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धान के पत्ते के हॉपर्स का प्रबंधन
धान के पत्ते के हॉपर्स का प्रबंधन हरे, भूरे और सफेद बैकड प्लांट हापर धान की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। निम्फ़ और वयस्क दोनों पौधे की सेल के सैप को चूसते हैं। आक्रमण से पौधे पीले या भूरे और सूख जाते हैं। भारी संक्रमण पर ज्वलन प्रभाव देखा जाता है जिसे "हापर बर्न" के नाम से जाना जाता है। क्षेत्र में चक्करदार तरीके से संक्रमण बढ़ रहा है और दिखायी गयी झुलसी फसलों को "हापर बर्न" का नाम दिया गया है। संक्रमण वाले पौधों में, अनाज पुष्प-गुच्छ में अपरिपक्व रूप में रहता है और इसलिए उत्पादन कम हो जाता है। एक सप्ताह के अंदर, संक्रमण पूरे खेत में फैल जाता है।
प्रबंधन: o तीन भागों में अनुशंसित नाइट्रोजेनस उर्वरकों का इस्तेमाल करें। o कीट की शुरुआत में पानी निकाल दें। o नियमित रूप से निगरानी करें क्योंकि शुरुआती संक्रमण में कुछ धब्बे दिखते हैं। केवल उन स्थानों पर कीटनाशक डालें और खर्च घटाएं। o ज़मीन में कारबोफुरॉन 3जी या फिप्रोनिल 0.3 जीआर @ 20-25 किलोग्राम या फोरेट 10 G @ 10 किलोग्राम या क्लोरनट्रानिलिप्रोल 0.5% + थायामेथॉक्सैम 1% जीआर 6 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर डालें। o बाद की स्थिति में, यदि दानेदार कीटनाशकों का इस्तेमाल संभव नहीं है तो ऐसीफेट 75 एसपी 10 ग्राम या इमिडेक्लोप्रिड 17.8 एसएल 3 मिली या क्लोथियानिडीन 50 डब्लूजी 5 ग्राम या बुप्रोफेज़ीन 25 एससी 20 मिली या फिपनोरिल 5 एससी 20 मिली या डिनोटोफुरान 20 एसजी 4 ग्राम या फेनोबुकार्ब 50 ईसी 20 मिली या थायामेथॉक्सेम 25 डब्लूजी 2 ग्राम या लाम्बडा सिहैलोथ्रिन 2.5 ईसी 10 मिली प्रति 10 लीटर पानी में डालकर स्प्रे करें। o इन कीटनाशकों के इस्तेमाल से, स्टेम बोरर और लीफ फ़ोल्डर भी नियंत्रित किया जाता है। डॉ. टी.एम. भरपोडा, एंटोमोलॉजी के पूर्व प्रोफेसर, बी ए कालेज ऑफ एग्रीकल्चर, आनंद कृषि विश्वविद्यालय, आनंद- 388 110 (गुजरात भारत)
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