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फसलों में थिनिंग का महत्व!
कृषि वार्ताAgrostar
फसलों में थिनिंग का महत्व!
🌱पेड़ों पर अधिक फल लगने से इसकी थिनिंग करनी होती है. इसके लिए आप भौतिक और रासायनिक प्रक्रिया का पालन कर सकते हैं. फलों की थिनिंग का मतलब वृक्ष पर फलों की संख्या को कम करने से होता है. इसका उद्देश्य पौधे पर फलों के अत्यधिक दबाव को कम करना होता है. अगर इस काम को सही समय पर नहीं किया जाता है तो इससे पेड़ का विकास रुक जाता है और फलों का आकार भी छोटा होने लगता है. 🌱थिनिंग करने की विधि 1-भौतिक तरीका इस प्रक्रिया में आप कुछ फलों को अपने हाथों से तोड़ सकते हैं. इसके अलावा शाखाओं को जोर से हिलाकर कमजोर फलों को थिनिंग करना शुरू कर सकते हैं. अगर अभी भी पेड़ों में अतिरिक्त फल हैं तो शाखाओं को ऊपर से नीचे तक पतला किया जा सकता है. किसान भाई फल को निकालने के लिए उसके डंठल को किसी औजार या हाथ की मदद से तोड़ सकते हैं.इस थिनिंग के दौरान आप सभी छोटे, कम आकार के फलों के साथ-साथ कीट या बीमारी से ग्रसित फलों को भी हटा सकते हैं. इस थिनिंग प्रक्रिया में किसानों को थोड़ा प्रशिक्षण की जरुरत होती है, ताकि वह काम को अधिक कुशलतापूर्वक नियोजित तरीके से कर सकें. 2-रासायनिक तरीका इस थिनिंग प्रक्रिया में किसान भाई एथेफॉन, नेफ़थलीन एसिटिक एसिड का उपयोग कर विभिन्न प्रकार के फलों की थिनिंग कर सकते हैं. इन रसायनों का उपयोग फलों के शुरुआत के खिलने की अवस्था में किया जाता है. रसायन का उपयोग की मात्रा और समय को कृषि विशेषज्ञ से सलाह पर ही छिड़काव किया जा सकता है. 🌱किन फलों में करें थिनिंग थिनिंग की प्रक्रिया ज्यादातर गुच्छेदार फलों में की जाती है, जिनमें अंगूर, चेरी और बेर जैसे फल आते हैं. 🌱थिनिंग से लाभ *एक बेहतर आकार मिलता है *यह दिखने में काफी सुंदर लगते हैं. *बाजार में ऐसे फलों की मांग बहुत ज्यादा होती है. *किसान भाई काफी बेहतर कमाई कर सकते हैं. 🌱स्रोत:-Agrostar किसान भाइयों ये जानकारी आपको कैसी लगी? हमें कमेंट करके ज़रूर बताएं और लाइक एवं शेयर करें धन्यवाद!
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