स्वास्थ्य सलाहनवभारत टाइम्स
चेतावनी: सितंबर में आ सकती है कोरोना की तीसरी लहर!
👉🏻कोरोना की दूसरी लहर के दौरान स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से चरमरा गई थी। वहीं आने वाली तीसरी लहर को लेकर जो अनुमान लगाए जा रहे हैं। उनमें कहा गया है कि कोरोना की तीसरी लहर दूसरी लहर से ज्यादा खतरनाक साबित होगी। इस दौरान कोरोना के मामलों में अस्पतालों में मरीजों को भर्ती होना भी जादा पड़ सकता है। वहीं नीति आयोग के कोविड टास्क फोर्स के हेड वीके पॉल ने तो यह भी कहा है कि भारत के अंदर आने वाले समय में रोजाना कोरोना के 6 लाख तक मामले सामने आ सकते है। ​अक्टूबर अंत या नवंबर की शुरुआत में तीसरी लहर चरम पर होगी:- 👉🏻कोरोना की तीसरी लहर को लेकर विशेषज्ञों ने संकेत दिया है कि तीसरी लहर के अंदर कोरोना के मामले बहुत अधिक हो सकते हैं, और यह लहर सितंबर से शुरू हो सकती है। वहीं यह लहर अक्टूबर के अंत में या नवंबर की शुरुआत में अपने चरम पर होगी। वहीं कुछ विशेषज्ञ तीसरी लहर को भी दूसरी लहर जितना ही प्रभावी बता रहे हैं। 👉🏻हालांकि नीति आयोग ने विशेषज्ञों द्वारा दिए गए संकेतों के आधार पर एक गणित बनाया है। जिसमें प्रतिदिन 6 लाख कोरोना के मामले आ सकते हैं। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर नीति आयोग ने अधिकारियों को तैयारी रहने की चेतावनी दी है। ​क्‍या कहता है विज्ञान का लॉजिक:- 👉🏻तीसरी लहर को लेकर विज्ञान का लॉजिक बताता है कि कोई भी नई लहर, पुरानी लहर के समाप्त होने के 2 से 3 महीने बाद ही आती है। वहीं ऐसे में देखें तो मई में दूसरी लहर अपने चरम पर थी, तो इस लिहाज से कहा जा सकता है कि सितंबर के अंदर कोरोना की लहर आ सकती है। 👉🏻आपको बता दें कि तीसरी लहर त्योहारों के समय पर आएगी, इस दौरान बाजारों और अन्य स्थानों पर भीड़ अधिक होगी। इसकी वजह से भी यह लहर अधिक खतरनाक हो सकती है। ऐसे में अगर तैयारी पूरी नहीं की गई तो यह तीसरी लहर दोनों ही लहरों के मुकाबले अधिक घातक होगी। ​कितनी खतरनाक होगी तीसरी लहर:- 👉🏻दूसरी लहर के मुकाबले तीसरी लहर कितनी ज्यादा खतरनाक होगी अभी इस पर कुछ शोध की आवश्यकता है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि तीसरी लहर दूसरी लहर के मुकाबले थोड़ी कम ही खतरनाक होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि दूसरी लहर के दौरान सब कुछ सामान्य होने पर लोग पहले से ही वायरस की चपेट में आ गए थे। 👉🏻वहीं कुछ लोगों का कहना है कि देश के ऐसे हिस्सों में संक्रमण का खतरा अधिक होगा। जहां अब तक वैक्सीनेशन नहीं हुआ है। वहीं अगर वैक्सीनेशन को तेज किया जाए तो इससे तीसरी लहर के खतरे को कम किया जा सकता है। ​बच्चों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है तीसरी लहर:- 👉🏻कोरोना की दूसरी लहर ने बच्चों को भी प्रभावित किया था। वहीं माना जा रहा है कि कोरोना की तीसरी लहर बच्चों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए ही प्रशासन तीसरी लहर में बच्चों के हिसाब से स्वास्थ्य सेवाएं तैयार करने की बात भी चल रही है। 👉🏻हालांकि कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के कितने मामले सामने आएंगे यह अनुमान लगाना लगभग नामुमकिन है। लेकिन इसके लिए तैयार रहना बहुत जरूरी है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय पर बच्चों के लिए बुनियादी ढांचे, वेंटिलेटर, आईसीयू बेड उपलब्ध नहीं कराए गए, तो वयस्कों की तरह बच्चों की भी स्थिति गंभीर हो सकती है। 👉🏻बच्‍चों को ना केवल कोरोना का सुपर स्प्रेडर माना जा रहा है, बल्कि यह स्पर्शोन्मुख वाहक भी है। आपको बता दें कि अब तक बच्चों को वैक्सीन नहीं लगी है। यह बात बच्चों के लिए बेहद खतरनाक है। वहीं Zydus Cadila नाम की वैक्सीन को आपातकालीन स्थिति में लाइसेंस तो मिल गया है। 👉🏻लेकिन इसके डोज बच्चों को सितंबर से ही लगने शुरू होंगे। इसके अलावा बच्चों के लिए ही तैयार की जा रही कोवैक्सीन का लाइसेंस अभी तक नहीं मिला है और इसके बाजार में आने की उम्मीद भी दिसंबर तक ही लगाई जा रही है। इस स्थिति में बच्चों के लिए तीसरी लहर अधिक खतरा पैदा कर सकती है। ​क्या कोरोना का नया वेरिएंट आ सकता है:- 👉🏻कोरोना वायरस का डेल्टा वेरिएंट भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अब तक का सबसे तेजी से फैलने वाला म्यूटेंट माना जा रहा है। ऐसा हो सकता है कि कोरोना के कुछ अन्य नए वेरिएंट भी सामने आ जाएं। ऐसे में अगर कोरोना के नए म्यूटेंट देखने को मिले तो हो सकता है कि यह हमारी इम्यूनिटी और एंटीबॉडी को पार करता है तो यह हमें नुकसान पहुंचा सकता है। कोरोना के अन्य दूसरे वेरिएंट लोगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं क्योंकि भारत के अंदर अब तक बहुत से लोगों को वैक्सीन का डोज नहीं मिला है। यही नहीं वैक्सीनेशन की मांग भी अब तक पूरी नहीं हुई है। भारत में डेल्टा वेरिएंट का हाहाकार, तीसरी लहर में हो सकता है हावी:- 👉🏻आपको बता दें कि डेल्टा प्लस वैरिएंट धीरे - धीरे कुछ राज्यों में फैलता जा रहा है और अब तक उन लोगों को भी संक्रमित कर चुका है जो पहले से ही इम्यून है। साथ ही यह अब तक 3 लोगों की जान भी ले चुका है। लेकिन अब देखना यह है कि क्या यह डेल्टा प्लस वेरिएंट अभी और अधिक फैलेगा। साथ ही क्या यह उतना ही खतरनाक होगा जितना डेल्टा वैरिएंट था। हालांकि वायरस का म्यूटेशन रोका नहीं जा सकता। वहीं अध्ययनों के मुताबिक वैक्सीनेशन के जरिए खुद को कुछ हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है। स्रोत:- TV 9 Hindi, 👉🏻प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक 👍🏻 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
6
3
अन्य लेख