सलाहकार लेखएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
चना की फसल में फली भेदक इल्ली का नियंत्रण! 
👉🏻 चना फली भेदक कीट चना में लगने वाले कीटों में सबसे खतरनाक कीट है। हेलिकोवर्पा आर्मिजेरा एक बहुभक्षी कीट है, जो समान्यतः चना फली भेदक नाम से जाना जाता है। चना की फसल पर लगने वाला यह प्रमुख कीट है। इस कीट की छोटी सूँड़ी फसल की कोमल पत्तियों को खुरच-खुरच कर खाती है व बड़ी सूँड़ी चना की फलियों में गोलाकार छिद्र बनाकर मुँह अन्दर घुसाकर दाने को खा जाती है। 👉🏻 यह चने की फसल का प्रमुख कीट है फसल की विपरीत परिस्थितियों में यह नुकसान 78-80 प्रतिशत तक पहुचाता सकता है। 👉🏻 चना फली भेदक इल्ली का नियंत्रण 👉🏻 जल्दी पकने वाली प्रजातियों का प्रयोग करें। 👉🏻 गर्मियों में गहरी जुताई करने से कीट के कोष (प्यूपा) मर जाते हैं।  👉🏻 कीट भक्षी चिड़ियों के बैठने के लिए टी आकार का ट्रैप लगायें। 👉🏻 खेतों का साप्ताहिक भ्रमण एंव निगरानी चना फली भेदक कीट संख्या के फैलाव व व्यापकता का आंकलन किया जा सकता है।   👉🏻 एच.ए.एन.पी.वी. 250, एल.ई. + टीनॉपोल 1% का छिड़काव करें। 👉🏻 आवश्यकतानुसार-फसल में फली भेदक के प्रबन्धन  के लिये निबौली सत 5 प्रतिशत प्रयोग करें। 👉🏻 चने की फसल में फली भेदक के लिये एन.पी.बी. विषाणु (250 सूड़ी समतुल्य प्रति हेक्टेयर) अवश्य प्रयोग करें। 👉🏻 नोराल्यूरान 10% ई.सी. @ 700 मिली प्रति हेक्टेयर। 👉🏻 क्लोरन्ट्रानिलीप्रोल 18.5% एस.सी. @ 125 मिली प्रति हेक्टेयर। 👉🏻 क्लोरोपायरीफॉस 20% ई.सी. @ 2500 मिली प्रति हेक्टेयर। 👉🏻 इमामेक्टिन बेंजोएट 5 % एसजी @ 8 ग्राम प्रति पंप छिड़काव करें। स्रोत:- एग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। यदि दी गई जानकारी आपको उपयोगी लगी, तो इसे लाइक 👍 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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