतौर पर बांस के 10 किस्‍मों का उपयोग सबसे ज्‍यादा होता है. खेती शुरू करने से पहले आपको यह चुनाव करना होगा कि आप किस किस्‍म के बांस की खेती करना चाहते हैं. मान लीजिए कि आप फर्नीचर के लिए बांस की खेती कर रहे हैं, तो इससे संबंधित प्रजाति का चुनाव करें. बांस की खेती कितने साल में तैयार होती है? 👉 सामान्‍य तौर पर बांस की खेती 3 से 4 साल में तैयार हो जाती है. चौथे साल से इसकी कटाई शुरू कर देनी चाहिए. खेती के दौरान दो बांस के पौधों में 3 से 4 मीटर की दूरी होनी चाहिए. अगर आप चाहें तो इसके बीच दूसरी फसलों की खेती भी कर सकते हैं. बांस की पत्तियों को पशुओं के लिए चारे के रूप में भी इस्‍तेमाल किया जा सकता है. बांस की खेती करने से पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है. 👉 आज के आधुनिक ज़माने में भी बांस के बने फर्नीचर की बहुत मांग है. यही कारण है कि इसकी खेती करने वाले किसानों को अच्‍छा मुनाफा होता है. जरूरत और प्रजाति के हिसाब से किसान एक हेक्‍टेयर जमीन में 1,500 से 2,500 पौधे लगा सकता है. बांस के कल्‍ले सबसे पहले बिक्री के लिए तैयार होते हैं. सरकार कैसे करती है बांस की खेती के लिए मदद? 👉 बांस के खेती के लिए 3 साल में प्रति पौधा औसतन 240 रुपये का खर्च आता है. इसमें से भी प्रति पौधे पर 120 रुपये की सरकारी सहायता दी जाएगी. बांस की खेती पर होने वाले खर्च का 50 फीसदी सरकार और 50 फीसदी किसान वहन करता है. सरकारी वहन में केंद्र सरकार की हिस्‍सेदारी 60 फीसदी और राज्‍य सरकार की 40 फीसदी होती है. आप इसे बारे में पूरी जानकारी अपने ज़िले पर या नोडल अधिकारी से ले सकते हैं. स्रोत:- TV 9 Hindi, 👉 प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक 👍 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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