सलाहकार लेखएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
"जीरे की खेती के लिए अहम बातें"
👉🏻"जीरे की खेती के लिए उपयुक्त समय 25 -30 नवंबर के बिच का होता है| " 👉🏻जीरे की बुवाई छिडक़ाव विधि से नहीं करते हुए लोहे या लकड़ी के हुक से 25 -30 सेमी. के अंतराल में कतारे बनाकर बीज की बुवाई करनी चाहिए और ऊपर से दंताली चलनी चाहिए ताकि बीज मिटटी में अच्छे से ढक जाये | ध्यान रहे की मिट्टी की परत 1 सें. मी से मोटी ना हो | क्योंकि ऐसा करने से जीरे की फसल में सिंचाई करने व खरपतवार निकालने में समस्या नहीं होती है। 👉🏻जीरे की खेती के लिए शुष्क एवं साधारण ठंडी जलवायु सबसे उपयुक्त होती है। बीज पकने की अवस्था पर अपेक्षाकृत गर्म एवं शुष्क मौसम जीरे की अच्छी पैदावार के लिए आवश्यक होता है। 👉🏻 जीरा की खेती से अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए इसकी बुवाई के समय 24से 28 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान जबकि फसलों की वृद्धि के समय 20 से 25 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान काफी अच्छा माना जाता है। 👉🏻जीरे की फसल के लिए मिट्टी का पीएच मान 5.5 से 7.5 तक होना उचित माना जाता है। 👉🏻अधिक नमी के कारण फसल पर छाछ्या तथा झुलसा रोगों का प्रकोप होने के कारण अधिक वायुमण्डलीय नमी वाले क्षेत्र इसकी खेती के लिए अनुपयुक्त रहते हैं। 👉🏻अधिक पालाग्रस्त क्षेत्रों में जीरे की फसल अच्छी नहीं होती है। 👉🏻वैसे तो जीरे की खेती सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन रेतीली बलुई या दोमट मिट्टी जिसमें कार्बनिक पदार्थो की अधिकता व उचित जल निकास हो, इसकी खेती के लिए सबसे उपयुक्त होती है। 👉🏻जीरे की सिंचाई में फव्वारा विधि का उपयोग सबसे अच्छा रहता है। इससे जीरे की फसल को आवश्यकतानुसार समान मात्रा में पानी पहुंचाता है। 👉🏻पकती हुयी फसल में सिंचाई न करे एवं दाना बनते समय अंतिम सिंचाई गहरी करनी चाहिए। 👉🏻गत वर्ष जिस खेत में जीरे की बुवाई की गई हो, उस खेत में जीरा नहीं बोए अन्यथा रोगों का प्रकोप अधिक होगा।" स्त्रोत:- एग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, 👉🏻प्रिय किसान भाइयों दी गई उपयोगी जानकारी को लाइक👍🏻करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद! "
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