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बड़ी खबर: 5.5 करोड़ अन्नदाताओं का डाटाबेस तैयार, जानिए क्या होगा फायदा?
👉कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक (Digital Technology) का फायदा उठाने के लिए केंद्र सरकार ने काम शुरू कर दिया है. कृषि मंत्रालय ने 5.5 करोड़ किसानों से संबंधित डाटा तैयार कर लिया है. राज्यों के सहयोग से दिसंबर-2021 तक आठ करोड़ से अधिक किसानों का डाटाबेस (Farmers Database) बन जाएगा, जो कृषि व किसानों की प्रगति के लिए राज्यों, केंद्रीय विभागों व विभिन्न संस्थाओं को उपलब्ध कराया जाएगा. इस बारे में सोमवार को कृषि मंत्रालय ने मुख्यमंत्रियों व कृषि मंत्रियों के साथ बैठक की। 👉मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि कुछ समय बाद प्रत्येक किसान की एक विशिष्ट डिजिटल पहचान (Farmers ID) होगी, जिसमें व्यक्तिगत विवरण, उनके द्वारा खेती की जाने वाली भूमि की जानकारी, उत्पादन और योजनाओं के लाभ आदि की जानकारी होगी. पीएम किसान स्कीम के जरिए सरकार के पास 11 करोड़ किसानों का डाटा एकत्र हो चुका है. जिसमें उनकी खेती योग्य जमीन, आधार कार्ड (Aadhaar card), बैंक अकाउंट नंबर और मोबाइल नंबर शामिल हैं. डाटाबेस तैयार होने से किसानों के लिए योजनाओं का लाभ लेना आसान हो जाएगा। खेती को लाभकारी बनाना है मकसद:- 👉फिलहाल, मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि भारतीय कृषि को वैश्विक मानदंडों के अनुरूप बनाने के साथ ही किसानों के लिए लाभकारी बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार इस क्षेत्र को आधुनिक बना रही है. आत्मनिर्भर भारत के लिए कृषि को आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है. कृषि क्षेत्र सबके लिए महत्व का है. यह सरकार की प्राथमिकता में शामिल है. कृषि क्षेत्र मजबूत होगा तो देश मजबूत होगा, रोजगार के साधन बढ़ेंगे. बैठक में खाद्य व उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद रहे। कृषि को तकनीक से जोड़ने की जरूरत:- 👉तोमर ने कहा कि आज कृषि को अधिकाधिक ज्ञान-विज्ञान व तकनीक से जोड़ने की आवश्यकता है. इस दिशा में सरकार डिजिटल एग्रीकल्चर का कांसेप्ट लाई है. इसके माध्यम से पारदर्शिता आ रही है, जिसका उदाहरण प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-kisan) स्कीम है. जिसके तहत अभी तक 11.37 करोड़ किसानों को 1.58 लाख करोड़ रुपये सीधे उनके बैंक खातों में (DBT) जमा कराए गए हैं। किसानों को इस तरह मिलेगा फायदा:- 👉डिजिटल तकनीक के फायदे को देखते हुए सरकार ने इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने का फैसला लिया है. राज्यों के सहयोग से अन्य योजनाएं भी इसमें शामिल की जाएंगी. इस डाटाबेस से सरकार को मूल्यांकन व आकलन में सुविधा होगी. पीएम-किसान का डाटा किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card) के डाटा से लिंक करने के फलस्वरूप कोविड-काल में 2.37 करोड़ से अधिक किसानों को बैंकों से केसीसी का लाभ मिला है. किसानों को इससे 2.44 लाख करोड़ रुपये का कृषि कर्ज मिला है. तोमर ने कर्नाटक के क्रॉप सर्वे प्रोजेक्ट का उदाहरण देकर अन्य राज्यों से इसे अपनाने का आग्रह किया। खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर बनेगा भारत:- 👉कृषि मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लिए कृषि को आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है. इसके लिए दलहन व तिलहन का रकबा व उत्पादन बढ़ाने पर सरकार का पूरा ध्यान है. प्रधानमंत्री ने आयल पाम के लिए 11 हजार करोड़ रुपये के राष्ट्रीय मिशन की घोषणा इसी उद्देश्य से की है. पाम आयल से प्रति हेक्टेयर अन्य तेलों की तुलना में चार गुना से अधिक उत्पादन होता है. देश में 29 लाख हेक्टेयर आयल पाम क्षेत्र में आयल पाम की संभावना है. यह प्रयास न सिर्फ खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता बढ़ाएगा, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि करेगा। स्रोत:- TV 9 Hindi, 👉 प्रिय किसान भाइयों दी गई उपयोगी जानकारी को लाइक 👍 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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