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जैविक खेतीएग्रोवन
जरबेरा फूल की खेती का जैविक तरीका
जरबेरा के फूल आकर्षक होते हैं और इनको ज्यादा समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इनका उपयोग शादी समारोहों में व्यापक रूप से किया जाता है। इन फूलों की मांग ज्यादा होने के कारण इनका बाजार भाव भी अधिक है। इसलिए भारत में इन फूलों की खेती दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। फसल में जीवाणु खाद का उपयोग 500 ग्राम एज़ोस्पिरिलम, 500 ग्राम फॉस्फोरस-घुलने वाले जीवाणु उर्वरक, ट्राइकोडर्मा 500 ग्राम /10 किलो गोबर की खाद साथ डालें और इसे प्लास्टिक पेपर में 8-10 दिनों के लिए ढक कर रखें। उसके तीन सप्ताह बाद तीन सौ वर्गमीटर में जरबेरा के रोपण में दिया जाना चाहिए। रोग नियंत्रण प्रारंभिक वृद्धि के चरण में फफूंद जनित रोगों के कारण जड़ या तना सड़ने की संभावना अधिक होती है। रोगजनक कवक आमतौर पर पौधे को संक्रमित करते हैं। रोगजनक कवक रायझोक्टोनिया, फ्युजॅरियम, पिथियम, फायटोप्थोरा और स्क्लेरोशियम होते हैं। रोग के लक्षण रोग के कारण नर्सरी में पौधे मर जाते हैं। कवक आमतौर पर जमीन में खेती के बाद उगता है और पूरे क्षेत्र को सूखा देता है और समय के साथ पूरे पेड़ को सूखा देता है। यदि पानी की अच्छी निकासी नहीं है और नमी की मात्रा अधिक है तो बीमारी से एक बड़ा हिस्सा खत्म हो जाता है। नियंत्रण के उपाय • पौधे रोपने से पहले मिट्टी को कीटाणुरहित करें। कीटाणुशोधन के 7-10 दिनों बाद पौध रोपण किया जाना चाहिए। • स्वस्थ पौधे लगाएं। • ट्राइकोडर्मा और स्यूडोमोनस का प्रयोग जैविक फफूंद नाशक 500 ग्राम/10 किलो गोबर की खाद के साथ अलग-अलग करें, ताकि पौधे लगाने से पहले ही बीमारी को नियंत्रित किया जा सके। • उचित जल निकासी की व्यवस्था करें तथा मिट्टी की नमी की जांच करें। ध्यान दें तैयार घोल को पौधे की जड़ों के आसपास हर महीने दें। उर्वरक को संतुलित करने के लिए सिफारिशों का पालन करें। संदर्भ : एग्रोवन
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