सफलता की कहानीकृषि जागरण
पपीते की खेती कर किसानों को कम लागत में मिल रहा अधिक मुनाफा!
👉किसान परंपरागत तरीके खेती से हटकर ताइवान किस्म का पपीता उगा रहे हैं, जो अब फल भी देने लगा है. इसकी खेती से अधिक उत्पादन के आसार को देखते हुए युवा किसान खासा उत्साहित हैं. ऐसे में किसान कोलकाता से पौधा मांगा रहे हैं और वैज्ञानिक तरीके से पपीते की रेड लेडी ताइवान-786 किस्म की खेती कर रहे हैं. टीटीसी की तैयारी कर रहे किसान ने शुरू की खती- 👉बहेराटोली के युवा किसान उज्ज्वल लकड़ा रांची में रहकर टीटीसी की तैयारी कर रहे थे. इस दौरान कोरोना महामारी का संकट आ गया, जिसकी वजह से परीक्षा नहीं हुई. इसके बाद वह अपने गांव लौट आए और फिर परिवार के किसी सदस्य ने पपीता की खेती करने की सलाह दी! 👉पहले साल 2018-19 में मनरेगा के तहत एक एकड़ में आम बागवानी की मिली, साथ ही सिंचाई के लिए कुआं बनाया. मगर इसके बाद कृषि विज्ञान केंद्र, रांची के मार्गदर्शन से पपीता की खेती करने का विचार किया! एक एकड़ में लगाए पपीते के 6000 पौधा- 👉मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो बहेराटोली के युवा किसान उज्ज्वल लकड़ा ने अपनी एक एकड़ जमीन में ताइवान किस्म के 6000 पौधे लगाए हैं. यह पौध लगभग अक्टूबर में तैयार हो जाएगी. जानकारों के मुताबिक, किसान ताइवानी किस्म के पपीते की खेती से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं! 8 महीने में तैयार होती है फसल- 👉आपको बता दें कि पपीता के पौधे की ऊंचाई 2 से 3 फीट तक होती है, जो 3 महीने बाद फसल देने लगता है और पूरे 8 महीने बाद फसल तैयार हो जाती है. पपीते का एक पेड़ डेढ़ साल तक फसल देता है, जिसमें लगभग ढाई से तीन क्विंटल पपीता का फल निकलता है! सिंचाई के लिए अपनाई टपक विधि- 👉किसान ने सिंचाई के लिए टपक विधि को अपनाया. बता दें कि वह कोलकाता से 60 रुपए में एक पौधा लाया था. इस तरह 36 हजार का पौधा लगाया था, जिसमें 120 पौधा मर गया. इसके अलावा, खाद व सिंचाई में लगभग 25 से 30 हजार रुपए की लागत लगी. मगर मौजूदा समय में जो पौधा लगा है, उसमें काफी मात्रा में फल लगे हैं! स्त्रोत:- कृषि जागरण 👉 प्रिय किसान भाइयों दी गई उपयोगी जानकारी को लाइक 👍 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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