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ड्रैगन फ्रूट की खेती!
👉 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने पिछले साल मन की बात कार्यक्रम (Mann Ki Baat) में ड्रैगन फ्रूट की खेती करने वाले किसानों को बधाई दी थी. उन्होंने इसे किसानों की आमदनी बढ़ाने का एक बढ़िया जरिया बताया था. उसी समय कमल के फूल की तरह दिखने वाले इस फल को ‘कमलम’ नाम दिया गया था. मूलत: दक्षिण अमेरिका से आए इस फल की खेती देश में महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, कर्नाटक के अलावा उत्तर भारत के भी कई राज्यों में होने लगी है! 👉 उत्तर प्रदेश में एक जिला है, शाहजहांपुर. यहां एक सरकारी हाई स्कूल में विज्ञान के शिक्षक हैं- आदित्य मिश्रा. वे 1997 से ही सरकारी सेवा में है. लेकिन इसके साथ ही वे मूलत: किसान हैं. पिछले चार साल से 5 एकड़ खेत में वे ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं. उन्होंने इसके 20,000 पौधे लगाए हैं. ड्रैगन फ्रूट की खेती को लेकर हमने उनसे विस्तार से बात की! इंटरनेट देखकर आइडिया आया, सोलापुर से पेड़ लाए- 👉 आदित्य मिश्रा ने बताया कि मोबाइल पर इंटरनेट के जरिये वे खेती को लेकर काफी कुछ एक्सप्लोर करते रहते थे. इसी दौरान इंटरनेट पर उन्होंने ड्रैगन फ्रूट की खेती के बारे में देखा. ड्रैगन फ्रूट को देखना तो दूर, शाहजहांपुर के किसानों ने इसका नाम तक नहीं सुना था. शाहजहांपुर में कोई इस फल के बारे में नहीं जानता था! 👉 आगे वे बताते हैं कि महाराष्ट्र के सोलापुर में इसकी खेती के बारे में उन्हें पता चला. वर्ष 2018 में वे सोलापुर गए और वहां से 1600 पौधे लेकर आए. अपने खेत में उन्होंने 1600 पेड़ लगाए और फिर कलम कर के पौधे से पौधे तैयार किए. अब उनके पास ड्रैगन फ्रूट के करीब 20 हजार पौधे हैं. सोलापुर से उन्‍होंने 2018 में 50 रुपये की दर से पौधे लाए थे. अपने आसपास के किसानों को वे उसी दर पर मुहैया करा रहे हैं! ट्रेलिस विधि से लगाए पौधे- 👉 आदित्य ने हमें बताया कि ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए किसी विशेष मिट्टी की जरूरत नहीं होती है. यूपी, एमपी, बिहार के किसान भी आराम से इसकी खेती कर सकते हैं. मानक तो ये है कि एक एकड़ में 2000 पौधे लगाए जाएं, लेकिन ट्रेलिस विधि (Trellis Method for Dragon Fruit) से उन्होंने 5 एकड़ में करीब 20 हजार पौधे लगाए हैं. उन्होंने बताया कि यह मूलत: कैक्टस की प्रजाति का एक पौधा है. इसे पिलर का सहारा देना होता है. उन्होंने भी अपने खेत में सिमेंट के पिलर बनवाकर पौधे लगाए हैं! सिंचाई के लिए ड्रिप इरीगेशन विधि- 👉 ड्रैगन फ्रूट की सिंचाई को लेकर उन्होंने बताया कि फ्लड एरिगेशन यानी सामान्य तरीके से भी इसकी सिंचाई की जा सकती है. हालांकि ड्रिप एरिगेशन यानी टपक सिंचाई इसके लिए ज्यादा मुफीद होती है. इससे पौधों को बेहतर पोषण मिलता है और उत्पादन पर अच्छा प्रभाव पड़ता है! पीएम कृषि सिंचाई योजना काम आई- 👉 आदित्य मिश्रा ने बताया कि ड्रिप एरिगेशन के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से उन्हें काफी मदद मिली. डिस्ट्रिक्ट हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट ने मदद की. 3 एकड़ खेत के लिए उनका आवेदन स्वीकृत हुआ. एजेंसी खेता का सर्वे कर के गई और फिर आकर सारे उपकरण, सेटअप वगैरह लगा गई. उन्होंने बताया कि 3 एकड़ से कम खेती में 90 फीसदी सब्सिडी मिल जाती है. उन्हें केवल 10 ​परसेंट खर्च वहन करना पड़ा! कितना होता है उत्पादन, कितनी होती है कमाई? 👉 उत्पादन को लेकर आदित्य ने बताया कि एक बार पौधे लगाकर किसान 25 साल तक निश्चिंत हो सकते हैं. इसके पौधे एक साल में 7 बार फल देते हैं. जैसे मई की शुरुआत में कलियां निकलती है, तो जून के लास्ट तक फल पक जाते हैं. जून या जुलाई में कलियां होती हैं, तो अगस्त में फल तोड़े जा सकते हैं! 👉 उन्होंने बताया कि उनके खेत में पहले साल एक पोल पर 5 किलो फल आए, फिर दूसरे साल 10 किलो और फिर तीसरे साल से 7 राउंड में एक पोल पर 20 किलो फल आने लगे. उनके यहां लोकल बाजार में लोग खेत से ही 250 रुपये किलो तक फल ले जाते हैं. लोकल के अलावा आसपास के जिलों में और लखनऊ तक भी उनके खेतोंं से फल भिजवाए जाते हैं. उन्‍होंने बताया कि एक एकड़ में 8 से 10 लाख रुपये तक की कमाई आराम से हो जाती है! स्त्रोत:- TV9 👉 प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक 👍 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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