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चकबंदी क्या है? जानें इसके बारे में सब कुछ!
👉आमतौर पर चकबंदी की प्रक्रिया को किसान काफी जटिल मानते हैं. ग्रामीण इलाकों में अक्सर परिवार में बंटवारे के बाद जमीन भी बंट जाती है. इसकी वजह पैतृक खेत, बाग आदि की जमीन कई टुकड़ों में बंट जाती है। क्या होती है चकबंदी? 👉इस वजह से खेत छोटे हो जाते हैं, जिससे किसानों को खेती करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. साथ ही समय के साथ सरकारी जमीन पर भी अतिक्रमण की शिकायतें बढ़ जाती हैं. इसकी वजह सरकार चकबंदी करवाती है. हर राज्यों के अलग-अलग चकबंदी अधिनियम होते हैं। 👉भारतीय कृषि की कम उत्पादन का एक मुख्य कारण भूमि का उपविभाजन एवं अपखंडन है. उप विभाजन का मतलब- भूमि का छोटे-छोटे टुकड़ों में होना तथा अपखंडन का अर्थ है- छोटे-छोटे टुकड़ों का दूर-दूर बिखरा होना. खेती की भूमि छोटी होने की वजह से कृषि की आधुनिक तकनीक को नहीं अपनाया जा सकता. इसके लिए किसानों के बिखरे हुए जमीन के टुकड़े को एक जगह किया जाता है. इसे ही चकबंदी कहते हैं। चकंबदी के लाभ क्या हैं ? 👉खेत का आकार अधिक हो जाने से औसत उत्पादन की लागत घट जाती है। 👉कानूनी रूप से चक बन जाने के कारण भूखंडों की सीमा को लेकर उत्पन्न होने वाले विवाद खत्म हो जाते हैं। 👉छोटे-छोटे खेतों की मेड़ों में भूमि बर्बाद नहीं होते। 👉बड़े चक के रूप में खेत का आकार बड़ा हो जाने के कारण आधुनिक उपकरणों, जैसे-ट्रैक्टर आदि का इस्तेमाल आसान हो जाता है। 👉एक स्थान पर भूमि हो जाने के कारण कृषि क्रियाकलापों की उचित देखभाल संभव हो पाती हैं। चकबंदी में आने वाली मुश्किलें:- 👉चकबंदी में अक्सर किसानों को छोटे-छोटे खेतों के टुकड़े के बदले कुल जमीन के अनुसार एक खेत मिलता है। 👉कई बार किसानों को उनके बिखरे हुए खेतों के बदले 2 या 3 चक आवंटित किए जाते हैं, जो चकबंदी उद्देश्यों के खिलाफ है। 👉किसानों का पैतृक भूमि के प्रति लगाव मुश्किलें खड़ी कर देता है। 👉किसान की बिखरी हुई अलग-अलग उर्वरता वाली होती है. इसकी वजह से उसकी कीमत अलग-अलग होती है. अक्सर कम उर्वरता की समस्या चकबंदी के काम में मुश्किलें पैदा करती है। स्रोत:- TV 9 Hindi, 👉 प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक 👍 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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