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सलाहकार लेखKisan Helpline
जानिए, गर्मियों में गहरी जुताई का विशेष महत्व!
👉🏻 किसान भाइयों रबी फसलों की कटाई मार्च के अंतिम सप्ताह या अप्रैल के पहले सप्ताह तक किसानों को लगभग मुफ्त कर देती है। इस समय खेत में इतनी नमी होती है कि गहरी जुताई आसानी से की जा सकती है। यह सबसे अच्छा समय है। गर्मियों में इस गहरी जुताई का महत्व और लाभ निम्नलिखित बिंदुओं से स्पष्ट होता है - जल संरक्षण:- अधिकांश किसान एक निश्चित गहराई (6-7 इंच) पर जुताई करते हैं, जिससे पानी का प्रवाह अधिक होता है। गर्मियों में गहरी जुताई (जो लगभग 9 से 12 इंच गहरी होती है) में यह सख्त परत टूट जाती है। परिणामस्वरूप, बारिश के मौसम में ऐसे खेतों की जल धारण क्षमता बढ़ जाती है। इस तरह जल संरक्षण को प्रत्यक्ष बढ़ावा मिलता है। खरपतवार नियंत्रण:- खरपतवार लगभग 20-60 प्रतिशत तक फसल उत्पादन कम कर सकते हैं। कुछ खरपतवारों जैसे कि कंस, मोथा, दूध आदि की जड़ें गहरी रहती हैं। उन्हें नियंत्रित करने का एक प्रभावी तरीका गर्मियों की गहरी जुताई है, जिसके कारण उक्त खरपतवारों, प्रकंदों की जड़ें ऊपरी सतह पर आ जाती हैं, जो बाद में सूख जाती हैं और चिलचिलाती गर्मी में नष्ट हो जाती हैं। कीट और रोग नियंत्रण:- फसल रोगों के रोगजनक एवं कीटों के अंडे व शंखी मिट्टी में रहते हैं। गहरी जुताई के कारण वे या तो ऊपर आ जाते हैं या गहराई में दबकर मर जाते हैं। ऊपर आने पर, वे तेज गर्मी के संपर्क में आने से नष्ट हो जाते हैं। इस तरह से कीटों और रोगों पर नियंत्रण संभव हो जाता है। मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि:- गहरी जुताई वाले खेत पहली बारिश के मौसम में सभी पानी को अवशोषित करते हैं, जिससे इन खेतों में अधिकतम वायुमंडलीय नाइट्रोजन की हानि होती है। इसके साथ ही गहरी जुताई वाले खेतों में मिट्टी का कटाव भी कम होता है। परिणामस्वरूप, पोषक तत्वों का प्रवाह भी रुक जाता है। उपरोक्त बिंदुओं से यह स्पष्ट है कि हमारे किसान भाइयों को इस गहरी जुताई से कई लाभ मिल सकते हैं। शायद यही वजह है कि मध्य प्रदेश सरकार हलधर गर्मियों में जुताई के लिए किसान भाइयों को अनुदान दे रही है, जिसे अपनाकर किसान भाई ज्यादा से ज्यादा लाभान्वित हों। गहरी जुताई में सावधानियां:- 1. पूरे खेतों की एक समान जुताई करनी चाहिए तथा बिना जुताई वाला स्थान नहीं रहना चाहिए। 2. फसल के अवशेष तथा अनावश्यक उगे पौधों को खेत में दबा देना चाहिए। 3. गहरी जुताई के समय ध्यान रखें कि कम से कम मृत कूढ़ (नाली) खेत में बने, इसके निदान के लिए पलटीफार प्लाउ का उपयोग किया जा सकता है। 4. गहरी जुताई के समय कई स्थानों पर मिट्टी एकत्र हो जाती हैं, उसके नीचे बिना जुता खेत रह जाता है, उसकी भी जुताई करनी चाहिए। 5. पुरे खेत में भूमि के प्रकार के अनुसार एक समान गहरी जुताई करनी चाहिए। 6. गहरी जुताई तीन वर्ष में एक बार अवश्य करें। 👉🏻 खेती तथा खेती संबंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए कृषि ज्ञान को फॉलो करें। फॉलो करने के लिए अभी क्लिक ulink://android.agrostar.in/publicProfile?userId=558020 करें। स्रोत:- Kisan Helpline, 👉🏻 प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक 👍 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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