सलाहकार लेखएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस,
धान की फसल में खाद एवं उर्वरक प्रबंधन!
👉अधिक पैदावार के लिए धान की फसल में उर्वरकों का प्रयोग मिट्टी परीक्षण के आधार पर करना चाहिए। सही समय पर और सही मात्रा में खाद और उर्वरक के प्रयोग से उच्च गुणवत्ता की फसल प्राप्त होती है। धान की फसल के लिए उर्वरक के प्रयोग की जानकारी यहां से देखें। जल्द पकने वाली किस्मों के लिए उर्वरक:- 👉प्रति एकड़ जमीन में करीब 24 किलोग्राम नत्रजन 24 किलोग्राम फॉस्फोरस और 24 किलोग्राम पोटाश को खेत तैयार करते समय मिलाएं। 👉रोपाई के बाद कल्ले निकलते समय 24 किलोग्राम नत्रजन का छिड़काव करें। मध्यम और देर से पकने वाली किस्मों के लिए उर्वरक:- 👉प्रति एकड़ जमीन में करीब 30 किलोग्राम नत्रजन 24 किलोग्राम फॉस्फोरस और 24 किलोग्राम पोटाश को खेत तैयार करते समय मिलाएं। 👉रोपाई के बाद कल्ले निकलते समय 30 किलोग्राम नत्रजन का छिड़काव करें। सुगंधित एवं बौनी किस्मों के लिए उर्वरक:- 👉देर से पकने वाली किस्मों में प्रति एकड़ खेत में 48 किलोग्राम नत्रजन, 24 किलोग्राम फॉस्फोरस और 24 किलोग्राम पोटाश का छिड़काव करें। 👉वहीं जल्द और मध्यम पकने वाली किस्मों में प्रति एकड़ भूमि में 48 किलोग्राम नत्रजन, 12 किलोग्राम फॉस्फोरस और 12 किलोग्राम पोटाश का छिड़काव करें। धान की सीधी बुवाई के लिए उर्वरक:- 👉यदि आप धान की सीधी बुवाई कर रहे हैं तो प्रति एकड़ जमीन में 40 से 48 किलोग्राम नत्रजन का इस्तेमाल करना चाहिए। 👉कुल नत्रजन को 4 भाग में कर लें। एक भाग जुताई करते समय खेत में मिला देना चाहिए। 👉बचे हुए नत्रजन का 2 भाग कल्ले निकलते समय डालें। 👉आखिरी भाग का छिड़काव धान की बालियां बनते समय करें। 👉इसके अलावा 20 किलोग्राम फॉस्फोरस और 20 किलोग्राम पोटाश का भी इस्तेमाल करना चाहिए। स्रोत:- एग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, 👉प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक 👍🏻 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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