कृषि वार्ताजागरण
पोषक तत्वों वाली फसल की खरीद गारंटी देगी सरकार!
👉पोषक तत्वों से भरपूर अनाज के उत्पादन से किसानों की आमदनी बढ़ाने पर विचार करने के लिए अंतर मंत्रालयी समिति का गठन किया गया है, जो इसकी खेती को बढ़ावा देने के लिए मदद करेगी। इसी दिशा में अ¨सचित क्षेत्रों में ऐसी फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। पोषक तत्वों वाली फसलों की उपज की खरीद की गारंटी भी दी जाएगी, ताकि किसानों को उपज की बिक्री में कोई मुश्किल पेश न आए। कुपोषण की चुनौती से निपटने के लिए यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है। इसके तीन प्रमुख अवयव शामिल किए गए हैं, जिनमें न्यूट्री गार्डन, न्यूट्री थाली और बायो-फोर्टिफाइ बीजों का वितरण शामिल किया गया है। 👉अंतर मंत्रालयी समिति में कृषि, महिला व बाल विकास, उर्वरक, कपड़ा और ग्रामीण विकास मंत्रालयों के अधिकारी शामिल हैं। देशभर में कुल 15 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं, जिन्हें होम गार्डन में न्यूट्रीशन यानी पोषण आधारित सब्जियों की खेती के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। होम गार्डन में उगाई जाने वाली मौसमी सब्जियों में सर्वाधिक पोषक तत्व पाए जाते हैं। इन्हें बच्चों व गर्भवती महिलाओं के भोजन में शामिल किए जाने से उन्हें पोषक तत्वों की कमी नहीं होगी। इसी तरह देश के 3.5 लाख कामन सर्विस सेंटर के साथ इंडियन काउंसिल आफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (आइसीएआर) का समझौता किया गया है। यह गठजोड़ किसानों को उनकी सेहत का ध्यान रखने के लिए टेली मेडिसिन सुविधा दिलाने में मदद करेगा। 👉कुपोषण प्रभावित क्षेत्रों में पोषक तत्वों वाले खाद्यान्न की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए आसीएआर ने आगे बढ़कर काम करना शुरू कर दिया है। डिप्टी डायरेक्टर जनरल (एक्सटेंसन) डा. एके ¨सह ने बताया कि किसानों को पोषक तत्वों वाली फसलों के उत्पादन के लिए बेहतर बीज, टेक्नोलॉजी व बाजार में उपज बेचने की पूरी गारंटी के साथ हर तरह की तरह की मदद दी जाती है। इसके लिए देशभर में 700 से अधिक कृषि विज्ञान केंद्र अहम भूमिका निभा रहे हैं। किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि क्षेत्र में युवाओं को आकर्षित करने के लिए आइसीएआर आर्या नाम की योजना चला रहा है। 👉इसके तहत 400 से अधिक इकाइयां स्थापित की गई है, जिससे किसानों को हर महीने 12,000-14,000 रुपये की मासिक आमदनी होने लगी है। इसी तरह फार्मर फ‌र्स्ट योजना में क्लस्टर बनाकर खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है।इसमें 2500 गांवों को शामिल किया गया है, जिसके 50 हजार से अधिक किसान परिवारों को सीधा फायदा पहुंच रहा है। इसका संचालन आइसीएआर के शोध संस्थान और कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक कर रहे हैं। इन क्लस्टरों में संबंधित फसलों के वैज्ञानिकों को दायित्व सौंपा गया है। इसमें आमतौर पर पोषक तत्वों वाली फसलें ज्यादा लगाई जाती हैं। डॉक्टर ¨सह का दावा है कि इससे इन गांवों के किसानों की आमदनी में डेढ़ से दोगुना की वृद्धि हो चुकी है। स्रोत:- Jagran, 👉 प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक 👍 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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