कृषि वार्ताTV9
नैनो यूरिया उत्पादन के लिए IFFCO और नेशनल फर्टिलाइजर्स हुए एक !
🌱नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL) और राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स ने लिक्विड नैनो यूरिया के उत्पादन के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को लेकर सहकारी समिति इफको के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं! 👉🏻 एनएफएल और राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स (आरसीएफ) ने तरल नैनो यूरिया की प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण के लिए इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (IFFCO) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए! 👉🏻समझौते के तहत इफको बिना किसी रॉयल्टी के एनएफएल और आरसीएफ के तरल नैनो यूरिया की प्रौद्योगिकी हस्तातंरित करेगी. रसायन और उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया और रसायन और उर्वरक राज्यमंत्री भगवंत खुबा की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन और अन्य संबंधित समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए! 👉🏻बयान के अनुसार, इफको किसानों के बीच नैनो यूरिया का उपयोग बढ़ाने के लिए इन समझौता ज्ञापनों के माध्यम से सार्वजनिक क्षेत्र की उर्वरक कंपनियों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण करेगी. प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से उत्पादन बढ़ेगा जिससे आपूर्ति में निरंतरता सुनिश्चित होगा और अधिक-से-अधिक किसान इसे अपनाएंगे. इससे किसानों के साथ-साथ सरकार के लिये सब्सिडी की बचत होगी! नैनो यूरिया आपूर्ति बढ़ाने के लिए लगाई जाएंगी नई मशीनें- 👉🏻एनएफएल और आरसीएफ किसानों को नैनो यूरिया आपूर्ति बढ़ाने के लिये नये उत्पादन संयंत्र लगाएंगे. मंडाविया ने कहा कि समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर देश के किसानों के हितों को ध्यान देने और देश को उर्वरक में आत्मनिर्भर बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दरसाता है! 👉🏻उन्होंने कहा, ‘‘इफको द्वारा बनाए गए नैनो यूरिया में देश में कृषि के लिए पासा पलटने वाला साबित होने की क्षमता है. भारत नैनो यूरिया का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करने वाला विश्व का पहला देश बन गया है.’’! भारत में हुई है नैना यूरिया लिक्विड की शुरुआत- 👉🏻नैनो यूरिया तरल की शुरुआत दुनिया में सबसे पहले भारत में हुई है. वो भी एक सहकारी संस्थान के जरिए. नैनो फर्टिलाइजर को इफको-नैनो बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर कलोल, गुजरात में तैयार किया गया है. इसके पास पेटेंट भी है. पर्यावरण सुरक्षा, कृषि लागत में कमी और किसानों की आय में वृद्धि के मकसद से इसकी शुरुआत की गई है! 👉🏻इसके 500 एमएल की एक बोतल में 40,000 पीपीएम नाइट्रोजन होता है, जो सामान्य यूरिया के एक बैग के बराबर नाइट्रोजन पोषक तत्व प्रदान करेगा. कीमत सिर्फ 240 रुपये है, यानी पारंपरिक यूरिया से 10 फीसदी कम. इसे 100 लीटर पानी में घोलकर पौधों में स्प्रे करना होगा! नैनो यूरिया की खासियत- -यूरिया की जरूरत 50 फीसदी तक कम करेगा! -पर्यावरण अनुकूल उत्पाद है. मिट्टी, हवा और पानी के प्रदूषण को रोकने में सहायक है! -नैनो यूरिया में नाइट्रोजन के नैनो आकार के कण होते हैं! -इन कणों का औसत भौतिक आकार 20-50 नैनोमीटर की सीमा में है! इस्तेमाल से बढ़ जाती है उपज- 👉🏻इसकी प्रभावशीलता की जांच 94 फसलों और लगभग 11,000 खेतों में की गई है. उपज में औसतन 8 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है. इसलिए कई देश भारतीय कृषि की इस खोज का फायदा लेना चाहते हैं. इफको अधिकारियों के मुताबिक सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद भारतीय सहकारिता की धाक पूरी दुनिया में और मजबूत होगी. गुजरात के अमूल दुग्ध उत्पादन ने सहकारी क्षेत्र पर अपनी धाक जमा ही रखी है! स्त्रोत:- TV9 👉🏻प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। यदि दी गई जानकारी आपको उपयोगी लगी, तो इसे लाइक 👍 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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