पशुपालनकृषक जगत
जानिए, गाय के प्रसव के बाद देखभाल कैसे करें!
👉🏻 गाय की प्रसव के बाद देखभाल – प्रसव क्रिया के निम्नलिखित लक्ष्ण होते हैं- प्राथमिक लक्षण 👉🏻 प्रसव के 3-4 दिन पहले अयन तथा थनों पर सूजन दिखाई देती है तथा ऊपर की त्वचा गुलाबी दिखाई देती है। उसमें खीस भरा होता है जिससे अयन सख्त दिखता है। पूंछ की दोनों मांसपेशियाँ ढ़ीली पड़ जाती हैं और पुट्ठे पर गढ्ढे बन जाते हैं। गाय बेचैन रहती है तथा एकान्त में रहना पसंद करती है। उसके योनीद्वार पर सूजन दिखाई देती है तथा उससे सफेद चिपचिपा पदार्थ (म्युकस) बाहर आता दिखाई देता हैं। यह सब लक्ष्ण दिखाई देने शुरू होते ही गाय को एक अलग बाड़े में रखें। इस बाड़े का फर्श थोड़ा खुरदरा होना चाहिए लेकिन चुभने वाला नहीं हो। फर्श पर नर्म घांसफूंस बिछाकर गाय को ऊपर रखें। बाड़ा हवादार, प्रकाशमान लेकिन ज्यादा पानी की अलग से समुचित प्रबंध करें। बाड़े में गाय पर नजर रखने हेतु अनुभवी व्यक्ति जो प्रसव तथा उसके उपरान्त गाय की देखभाल कैसी करें इसके बारे में जानकारी रखता है उसे तैनात करें। उसे वहां 24 घण्टे रहना चाहिये। क्योंकि प्रसव कभी भी हो सकता है तब गाय की मदद हेतु कोई चाहिये। 👉🏻 बाड़े में गर्म पानी करने हेतु बर्तन, साफ कपड़े, जन्तूनाशक दवा, कपास, साफ ब्लेड, लाल दवा (पोटेशियम परमेंगनेट), बाल्टी, मग(लोटा) सभी जरूरी समान पहले से ही तैयार रखें। प्रसव क्रिया की द्वितीय अवस्था 👉🏻 गाय को प्रसव पीड़ा शुरू होती हैं जो कम ज्यादा होती रहती है। जब वह बढ़ती है तो गाय बेचैन हो उठती है और बारबार बैठती है। जब पीड़ा बहुत बढ़ती है तो लेट जाती है। पीड़ा कम होने पर उठती है। उसके श्वसन की तथा नाड़ी की गति बढ़ जाती हैं। यह बहुत कठनाई भरे पल होते हैं जिनपर बारीक नजर रखनी पड़ती है। प्रसव की तृतीय अवस्था 👉🏻 प्रसव पीड़ा चरम सीमा तक पहुंचती है तो तभी जननद्वार से पानी जैसे द्रव से भरी थैली बाहर आनी शुरू होती है और धीरे-धीरे बाहर आती है। वह फूट जाती है और उसके भीतर का द्रव बह जाता हैं। इसके बाद बच्चे के अगले पैर के खुर दिखाई देते हैं और घुटने से नीचे उसका मुँह रखा हुआ दिखाई देता है। यह सामान्य जनन की स्थिति होती है। कभी-कभी किसी कारणवश बछड़े की गर्दन टेढ़ी हो जाती हैं। या बच्चा तिरछा या उल्टा हो जाता है यह असामान्य स्थिति कहलाती है और इन अवस्थाओं में बच्चे का जननद्वार से बाहर निकलना कठिन हो जाता है। गाय बार-बार जोर लगाती है ताकि बच्चा बाहर निकल जाये पर वैसा नहीं हो पाता इसे कष्ट प्रसव (डिस्टोकिया) कहते हैं। ऐसी स्थिति आने पर अनुभवी व्यक्ति या पशुओं के डॉक्टर को बुलाकर गाय की मदद करवायें तथा प्रसव सम्पन करवायेें। 👉🏻 प्रसव के बाद लगभग छ: घण्टों में गाय जेर बाहर डाल देती है लेकिन ज्यादा उम्र, गर्भाशय की मांसपेशियां कमजोर होना, संक्रमण कमजोरी आदि कारणों से कभी-कभी जेर ना गिरे तो गर्भाशय पर सूजन आना, सडऩा, गाय को बुखार होना, भूख कम लगना आदि समस्याएं पैदा होती हैं। अत: अनुभवी डॉक्टर को बुलाकर जेर निकलवा लें। डॉक्टर उपलब्ध न हो तो गाय को 25 ग्राम मँगसल्फ, 200 ग्राम सौंठ चूर्ण को गुनगुने पानी में मिलाकर पिलायें। 👉🏻 खेती तथा खेती सम्बंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए कृषि ज्ञान को फॉलो करें। फॉलो करने के लिए अभी ulink://android.agrostar.in/publicProfile?userId=558020 क्लिक करें। स्रोत:- Krishak Jagat, 👉🏻 प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। यदि दी गई जानकारी आपको उपयोगी लगी, तो इसे लाइक👍🏻करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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