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जाने क्यों होता हैं पशुओं में खुरपका रोग?
🐄गायों और भैंसों को खुरपका रोग काफ़ी प्रभावित करता है. यह काफी तेज़ी से फैलने वाली एक संक्रामक बीमारी है, जिसके कारण गायों और भैंसों के दूध उत्पादन में काफी कमी आ जाती है! 👉ऐसे में इस बीमारी के रोकथाम के लिए गायों और भैंसों का टीकाकरण बहुत महत्वपूर्ण है. अगर आप पशुपालन करते हैं, तो सबसे पहले खुरपका रोग का कारण, लक्षण एवं नियंत्रण के तरीके जरूर पढ़ लें! खुरपका रोग का कारण - 👉इस रोग का मुख्य सूक्ष्म कीट हैं, जो आंखों से नहीं दिखते हैं. इस कीट को विषाणु या वायरस भी कहा जाता है. खुरपका रोग का विषाणु अब तक ज्ञात सभी विषाणुओं से आकृति में छोटा है. इसका आकार 7 से 21 मिलीमीटर माइक्रोन का होता है. इस विषाणु के 7 प्रकार और अनेक उप प्रकार हैं. हमारे देश में खुरपका रोग आमतौर पर ए, ओ, सी एवं एशिया- 1 द्वारा फैलता है! खुरपका रोग का लक्षण- 👉अगर किसी पशु को खुरपका रोग लग जाए, तो उससे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. कभी-कभी इस रोग से पशु की मौत भी हो सकती है, तो आइए आपको इस रोग के लक्षण की जानकारी देते हैं - ▪️ पशुओं को तेज बुखार आना ▪️ पैरों में सूजन आना ▪️ खुरों के बीच में छोटे-छोटे दाने उभरना और फिर छल्ले बन जाना. ▪️ अगर रोग बढ़ता है, तो यह छल्ले फलने लगते हैं और जख्म का रूप ले लेते हैं. ▪️ खुर में जख्म होने की वजह से पशुओं को चलने में तकलीफ होती है. ▪️ पैरों के जख्म में कीचड़ और मिट्टी लगने से कीड़े लगने लगते हैं. ▪️ गर्भवती पशुओं में गर्भपात होने की संभावना बढ़ जाती है. ▪️ कई बार पशुओं की मृत्यु भी हो सकती है. ▪️ खुरपका रोग से बचाने का तरीके- ध्यान दें कि गायों और भैंसों को होने वाले खुरपका रोग का कोई इलाज नहीं है, इसलिए पशुओं का टीकाकरण अवश्य कराएं. स्त्रोत:- Krishi Jagran 👉 प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक 👍 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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