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तीन हजार रुपए क्विंटल तक पहुंच गए भूसे के भाव!
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तीन हजार रुपए क्विंटल तक पहुंच गए भूसे के भाव!
👉🏻किसान खेतों में गेहूं के डंठल नहीं जला रहे हैं. पशुओं के चारे की कमी और भूसे की बढ़ती कीमतों को देखते हुए किसानों (किसानों) फसल अवशेषों को जलाने से बचना। यही कारण है कि डंठल जलाने की घटनाओं में कमी आई है। किसान अब इसे जलाने के बजाय बेचकर अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं। इस मौसम में पुआल (चारा) 30 से 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और 2500 रुपये से 3000 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में बिक रही है। 👉🏻कंबाइन हार्वेस्टर से गेहूं की कटाई के कारण डंठल खेतों में ही रह जाते हैं। कंबाइन फसल को ऊंचाई से काटता है। किसान खेत तैयार करने से पहले बचे हुए डंठलों को जला देते थे, लेकिन इस बार ऐसा होता नहीं दिख रहा है. पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) के आंकड़ों से भी इसकी पुष्टि होती है। पंजाब में गेहूं के डंठल की ऊंची कीमतों के कारण कटाई के बाद केवल 67 खेतों में आग लगी है। डंठल जलाने की घटनाओं में आई कमी:- 👉🏻2019 में पंजाब में 8,921 खेत में आग लगने की घटनाएं हुईं, जबकि 2020 में यह संख्या बढ़कर 11,014 हो गई। 2021 में इसमें थोड़ी कमी आई और यह आंकड़ा 9,806 रहा। पीपीसीबी के अधिकारियों ने बताया कि डंठल जलाने की घटनाएं भी हुई हैं, लेकिन उन्हें एक छोटे से इलाके में दर्ज किया गया है. अधिकारी ने बताया कि पशुओं के चारे की कमी और डंठल की मांग को देखते हुए किसान बेचने पर जोर दे रहे हैं. भूसा बेचकर अतिरिक्त कमाई कर रहे किसान:- 👉🏻75 वर्षीय किसान जसबीर सिंह के अनुसार गेहूं का भूसा मवेशियों के लिए एक महत्वपूर्ण चारा है, जो गेहूं के ठंडे से बनाया जाता है। पिछले सीजन में पुआल 1100-1500 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा था, जो अब 2800 रुपये से 3,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिक रहा है। 👉🏻एक अन्य किसान ने बताया कि एक एकड़ खेत में करीब दो क्विंटल पुआल होता है। कंबाइन से कटाई के बाद हम डंठल जलाते थे। इससे हमें कुछ नहीं मिला। इसके विपरीत, पर्यावरण और खेत की उर्वरक शक्ति पर प्रभाव पड़ा। बढ़े हुए दाम को देखते हुए किसानों ने इसे बेचने का फैसला किया है। यहां से राजस्थान का पुआल जा रहा है और किसानों को अच्छी आमदनी हो रही है। स्रोत :- AgroStar 👉🏻किसान भाइयों ये जानकारी आपको कैसी लगी? हमें कमेंट करके ज़रूर बताएं और लाइक एवं शेयर करें धन्यवाद!
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