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पॉलीहाउस में खेती करना हुआ आसान, वैज्ञानिकों ने विकसित की नई पॉलीहाउस तकनीक!
नई पॉलीहाउस तकनीक:- 👉🏻किसानों को अत्यधिक या अपर्याप्त ठंड, गर्मी, बारिश, हवा, और अपर्याप्त वाष्पोत्सर्जन एवं कीट रोगों के चलते फसल का काफी नुकसान उठाना पड़ता है | इसके आलवा खुले वातावरण में किसान सभी तरह की फसलों की खेती नहीं कर सकते हैं | इससे बचाव के लिए पॉलीहाउस में किसी भी मौसम में बाजार की मांग के अनुसार खेती की जा सकती हैं | जिससे फसलों के अच्छे दाम मिलते हैं और अधिक मुनाफा होता है | परन्तु पारंपरिक पॉलीहाउस में कई कमियां हैं जिन्हें दूर करने के लिए नए तरह के पालीहाउस तकनीक को विकसित किया गया है | 👉🏻वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद-केंद्रीय यांत्रिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीएमईआरआई), दुर्गापुर के निदेशक डॉ. (प्रो.) हरीश हिरानी ने पंजाब के लुधियाना में “नेचुरली वेंटिलेटेड पॉलीहाउस फैसिलिटी” का उद्घाटन किया और “रिट्रैक्टेबल रूफ पॉलीहाउस” की आधारशिला रखी। अभी के पारंपरिक पालीहाउस में क्या है कमियाँ:- 👉🏻प्रोफेसर हिरानी ने प्रौद्योगिकी के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि किसानों को अत्यधिक या अपर्याप्त ठंड, गर्मी, बारिश, हवा, और अपर्याप्त वाष्पोत्सर्जन से जुड़े अन्य कारकों जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, और साथ ही भारत में कीटों के कारण भी वर्तमान में लगभग 15 प्रतिशत फसल का नुकसान होता है तथा यह नुकसान बढ़ सकता है क्योंकि जलवायु परिवर्तन कीटों के खिलाफ पौधों की रक्षा प्रणाली को कम करता है। पारंपरिक पॉलीहाउस से कुछ हद तक इन समस्याओं को दूर किया जा सकता है। 👉🏻पारंपरिक पॉलीहाउस में मौसम की विसंगतियों और कीटों के प्रभाव को कम करने के लिए एक स्थिर छत होती है। छत को ढंकने के अब भी नुकसान हैं जो कभी-कभी अत्यधिक गर्मी और अपर्याप्त प्रकाश का कारण बनते हैं। इसके अलावा, वे कार्बन डाईऑक्साइड, वाष्पोत्सर्जन और जल तनाव के अपर्याप्त स्तर के लिहाज से भी संदेवनशील होते हैं। खुले क्षेत्र की स्थितियों और पारंपरिक पॉलीहाउस स्थितियों का संयोजन भविष्य में जलवायु परिवर्तन और उससे जुड़ी समस्याओं से निपटने के लिहाज से एक ज्यादा बेहतर तरीका है। क्या है रिट्रैक्टेबल रूफ पॉलीहाउस टेक्नोलॉजी:- 👉🏻केंद्रीय यांत्रिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएमईआरआई) एक्सटेंशन सेंटर लुधियाना में एक “रिट्रैक्टेबल रूफ पॉलीहाउस टेक्नोलॉजी” स्थापित कर रहा है। हर मौसम में काम करने के लिहाज से उपयुक्त इस प्रतिष्ठान में ऑटोमैटिक रिट्रैक्टेबल रूफ (स्वचालित रूप से खुलने-बंद होने वाली छत) होगी जो पीएलसी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हुए कंडीशनल डेटाबेस से मौसम की स्थिति और फसल की जरूरतों के आधार पर संचालित होगी। इस प्रौद्योगिकी से किसानों को मौसमी और गैर-मौसम वाली दोनों ही तरह की फसलों की खेती करने में मदद मिलेगी। यह पारंपरिक खुले मैदानी सुरंगों और प्राकृतिक रूप से हवादार पॉली हाउस की तुलना में इष्टतम इनडोर सूक्ष्म जलवायु परिस्थितियों का निर्माण करके उच्च उपज, मजबूत और उच्च शेल्फ-लाइफ उपज प्राप्त कर सकता है, और साथ ही यह जैविक खेती के लिए व्यवहार्य प्रौद्योगिकी भी है। स्रोत:- Kisan Samadhan, 👉🏻प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। यदि दी गई जानकारी आपको उपयोगी लगी, तो इसे लाइक 👍 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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